अफ़ग़ानिस्तान : अमेरिकी हमलों में 20 से अधिक आम अफ़ग़ानी लोगों की मौत

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अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में अशांति व संकट के कारक बन गये हैं और यथावत वे अफ़ग़ानी जनता की हत्या कर रहे हैं।

अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो की अफ़ग़ान यात्रा के अवसर पर इस देश में अमेरिकी सैनिकों ने नंगरहार, खोस्त और लोगर प्रांत में हमला किया जिसमें कम से कम 22 अफग़ान नागरिक हताहत व घायल हो गये जबकि अमेरिकी विदेशमंत्री ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ़ ग़नी के साथ काबुल में होने वाली भेंटवार्ता में कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति का लक्ष्य इस देश में शांति व सुरक्षा स्थापित करने में सहायता करना है।

रोचक बात यह है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों का क्रिया- कलाप इस बात का सूचक है कि स्वयं अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में अशांति व संकट के कारक बन गये हैं और यथावत वे अफ़ग़ानी जनता की हत्या कर रहे हैं।

इसका अर्थ यह है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के संबंध में अमेरिकी अधिकारियों का दावा न केवल विरोधाभास रखता है बल्कि इस बात का परिचायक है कि अमेरिकी अधिकारियों की नज़र में अफ़ग़ान जनता का कोई महत्व नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों को इस बात की अनुमति दे दी है कि वे सैनिक कार्यवाहियों में भाग ले सकते हैं।

प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार आतंकवादियों से मुकाबले के बहाने अमेरिकी सैनिकों ने अपने हवाई और ज़मीनी हमलों को नरे सिरे से आरंभ करके अफगानिस्तान में आम लोगों की हत्या शुरु कर दी है।

अमेरिका का दावा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद से मुकाबला कर रहा है परंतु न केवल अफ़ग़ानिस्तान से आतंकवाद का सफाया नहीं हुआ है बल्कि अफ़ग़ान अधिकारियों के कथनानुसार इस समय इस देश में सक्रिय आतंकवादी गुटों की संख्या 20 से अधिक हो गयी है।

इसका अर्थ यह है कि अमेरिका कभी भी अफ़ग़ानिस्तान में शांति व सुरक्षा स्थापित करने का इच्छुक नहीं रहा है बल्कि वह अफ़ग़ानिस्तान में अशांति व संकट जारी रखकर अपनी उपस्थिति का औचित्य दर्शाना चाहता है और अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी व्यवहार अधिक से अधिक अफग़ान जनता के क्रोध का कारण बना है।