आतंकवादी गुट दाइश का उदय से लेकर पतन तक मीडिया द्वारा परिचित कराने की भूमि

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दाइश का उदय से लेकर पतन तक मीडिया द्वारा प्रचार- 1

वास्तविकता यह है कि सोशल मीडिया और साइबर स्पेस ने आतंकवादी गुट दाइश को दूसरों को परिचित कराने की भूमि प्रशस्त की।

इस विषय की गहन समीक्षा की आवश्यकता है कि यह बात कैसे व्यवहारिक हुई। हम कुछ कार्यक्रमों में किसी सीमा तक इस विषय पर चर्चा करेंगे। सबसे पहले हम इस बात की समीक्षा करेंगे कि आतंकवादी गुट दाइश ने किस प्रकार संचार माध्यमों एवं सोशल साइटों का प्रयोग किया परंतु उससे पहले संक्षिप्त रूप से इस बात पर दृष्टि डालेंगे कि यह आतंकवादी गुट अस्तित्व में कैसे आया? इसी लक्ष्य से कार्यक्रम के आरंभ में हम संक्षेप में इस बात की ओर संकेत करेंगे कि यह आतंकवादी गुट बना कैसे?

वर्ष 1999 में अबू मुसअब ज़रक़ावी ने “जमाअते तौहीद और जेहाद” नामक गुट की स्थापना की और दाइश का संबंध इसी गुट से मिलता है और वर्ष 2004 में वह आतंकवादी संगठन अलकायदा से मिल गया। यह गुट इराकी सरकार और इराक में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ़ लड़ता था और वर्ष 2006 में उसने इस्लाम की ओर रुझान रखने वाले कई दूसरे गुटों से गठबंधन कर लिया और “मजलिसे शूराये मुजाहेदीन” नामक परिषद का गठन किया। इस परिषद के गठन को इराक के सबसे बड़े अंबार प्रांत में एक महत्वपूर्ण कार्य समझा जाता था। उस वर्ष 13 अक्तूबर को मजलिसे शूराये मुजाहेदीन ने कुछ दूसरे अतिवादी गुटों से मिलकर “हुकूमते इस्लामी इराक” का गठन किया। अबू अय्यूब अलमिस्री और अबू उमर बगदादी “हुकूमते इस्लामी इराक” के दो अस्ली नेता थे और ये दोनों 18 अप्रैल वर्ष 2010 में अमेरिकी सैनिकों की कार्यवाही में मारे गये और उनकी जगह अबू बकर बग़दादी ने संभाली।

जब अबू बकर बग़दादी तथाकथित हुकूमते इस्लामी इराक का मुखिया बना तो आतंकवादी कार्यवाहियां और हमले और विस्तृत हो गये और सीरिया संकट के आरंभ होने के बाद इस गुट के तत्व सीरिया में भी सक्रिय हो गये।

वर्ष 2011 में सीरिया संकट के आरंभ होने के साथ नुस्रा फ्रंट ने भी दाइश की एक शाखा के रूप में अपने अस्तित्व की घोषणा की और वर्ष 2013 में अबू बकर अलबग़दादी ने एक आडियो संदेश जारी करके अपने और नुस्रा फ्रंट गुट के एक में विलय होने की घोषणा की। इस प्रकार “हुकूमते इस्लामी इराक व शाम” या वही दाइश आतंकवादी गुट अस्तित्व में आया।

आतंकवादी गुट दाइश के तत्व आरंभ में इराक के कुछ प्रांतों विशेषकर अलअंबार में मौजूद थे और वहीं से पूरे इराक में आतंकवादी हमलों व कार्यवाहियों का दिशा- निर्देशन करते थे किन्तु जून वर्ष 2014 में एक अभूतपूर्व कार्यवाही में उसने इराक के नैनवां प्रांत के केन्द्रीय नगर मूसिल पर हमला कर दिया और कुछ ही घंटों में इस नगर पर कब्ज़ा कर लिया। इराक में अधिक क्षेत्रों पर कब्ज़े के साथ दाइश के तत्वों ने सीरिया के रक्का, हलब, रिफे दमिश्क, दैरूज़्ज़ूर, हुम्स, हमा, एदलिब आदि प्रांतों में फैल गये और इन प्रांतों के कुछ क्षेत्रों का नियंत्रण पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया।

