अफ़सोस : पैसा देकर लड़की भेजी जा रही है!!!

Posted by

जान अब्दुल्लाह
=============
शाहनवाज़ ( बदला हुआ नाम) और शबाना ( बदला हुआ नाम) दोनो एक दूसरे से प्यार करते थे

दोनो ने निकाह कर लिया।

निकाह के बाद दोनों ने बच्चे हुए

2 बच्चे हो गए, अब शादी में वो आनंद भी न रहा

परमानंद की तलाश में शाहनवाज़ ने फेसबुक में देवानंद बनने की सोची

उसकी मुलाकात शिमला( बदला हुआ शहर) की रुकसाना ( बदला हुआ नाम) से हुई

दोनो चैटिंगे ( चैटिंग नही, चैटिंगे) करने लगे

दोनो प्यार में डूब गए

यह जानते हुए कि रुकसाना का पिता अपनी बेटी का पांव भी कभी 1 शादीशुदा के हाथ मे नही देगा, दोनो ने घर से भागने का निर्णय लिया

दोनो थोड़ी देर भागे फिर सास फूल गयी तो e रिक्शा कर लिया

15 दिन दोनो हनीमून पीरियड में रहे

शबाना को पता लग गयी कि उसके पति ने दूसरी शादी करली तो शबाना ने कहा कि तुम मेरी घेल ऐसा नही कर सकते

शाहनवाज ने कही अब तो कर लिया

शबाना ने कहा तो मुझे तलाक दो

शाहनवाज़ ने कहा यह ले

बच्चो को भी शबाना ले गयी क्योकि रुकसाना ने कही कि मैं क्यो उसके बालक पालू

शबाना अपने घर आगयी, इत्तेफाक से उसकी बड़ी बहन के पति ने भी उसको छोड़ा हुआ था।

यह 4 बहने थी, 2 बड़ी बहनों की हालत देख, बाकी 2 ने शादी नही की और आज पेट पालने के लिए चारो ने वही सबसे आसान वाला पेशा अपनाया हुआ है जिसको कहते है , वेश्या वृति

यह मेरे एक मित्र ने मुझे कहानी सुनाई है जो सच्ची है और उसके क्षेत्र की है।

आशिकी के चक्कर मे न कभी इन चारों ने कभी यह सोचा कि कभी ऐसे दिन भी आसकते है ना इनके मा बाप ने इसकी तैयारी की कि बेटी का बियाह ही सब कुछ नही होता, उसको स्किल डेवलपमेंट और पर्सनालिटी डेवलपमेंट भी करवानी चाहिए शिक्षा के द्वारा

पर उनका भी क्या कसूर, भारतीय मुस्लिम समाज मे आज भी ज़्यादा फीसदी पिता बस एक ही चीज़ सोचता है

कैसे न कैसे लड़की निपट जाए।

वो यह नही सोचता कि बेटी निपटाने के लिए नही बल्कि पढ़ा लिखा कर नस्ल तैयार करने के लिए होती है

मुस्लिम समाज हमेशा ऐसा ना था, वो जब तक उरूज पर था तो इसलिए था क्योकि महिलाओं में शिक्षा की दर उस वक़्त भी बराबर थी।

आज भारतीय स्त्री (सभी धर्मों को मिलाकर) को दी जाने वाली औसत शिक्षा 1.5 इयर्स है यानी नर्सरी में स्कूल गयी, kg हॉफ में बाहर। मात्र 4.5 फीसद से 6 फीसद महिलाएं इंट्रप्रेनुरशिप में है।

इसमे बदलाव की आवश्यकता है वो यह कि सबसे पहले बेटियों को शिक्षा दी जाए, उनको निर्भर बनाया जाए ऐसा निर्भर की शादी से पहले उनमे ऐसा पोटेंशियल हो कि 4 लोगो को रोजगार दे सके।

कल ही मैं अफ़ग़ानिस्तान की एक लड़की के बारे में पढ़ रहा था जिसने अपने घर मे बी कीपिंग करके महीने के 500 डॉलर कमाए थे जो अफ़ग़ानिस्तान की औसत आय प्रति व्यक्ति से ज़्यादा बता रहा था लेख वाला।

इसी तरह 1 स्कूल की बच्ची है साउथ अफ्रीका में, जिसने बैकयार्ड फार्मिंग करके पिता को सपोर्ट किया। कल cwg में गोल्ड लाने वाले मनु नाम की लड़की ने भी वो काम कर दिया जो लाखो लड़के न कर सके

भाइयो गलत ट्रेंड पर है हम, लड़की निपटाओ is not the first solution but educate them, skilled them, raising the sentiments of entrepreneur ship in them and confident them is the solution

नही तो वो बैठे रहेगी कि दहेज नही है, शादी नही हो रही, बाप समझेगा यह बोझ है, भाई कहेगा बेटियों को पेट मे काट डालूंगा।

हलाल बिज़नेस किसी एक जेंडर की बपौती नही।

ट्रेंड बदलिए, बेटियों को ऐसा बनाइये कि अपने मेहर को वो खुद अपने ससुराल वालों के सामने रख सके।

अफसोस के साथ यहां साला उल्टा ही काम हो रहा है, पैसा देकर लड़की भेजी जा रही है।

बहुत दुख हुआ यह सुनकर, कल को मैं मर गया, आप मर गए आपकी और मेरी बेटी के साथ भी यही हो सकता है।

अफसोस