अल्लाह जिसको चाहे इज़्ज़त बख़्शे, और जिसको चाहे ज़िल्लत

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Sikander Kaymkhani
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एक मर्तबा ख़लीफा हारून रशीद कुरआन मजीद की तिलावत कर रहे थे, जब इस आयत पर पहुंचे जिस आयत में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने फिरऔन का ज़िक्र किया है, तो ख़लीफ़ा हारून रशीद बताते हैं कि वह फ़ख्र करता था।

मुल्क मिस्र और नील के दरख़्तों पर और नील पर, तो हारून रशीद पढ़ते पढ़ते रुक गए, और कुछ देर बाद हुक्म दिया तमाम बग़दाद में गश्त करो और आदमियों को भेजकर एक ऐसा इंसान तलाश करो जो ज़लील हो, ख़्वार हो, रुसवा हो, जिसकी कमीनगी और नालायकी कि कोई हद नहीं हो, कुछ रोज़ की तलाश के बाद एक उजाड़ महल में एक आदमी मिला जो लेटा हुआ था।

आमने सामने कुत्ते पड़े हुए थे गंदगी की कोई इंतिहा नहीं थी, सिपाहियों ने सोचा यही बंदा है जो हमारे काम का है जो गंदे कुत्तों के दरमियान रहने को भी अच्छा समझता है, इस को जगाकर ख़लीफ़ा हारुन रशीद के पास ले जाया गया, हारून रशीद ने पूछा आपका नाम क्या है?
उसने जवाब दिया कहा “तुलुन”
फिर पूछा क्या काम करते हो? बोला कुत्ता पालता हूँ।
हारून रशीद ने कहा मैं तुमको किसी मुक़ाम का अमीर बनाकर भेज दूं, बशर्ते ये की तुम अपना काम इमानदारी से करो, और लोगों की खिदमत में दिन रात लगे रहो, तुलुन नामी उस शख़्स ने कहा कि अगर आप मुझे इस लायक समझ रहे हैं तो मैं हाजिर हूं, हारून रशीद ने हुक्म दिया के इसको, मिस्र का तख़्त दिया जाए इसकी तैयारी का सामान फ़राहम किया जाए, चुनांचे तुलुन के लिए क़ीमती लिबास, नौकर, चाकर, और अच्छा सा घोड़ा फ़राहम कर दिया गया, दरबार वालों ने कहा ऐ खलीफा इस जैसे ज़लील इंसान को आपने वाली-ए-मिस्र क्यों मुक़र्रर किया?

ख़लीफ़ा ने कहा, फिरऔन मलऊन को बड़ा नाज़ था, उस मुल्क पर मैंने फिरऔन के ग़ुरूर को नीचा दिखाने के लिए बग़दाद के सबसे ज़लील और कमीने और निकम्मे इंसान को मिस्र का वाली बना दिया है, और तमाम इख़्तियारात दिए हैं, ताकि दुनिया वालों को मालूम हो जाए कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के नज़दीक इस दुनिया की कोई औकात नहीं और उनको पता हो और वो खुदा की कुदरत देखें।

जब तुलुन ने मिस्र की बागडोर संभाली तो उसने मिस्र के लोगों की फ़लाह व बहबूद के लिए बहुत सारे काम कर दिखाएं, शायद अल्लाह को भी मंजूर था कि फिरऔन की रूह देख ले कि..

“अल्लाह जिसको चाहे इज़्ज़त बख़्शे, और जिसको चाहे ज़िल्लत बख़्शे”