कुछ समय के बाद सीरिया में नुस्रा फ्रंट और दाइश के तत्वों के मध्य लड़ाई और मतभेद आरंभ होने के साथ अलकायदा के मुखिया अयमन अज़्ज़वाहिरी ने अपने गुट और नुस्रा फ्रंट के एक में विलय होने पर आधारित अबू बकर अलबग़दादी के निर्णय को निरस्त कर दिया परंतु दाइश के सरगना को यह बात पसंद नहीं आई इस प्रकार से कि अबू बकर अलबगदादी ने एक आडियो संदेश में घोषणा की कि वह अयमन अज़्वाहिरी के फैसले के खिलाफ है। इस विरोध के बावजूद दोनों गुट एक दूसरे से अलग हो गये और दोनों के मध्य भीषण झड़पें हुईं और दोनों ओर के काफी आतंकवादी मारे गये। मारे गये आतंकवादियों की सही संख्या की घोषणा नहीं की गयी परंतु इस भारी संख्या में वे लोग शामिल हैं जो उन क्षेत्रों में मारे गये जिन पर इन गुटों का कब्ज़ा था। विस्तृत पैमाने पर हत्या के लिए अबू बकर अलबग़दादी ने जिन शैलियों का प्रयोग किया उनमें से एक यूरोप और अमेरिका से आकर दाइश में शामिल हुए तत्वों का प्रयोग है। अबू बकर अलबग़दादी जंग की ट्रेनिंग की भूमि प्रशस्त करके सीरिया और इराक में दाइश के तत्वों का प्रयोग करता था। अबू बकर अलबग़दादी ने जो कार्यक्रम बना रखा था उसके अलावा कुछ अपने- अपने देश लौट गये और जो अनुभव उन्होंने हासिल किया था उसके दृष्टिगत आतंकवादी हमले व कार्यवाहियां अंजाम दी। दाइश के आतंकवादियों को इस प्रकार से प्रशिक्षण दिया जाता था कि उनके अंदर रहम, दया और मानवता नाम की कोई चीज़ नहीं रह जाती थी।

आतंकवादी गुट दाइश के दावे के अनुसार उसकी सरकार खिलाफत थी। उसमें सर्वोत्तम पद खलीफा, उसके सहायक, सशस्त्र सेना और खुफिया तंत्र के थे। आतंकवादी गुट दाइश ने कानून बनाने या उसे लागू करने के लिए कुछ विभाग बना रखा था और उन सबका संचालन व प्रबंधन विचित्र ढंग से होता था। आतंकवादी गुट दाइश के तत्व स्वयं को सुन्नी जेहादी गुट बताते थे और उनका कहना था कि वे बहुराष्ट्र पर आधारित इस्लामी सरकार का गठन करना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवादी गुट दाइश के बजट के एक भाग की आपूर्ति तस्करी, गुंडा टैक्स और दूसरे अवैध कार्यों से होती थी। कुछ अनुमानों के अनुसार मूसिल नगर पर कब्ज़ा करने से पहले तक दाइश की हर महीने की आय 80 लाख डालर से अधिक थी पर जब दाइश ने इराक के मूसिल नगर पर कब्ज़ा कर लिया तो वहां के बैंकों में मौजूद कम से कम 43 करोड़ डालर को भी हड़प लिया। इसी प्रकार दाइश ने जिन क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर रखा था वहां निकलने वाले तेल से हर महीने चार करोड़ डालर की उसकी आमदनी होती थी। आतंकवादी गुट दाइश ने बंदियों और अपने दुश्मनों के लिए अदालत कायेम कर रखी थी और बड़ी ही निर्ममता से उनकी हत्या करता था। दाइश जिन लोगों की हत्या करता था उनमें अधिकांश आम नागरिक होते थे। वाशिंग्टन में जेहादी गुटों के अध्ययन केन्द्र के विशेषज्ञ एरेन ज़ेलिन aaron zellin का मानना है कि यह गुट संदेशों को पहुंचाने के लिए सोशल साइटों और ट्वीटर जैसे आधुनिकतम तकनीकी संसाधनों का प्रयोग करता था। यही चीज़ इस बात का कारण बनी कि पश्चिम से दो हज़ार तत्व इस गुट में शामिल हो गये। एरेन ज़ेलिन aaron zellin के कथनानुसार दाइश सोशल साइटों में अपने झूठे पक्षधरों को बनाने में उस्ताद था।

