अख़लाक़, पहलू खान इत्यादि, अपना देश पकिस्तान से करोड़ो गुना बेहतर है

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जान अब्दुल्लाह
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इंसान अपने जीवन की पहली चीज़ नही भूलता। हो सकता है आप इन दोनों को नही जानते लेकिन मैं इन दोनों का चेहरा कभी नही भूल सकता। असल मे मैने अपनी ज़िंदगी मे सबसे पहले “लिंचिंग से मार दिया” की खबर जो सुनी थी वो यही थी। तब मैं बहुत shocked हो गया था कि आज 2010 में भी क्या लोग इतने जंगली हो सकते है कि शक के आधार पर किसी की हत्या कर दे।

यह मामला ऑरकुट के माध्यम से मेरे पास पहुँचा था। इन दोनों का नाम है मुनीब बट और मुगीस बट। यह दोनो सगे भाई थे। पकिस्तान के सियालकोट में भीड़ ने इनको चोर समझ कर पीट पीट कर 15 अगस्त 2010 में मार डाला था। पाकिस्तान एयर पाकिस्तानियों को लेकर तब मेरी सोच ऐसी बन गयी थी कि मुझे पाकिस्तान सबसे घटिया देश लगने लग गया था। तब 2010 में भारतीयों में इस कांड की बहुत निंदा की थी। मेरे जितने भी दोस्त थे ( जो आज कैसे न कैसे अख़लाक़, पहलू इत्यादि की लिंचिंग को जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश करते है) सबने इस पर प्राकर्तिक दुख जताया था। तब हम सबमे एक भावना तो थी कि यार अपना देश पाकिस्तान से लाख नहो करोड़ो गुना बेहतर है यही भावना अब भी मेरे मन मे है कि अपना देश पकिस्तान से आज भी करोड़ो गुना बेहतर है।

इसके बाद इस मामले में 28 लोगो को आरोपी बनाया जिनमे 10 पुलिसवाले थे जिसमे DPO वकार चौहान भी था । 20 sept 2011 को यह केस एन्टी टेररिस्ट कोर्ट में गया और उसने 7 मुख्य लोगो को फांसी की सज़ा सुनाई। 5 लोग सबूतों के अभाव में रिहा हुए लेकिन 7 लोगो को 8 अप्रेल 2016 में सियालकोट में टांग दिया गया। सबको फांसी हुई।

इसके बाद पाकिस्तान में लिंचिंग द्वारा हत्या की मैने कोई खबर नही सुनी।

शशि थरूर ने क्या बोला क्या नही वो छोड़ दीजिए। 2 मिनट के लिए सोचिये कि आज अख़लाक़, पहलू खान, प्रवीण पुजारी ( भाजपा का ही सेवक था), रियाज़ खान, अलीमुद्दीन, सुकांता चक्रवर्ती और खानाबदोश समुदाय के 5 लोगो की धुले में हत्या करने वाले आज कहा है?? जेल में है तो इनको फाँसी कब होगी।

लेकिन इसके उलटे आप देख सकते है कि दादरी के कातिल को तिरंगे से लपेटकर तिरंगे का अपमान हुआ और जयंत सिन्हा 6 या 7 आरोपियों के पास माला लेकर पहुँच गए।

देखिये कोई कुछ नही बनता, सब खुद बन जाते है।

बाकी मैं आपसे क्या बोलू, मेरी एक पोस्ट का मुकाबला इस फीडिंग से नही हो सकता जो आपके दिमाग मे भरी जा रही है

बाकी सोच लो भाइ