अच्छी मौत की निशानी

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🌹रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि मौत का एक दिन आना अफसोस के लायक़ है कि मरने वाला न कुछ कह सके और न कर सके,
आपके ज़माने में कोई आदमी बैठा हुआ एक दम मर गया तो किसी ने कहा क्या अच्छी मौत मरा है न कोई बीमारी देखी और न कुछ जान निकलने की तकलीफ़ हुई।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को जब उसका यह कहना मालूम हुआ तो आपने सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फ़रमाया कि तेरे पास इसका क्या सबूत है कि अचानक एक दम मरने से उसको तकलीफ़ नहीं हुई,

अगर अल्लाहतआला उसको इस हाल में मौत देता कि वह बीमारी की तकलीफ़ उठाता तो उसके सब गुनाह माफ़ हो जाते। = (मिश्कात शरीफ)

👉फायदा} बीमार होकर मरने में यह नफ़ा है कि बीमार तौबा कर लेता है अपने गुनाहों की माफ़ी माँग लेता है किसी का कोई हक़ जिम्मे हो तो उसको अदा कर देता है या हक़ वाले से माफ़ करा लेता है,

नमाज़ या रोज़े वग़ैरा उसके जिम्मे हो तो उनका फ़िदया यानी बदला देने की या हक़ वालों के हक़ूक अदा करने की वसीयत और नसीहत कर देता है या खुद वारिसों का हक़ अदा कर देता है।

🌹मोहसिन-ए-आज़म सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फ़रमाते हैं कि अल्लाहतआला अपनी इज्जत व अज़मत की कसम के साथ फ़रमाता है कि जब मैं किसी मुसलमान बन्दे के बारे में यह चाहता हूँ कि उसको अपनी रहमत में छुपा लूँ तो दुनिया से उसको ऐसी हालत में मौत देता हूँ कि वह दुनिया में तमाम गुनाहों का बदला पा लेता है और तरह-तरह की बीमारियाँ और सख्तियाँ उठा लेता है। =(मिश्कात शरीफ)

👉अल्लाह तआला हम सब को कहने सुनने और पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाये,
और नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बताये हुए रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाये अमीन।