वर्तमान समय में तकनीक से लाभ उठाने के दृष्टिगत आतंकवादी गुट दाइश ने “अलएतेसाम” नामक सूचना केन्द्र की स्थापना की। इसके अलावा 10 टीवी चैनल और तीन रेडियो की स्थापना की। इसी प्रकार आतंकवादी गुट दाइश ने इंटरनेट पर अरबी और अंग्रेज़ी भाषा में “दाबिक” जैसी कई पत्रिकाओं को प्रकाशित किया। ज्ञात रहे कि दाबिक सीरिया के एक शहर का नाम है। प्रसिद्ध पुस्तक “सहीह मुस्लिम” में दाबिक़ एक शहर का नाम है जिसमें अंतिम ज़माने का एक युद्ध होगा।

दाइश लोगों को लुभाने व आकर्षित करने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करता था और अपने विचारों के प्रचार- प्रसार के लिए पत्रिकाओं एवं साइटों का इस्तेमाल करता था। इंटरनेट और सोशल साइटों पर दाइश अपने आपको एसा गुट बताता था जो अन्याय, और वंचितता के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। हालों और विभिन्न स्थानों पर दाइश जो वार्तायें करता था उसने बहुत से यूरोपीय युवाओं को इस गुट में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बहुत से अवसरों पर इन हालों में जाने या दाइश की सदस्यता ग्रहण करने के लिए एसी प्रक्रिया को तय करना पड़ता था जिससे इस आतंकवादी गुट के प्रति वफादारी सिद्ध हो जाये। समान सोच रखने वाले लोग इन हालों में विचारों का आदान- प्रदान करते थे। इसी प्रकार इन हालों में होने वाली वार्ताओं में भाग लेने वालों, इसके सदस्यों और उनके पक्षधरों के मध्य छोटी-2 पुस्तिकाएं और प्रशिक्षण की सीडियां बांटी जाती थीं।

इंटरनेट की दुनिया में बहुत सक्रिय होने के कारण इस आतंकवादी गुट ने अपने ताने- बाने को अच्छे से अच्छे नेटवर्क में बदलने का प्रयास किया। इंटरनेट और सोशल साइटों के कारण यूरोपीय यूज़र्स के लिए यह संभावना उपलब्ध हो गयी कि वे अपने विचारों और गतिविधियों को इस गुट के साथ शेयर्स कर सकते थे। दाइश भी संदेश, तस्वीर, ग्रैफिक, और आवाज़ आदि से सोशल साइटों के माध्यम से अपने विचारों को प्रसारित कर सका। इंटरनेट के माध्यम से दाइश ने जो प्रचार किया उसे काले प्रचार का नाम दिया जा सकता है। इन अर्थों में कि उसने गलत और झूठा प्रचार करके और वास्तविकताओं में हेरा -फेरी करके उसे यूरोपीय युवाओं के सामने पेश किया। थोड़ी सी सच्चाई का विशेष व संचार माध्यमों की जटिल तकनीक के साथ प्रयोग, विदेशी पत्रकारों को दुश्मन बताना और कभी- कभी उनकी गर्दन उड़ाना संचार माध्यमों के क्षेत्र में दाइश की कार्यवाही रही है। इसी बीच दाइश हालीवुड की भांति फिल्में दिखाता था और इन फिल्मों ने यूरोपीय युवाओं को अपनी ओर खींचने में दाइश के हथकंडे की भूमिका निभाई। इन फिल्मों में दाइश के तत्वों के जीवन को साधारण दिखाया जाता था परंतु जब उसके सदस्य उन लोगों से प्रतिशोध लेते थे जिन्हें वे अपना दुश्मन समझते थे तो उस वक्त की स्थिति बिल्कुल भिन्न होती थी। दाइश जो फिल्में प्रसारित करता था उसके अलग- अलग लोगों के लिए अलग 2 संदेश होते थे। जैसे वतन छोड़कर पलायन करने का संदेश और इसी प्रकार उस शांतिपूर्ण ज़मीन में चले जाने का संदेश जहां दाइश के दावे के अनुसार इस्लामी खिलाफत थी। दाइश जो फिल्में प्रसारित करता था उनमें इस प्रकार के विषयों को देखा जा सकता था। इसी प्रकार उसकी कुछ फिल्में हिंसा और भय से भरी होती थीं। उनमें लोगों की गर्दन मारते दिखाया जाता था और देखने वाला दाइश की विनाशकारी शक्ति से प्रभावित हो जाता था। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दाइश के प्रचार के जो संदेश होते थे उससे लगता था कि जैसे यह आतंकवादी गुट अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर रहा है और स्वयं का परिचय इस्लामी खिलाफत के प्रतीक के रूप में करता था और उसने इस चीज़ के ज़रिये विभिन्न देशों में हिंसा की ओर रुझान रखने वाले युवाओं को अपनी ओर खींचने की प्रक्रिया को गति प्रदान कर दी।

