अमरीका से मुक़ाबले के लिए चीन व रूस का कार्यक्रम : रिपोर्ट

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चीन व रूस के प्रधानमंत्रियों ने संसार में अमरीका की एकपक्षीय नीतियों से गंभीर मुक़ाबले के लिए अपने अपने देश के संकल्प की घोषणा की है।

चीन के प्रधानमंत्री ली की कियांग और रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदव ने बीजिंग में घोषणा की है कि वे अमरीका के एकपक्षवाद के विरोधी है और किसी भी स्थिति में इस बात की अनुमति नहीं देंगे कि संसार की बहुपक्षवादी व्यवस्था को बदला जाए। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बल देकर कहा है कि एकपक्षवाद संसार के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है और बीजिंग व माॅस्को ने संसार में सुरक्षा व स्थिरता के परिप्रेक्ष्य में विश्व व्यापार संगठन समेत बहुपक्षीय व्यवस्थाओं की रक्षा का फ़ैसला किया है। यद्यपि अमरीका के पिछले राष्ट्राध्यक्षों के काल में भी वाॅशिंग्टन की एकपक्षीय नीतियों से मुक़ाबला उसके प्रतिस्पर्धियों के एजेंडे में शामिल रहा है लेकिन जब से डोनल्ड ट्रम्प अमरीका के राष्ट्रपति बने हैं, तब से वाइट हाउस की नीतियों ने चीन व रूस बल्कि अमरीका के यूरोपीय घटकों को वाॅशिंग्टन की एकपक्षीय नीतियों से मुक़ाबले के लिए एकजुट होने पर प्रेरित किया है।

डोनल्ड ट्रम्प अन्य देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों में अपने देश के हितों की अधिक से अधिक पूर्ति के आधार पर हार-जीत का खेल खेलने के अलावा क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय समझौतों समेत बहुपक्षीय मामलों के संबंध में अपनी कटिबद्धताओं पर एकपक्षवाद के आधार पर काम कर रहे हैं और इसी परिप्रेक्ष्य में वे कई अंतर्राष्ट्रीय समझौतों व संगठनों से अमरीका को बाहर निकाल चुके हैं। पेरिस जलवायु समझौता, पलायन का अंतर्राष्ट्रीय समझौता, परमाणु समझौता, ट्रांस पेसिफ़िक समझौता और यूनेसका संगठन उन अंतर्राष्ट्रीय संधियों व संस्थाओं में शामिल हैं जिनसे ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में अमरीका बाहर निकला है।

चीन व कुछ अन्य देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर अप्रचलित कर लगाने की ट्रम्प जैसी एकपक्षीय नीतियों ने विश्व व्यवस्था को नए राजनैतिक व आर्थिक गठजोड़ों के गठन की दिशा में बढ़ा दिया है। ट्रम्प का एकपक्षवादी रुख़ अन्य देशों पर प्रतिबंध लगाने के रूप में भी सामने आया है जिसके चलते प्रतिबंधित देश, वाइट हाउस का मुक़ाबला करने के लिए आपसी सहयोग की ओर उन्मुख हुए हैं। इन परिस्थितियों में इस बात की भविष्यवाणी की जा सकती है कि ट्रम्प और उनके साथियों की कल्पना के विपरीत अमरीका के विरोधी शक्तिशाली देशों का मोर्चा और अधिक सुदृढ़ होगा और वह अधिक मज़बूती से वाइट हाउस की आर्थिक व राजनैतिक नीतियों का मुक़ाबला करेगा।