अश्क अली की 1990 मे फ़तेहपुर से टिकट कटने से उनके मन मे आज भी उसकी गहरी टीस नज़र आती है ?

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।अशफाक कायमखानी।सीकर।1985 की राजीव गांधी की देश व्यापी लहर के समय नोहर के कलाल परीवार से तालूक रखने वाले अश्क अली को कांग्रेस ने फतेहपुर से अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान मे उतारा एवं स्थानीय मतदाताओ ने उन्हे मत देकर भारी मतो से जीताकर विधान सभा मे फतेहपुर के विकास को रफ्तार देने के लिये भेजा। लेकिन अली फतेहपुर के विकास को उस समय रफ्तार देने मे पुरी तरह विफल रहने पर कांग्रेस पार्टी के सर्वे मे अगले चुनाव मे उनकी हार निश्चित मानकर उन्हे अगली दफा 1990 मे टिकट ना देने का फैसला करके उनको जनता के सपनो पर खरा ना उतर पाने पर प्रायश्चित करने का एक तरह से अवसर प्रदान किया था।
हालाकि 1990 मे हार की सम्भावना के चलते फतेहपुर से टिकट कटने के बावजूद अश्क अली हर चुनावी साल मे मोसमी नेता की तरह आज तक फतेहपुर से अपने आपको उम्मीदवार दर्शाने के लिये कभी कभार प्रैस रिलीज के माध्यम से कोशिश करते रहे है। पर फतेहपुर के मतदाताओ की भावनाओ के अनूरुप कांग्रेस हाईकमान उन्हे यहां से उम्मीदवार बनाने से हमेशा कनी काटती आ रही है। हालाकि अली अपनी तिकड़म से इसके बाद एक दफा चूरु व दूसरी दफा किशनपोल जयपुर से कांग्रेस टिकट पाने के लिये हाईकमान को समझाने मे कामयाब रहे है। लेकिन इस तिकड़म के बावजूद दोनो ही दफा वहा के स्थानीय मतदाताओ ने उन्हे वापीस बैंरग लोटाकर उनको अभी तक विधान सभा से दूर ही रखते आ रहे है।
1985-मे अली के विधायक बनने के बाद उनकी विफलता के कारण फतेहपुर के आम मतदाताओ के दिल मे कांग्रेस पार्टी के प्रति जो टीस घर कर गई थी। उसके कारण अगले दो चुनावो मे कांग्रेस वहा से लाख जतन करने पर भी जब जीत नही पाई तो स्थानीय सांसद शिशराम ओला ने हार को जीत मे बदलने के लिये हाईकमान को समझाने मे कामयाब होकर रोलसाहबसर के तत्तकालीन युवा सरपंच भंवरु खा को टिकट दिलवाने मे वो कामयाब हुये ओर ओला के इस फैसले को स्थानीय मतदाताओ ने भी पुरा साथ देते हुये कांग्रेस के उम्मीदवार भंवरु खा को भारी बहुमत से चुनाव जीताकर कांग्रेस के लिये जमीन फिर से तैयार करके पासा पलट दिया। उसके बाद शिशराम ओला के सहयोग व अपनी साफ छवि के चलते भंवरु खा तीन दफा लगातार कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर फतेहपुर से विधायक जीतते रहे है। भंवरु खा के इंतेकाल के बाद उनके छोटे भाई हाकम अली खा उनकी छोड़ी सीयासी विरासत को सम्भाल कर जनता की सेवा मे अपना तन-मन-धन व समय लगाकर अपनी साफ छवि व जन हित मे संघर्षि व्यक्तितव कायम किया।
कुल मिलाकर यह है कि फतेहपुर का आम मतदाता आज भी इस बात पर एक राय है कि वो सीकर से बाहरी व्यक्ति को बतौर उम्मीदवार किसी भी सूरत मे बरदास्त करने को तैयार नही। वही अश्क अली हर बार की तरह इस बार भी चुनावी मोसमी नेता की तरह प्रैस रीलीज के माध्यम से अपने आपको फतेहपुर से उम्मीदवार बनाने को दर्शाने की चेष्टा से वो खुद जनता मे हंसी के पात्र बने हुये है।