अमरीकी दूतावास के बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरण पर दुनिया के देशों ने की अमरीका की आलोचना : रिपोर्ट

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अमरीका के अपने दूतावास को तेल अविव से अतिग्रहित बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने के क़दम की ख़ुद अमरीका के मित्र देशों ने भी आलोचना की है। उनका कहना है कि अमरीका के इस क़दम से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव भड़क उठेगा।

सोमवार को ब्रिटिश सरकार ने एक बयान में बल दिया कि टेरीज़ा मे की सरकार का इस देश के दूतावास को तेल अविव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है और टेरीज़ा मे सरकार अभी भी अमरीकी फ़ैसले से सहमत नहीं है।

ब्रितानी प्रधान मंत्री के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “हम, जेरूस्लम (बैतुल मुक़द्दस) की स्थिति के बारे में अंतिम सहमति से पहले, अमरीका के जेरूस्लम को इस्राईल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने और अपने दूतावास को इस शहर में स्थानांतरित करने के फ़ैसले से सहमत नहीं हैं। ब्रितानी दूतावास तेल अविव में है और उसे स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है।”

फ़्रांस ने भी दूसरे आलोचक देशों के साथ, अमरीका के इस क़दम की आलोचना करते हुए कहा कि अमरीका के इस क़दम से स्पष्ट अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन हुआ है।

फ़्रांसीसी विदेश मंत्री जीन लोद्रियां ने एक बयान में तेल अविव शासन से फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग में सावधानी से काम लेने का मशविरा दिया।

लोद्रियां ने कहा, “फ़्रांस एक बार फिर इस्राईली अधिकारियों से अपील करता है कि बल प्रयोग में संयम व सावधानी बरतें और इसे पूरी तरह आनुपातिक होना चाहिए।”

दूसरी ओर रूस ने भी अमरीका के अपने दूतावास को स्थानांतरित करने के क़दम की आलोचना करते हुए कहा कि मॉस्को अनेक बार बैतुल मुक़द्दस की स्थिति के संबंध में बातचीत के लिए मंच मुहैया करने की पेशकश कर चुका है।

रूसी विदेश मंत्री मंत्री सिर्गेई लावरोफ़ ने कहा, “हमारा दृढ़ विश्वास है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के फ़ैसले को इस तरह एकपक्षीय रूप से बदलना सही नहीं है।”

तुर्क राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने अपने लंदन दौरे के दौरान कहा कि अमरीका ने अपने दूतावास को बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करके पश्चिम एशिया के मामले में एक मध्यस्थ की अपनी भूमिका खो दी है।

उन्होंने चैटहम हाउस इंटर्नैश्नल अफ़ेयर्ज़ थिंक टैंक से बातचीत में कहा, “अमरीका ने अपने ताज़ा क़दम से ख़ुद को समस्या का हिस्सा बना लिया न कि समाधान का और इस तरह उसने पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया में एक मध्यस्थ के अपने रोल को खो दिया। इस फ़ैसले से समुदायों के बीच तनाव व अशांति और भड़केगी।”

मोरक्को के शासक मोहम्मद शष्टम ने अमरीका के एकपक्षीय फ़ैसले की निंदा करते हुए फ़िलिस्तीनी प्रशासन के अध्यक्ष महमूद अब्बास के नाम ख़त में लिखा, “अमरीका के बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के क़दम पर गहरी नज़र रखे हुए हैं।”

उधर मिस्र के विदेश मंत्रालय ने भी फ़िलिस्तीनी नागरिकों के ख़िलाफ़ इस्राईल द्वारा बल प्रयोग की कड़ाई से निंदा करते हुए कहा कि क़ाहेरा “फ़िलिस्तीनी जनता के वैध अधिकार और बैतुल मुक़द्दस की राजधानी वाले एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी स्टेट के उसके मूल अधिकार का पूरी तरह समर्थन करता है।”

उधर फ़िलिस्तीन प्रतिरोध आंदोलन हमास ने प्रदर्शन के जारी रहने पर बल दिया है।

हमास के वरिष्ठ अधिकारी ख़लील अलहय्या ने कहा, “हमास की सैन्श शाखा अतिग्रहण के अपराध पर लंबे समय तक ख़ामोश नहीं रहेगी।”