दाइश ने अपने प्रचार में अलकायेदा की शैली का अनुसरण किया। इस अर्थ में कि हिंसा और आदर्श नगर का चित्रण एक साथ इस प्रकार किया कि दोनों गुटों को अपनी ओर खींच सके। यह दो गुट इस प्रकार थे। एक अतिवादी था और दूसरे जो हिंसा प्रेमी ज़रूरतों को पूरा करने की चेष्टा में था। आतंकवादी गुट दाइश के संदेश इस प्रकार थे जिससे यूरोपीय युवा और महिलाएं उसकी ओर आकर्षित हो जाती थीं। आतंकवादी गुट दाइश ने इंटरनेट और सोशल साइटों पर जो प्रचार किया था उससे प्रभावित होकर जिन लोगों ने अपने परिवार और देश को छोड़कर दाइश में शामिल हो गये तो इन्हीं लोगों ने कुछ वर्षों ही इस आतंकवादी गुट के सैनिक के रूप में निर्दोष लोगों की हत्या की और विभिन्न प्रकार के भयावह अपराध अंजाम दिये।

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दाइश का उदय से लेकर पतन तक मीडिया द्वारा प्रचार- 2

नेटवर्क की दुनिया में विस्तार व विकास के साथ आतंकवादी गुट भी आधुनिक हो गये हैं इस प्रकार से कि आतंकवादी गुट दाइश नेट की संभावनाओं से लाभ उठाकर अपने दिग्भ्रमित विचारों के प्रचार- प्रसार का प्रयास करता था।

नेट की दुनिया में विस्तार से आतंकवादी गुट दाइश इस कार्य में सक्षम हो गया कि ट्वीटर, फेस बुक और यू-ट्यूब जैसे संसाधनों से लाभ उठाकर अपने भ्रष्ट विचारों को दुनिया में फैला सका।

ट्वीटर दाइश का एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम था। यह आतंकवादी गुट आरंभ में अंग्रेजी भाषा में ट्वीट करता था और उसके बाद वह अरबी भाषा में भी ट्वीट करने लगा। दाइश कुछ समय तक एक यूज़र्स के अकाउंट पर ख़बरें ट्वीट करता था और उसके बाद जब वह अकाउंट बंद हो जाता था तो दाइश दूसरे यूज़र्स के अकाउंट से ट्वीट करने लगता था। इस अर्थ में कि आतंकवादी गुट दाइश अधिकतर एक जैसे कई नामों से ट्वीट करता था और जब एक अकाउंट बंद हो जाता था तो जल्दी से दूसरे यूज़र्स का अकाउंट इस्तेमाल करने लगता था।

आतंकवादी गुट दाइश के नियंत्रण में जो क्षेत्र थे वह वहां रहने वाले लोगों की ज़िन्दगी को अच्छी दिखाने का प्रयास करता था ताकि यूरोपीय युवाओं को इस आतंकवादी गुट में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर सके। इस संबंध में जान कैन्टली की उस वीडियो की ओर संकेत किया जा सकता है जिसमें दाइश लोगों की सामान्य ज़िन्दगी को दिखाने की चेष्टा करता है। दाइश ने एक मिनट का वीडियो क्लिप जारी किया और उस क्लिप में दाइश के एक लड़ाके को बच्चों में आइसक्रिम व चाकलेट बांटते या अस्पताल में घायलों व बूढ़े लोगों का हाल चाल पूछते दिखाया गया है।

नेट के प्रयोग ने दाइश को यह संभावना प्रदान कर दी कि वह अपने यूरोपीय व ग़ैर यूरोपीय पक्षधरों के लिए साइट बनाकर अपनी नीति से उन्हें अवगत कराये और नेट के माध्यम से संपर्क को बेहतर बनाये और जानकारियों को शेयर करे।

आतंकवादी गुट दाइश की ओर से जो वीडियो फिल्म या वीडियो क्लिप्स जारी होती थीं उनमें संदेश होता था जबकि दूसरे आतंकवादी गुटों की ओर से जारी होने वाली फिल्मों में एसा नहीं होता था। इसी प्रकार दाइश की ओर से जारी होने वाली वीडियो क्लिप्स में विशेष तकनीक का प्रयोग किया जाता था जैसे ऊंचाई से फोटो से लेना और आफ्टर इफेक्ट जैसे साफ्टवेयर का प्रयोग और दाइश का यह कार्य इस बात का सूचक था कि वह प्रचार करने में गम्भीर है और इसके लिए उसने पूंजी निवेश कर रखा है। उदाहरण के तौर पर “यद्यपि काफिर पसंद न करें” शीर्षक के अंतर्गत उसने एक वीडियो फिल्म बनाई और इस फिल्म में दाइश ने अपनी हिंसात्मक प्रवित्ती को उन लोगों को दिखाया है जो सीरिया में उसकी क़ैद में थे। इसके अलावा दाइश पोस्टर और छोटी छोटी क्लिप्स प्रकाशित करता था और इनमें यह दिखाया जाता था कि वह किस प्रकार लोगों की हत्या करता था और इन क्लिप्स के नीचे अंग्रेज़ी में उसका अनुवाद भी लिखा होता था जो इस बात का सूचक था कि दाइश दूसरे देशों के जवानों को अपने में शामिल करने के लिए गम्भीर रूप से प्रयासरत है।

इसी प्रकार आतंकवादी गुट दाइश ने यूरोपीय महिलाओं व लड़कियों को अपने गुट में शामिल करने के लिए विभिन्न सोशल साइटों में “ज़ूरा फाउंडेशन” नाम का पेज बना दिया। इस पेज पर दाइश के आतंकवादियों के समर्थन का विषय पेश करके इस गुट में शामिल होने के लिए यूरोप की जवान लड़कियों को प्रोत्साहित किया जाता था। यूरोपीय लड़कियों को प्रोत्साहित करने के लिए दाइश का एक तरीका यह था कि वह एसी तस्वीरें प्रकाशित करता था जिनमें यह दिखाया जाता था कि दाइश के परिजन बहुत खुश हैं और दाइश अपने गुट में शामिल लड़कियों की यादों व बातों को नेट पर शेयर करता था।

इसके अलावा लड़कियों व महिलाओं को दाइश में शामिल करने के लिए यह गुट जेहादुन्निकाह के हथकंडे का प्रयोग करता था। इस कार्य के लिए इस गुट के एक सलफी मुफ्ती ने जेहादुन्निकाह का फत्वा दे रखा था।

इस आतंकवादी गुट ने “अश्शामेख़ा” नामक महिलाओं से विशेष एक पत्रिका प्रकाशित की और टम्बलर नामक सोशल साइट में भी काफी पैठ बना ली। ज्ञात रहे कि यह साइट महिलाओं के मध्य काफी लोकप्रिय है और उसमें बहुत अभद्र चीज़ें व तस्वीरें दिखाई जाती हैं। लड़कियों को लुभाने के लिए दाइश ने जिन शैलियों को अपनाया उनमें से एक यह थी। इसी प्रकार आतंकवादी गुट दाइश ने “अलखन्सा” सैनिक ब्रिगेड बनाई और सोशल साइटों पर तस्वीरें और फिल्में भेजकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि दाइश की खिलाफत में महिलाएं हथियार लेकर चल और अपनी रक्षा कर सकती हैं।

आतंकवादी गुट दाइश ने सीरिया और इराक के विभिन्न क्षेत्रों में दिल दहला देने वाले अपने अपराधों की फिल्म बनाकर सैनिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी शक्ति दर्शाने का प्रयास किया और अतिवादी लोगों को पलायन करके उन क्षेत्रों में आकर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जहां उसकी तथाकथित खिलाफत थी। दाइश ने जो हृदय विदारक अपराध अंजाम दिये उनमें कुछ इस प्रकार हैं। जैसे लोगों को ऊंचाई से फेंक देना, पिजड़ों में बंद कर देना, टुकड़े-टुंकड़े कर देने के लिए जंगली जानवरों के सामने छोड़ देना, जिन्दा जला देना आदि। जिन्दा जला देने की एक हृदय विदारक घटना उस समय पेश आई जब दाइश ने जार्डन के एक विमान चालक को ज़िन्दा जला दिया। आतंकवादी गुट दाइश ने मौत के घाट उतार देने, बलात्कार और दास बना लेने की नई- नई शैलियों पर अमल करने के साथ अतिवादी जवानों को अपने गुट में शामिल करने का प्रयास किया और चूंकि उसे इस बात की आकांक्षा थी कि लोग उस पर ध्यान दें इसलिए वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा नई नई शैलियों की चेष्टा में रहता था। विश्व मिडिया ने भी दाइश के इन कृत्यों को कवरेज दिया और चाहते व न चाहते हुए भी उसने दाइश की सेवा की। इस प्रकार दाइश ने जो तबाही मचाई और तांडव किया उसे कवरेज देकर विश्व मिडिया ने ठीक उसी चीज़ को व्यवहारिक बनाया जिसे वह चाहता था। इसी प्रकार आतंकवादी गुट दाइश अपनी सैनिक शक्ति के बारे में फिल्मों के प्रकाशन के साथ यह दिखाता था कि इराक के मूसिल और सीरिया के रक्का शहर के लोग बहुत आराम से हैं और वहां से निर्धनता समाप्त हो गयी है ताकि इस प्रकार वह गुटों और बेकार युवाओं को अपने अधिकृत क्षेत्रों की ओर पलायन की भूमि प्रशस्त कर सके।

रोचक बात यह है कि आतंकवादी गुट दाइश ने अपने भ्रष्ट विचारों के प्रचार- प्रसार के लिए एसी स्थिति में मिडिया से लाभ उठाया और अपने जघन्य अपराधों की वीडियो फिल्म व क्लिप्स प्रकाशित की जब उसका मानना था कि तकनीक का प्रयोग सीमित होना चाहिये और दाइश के धर्मगुरूओं के फत्वे के अनुसार फिल्म देखना यहां तक सिनेमाघर जाना भी हराम था।

दाइश ने मिडिया से विभिन्न प्रकार से लाभ उठाकर जेहादी मिडिया आरंभ कर दिया था। यह जेहादी मिडिया उस समय आरंभ हुआ जब दाइश ने “यूजिन आर्मस्ट्रांग” नाम के अमेरिकी बंधक का सिर वर्ष 2014 में कलम कर दिया और उसकी क्लिप दाइश ने यूट्यूब पर डाल दी। उस समय इस क्लिप में लाइटिंग आदि का जो काम किया गया था वह प्राथमिक था परंतु दाइश ने अपने इस कार्य से प्रचार का मार्ग व लक्ष्य स्पष्ट कर दिया। आरंभ में दाइश जो फिल्में व क्लिप्स बनाता था वे फिल्म बनाने की दृष्टि से कमज़ोर थीं परंतु “व लौ करेहल मुश्रेकून” नाम की जो फिल्म दाइश ने बनाई वह गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम थी। इस फिल्म में 13 सैनिकों को मौत के घाट उतारते हुए दिखाया गया है।

इसके बाद आतंकवादी गुट दाइश ने “शोलाहाये जंग” नाम की एक डाक्यूमेन्ट्री फिल्म प्रकाशित की। उस फिल्म के एक भाग में इराकी और सीरियाई सैनकों के साथ दाइश की लड़ाई को दिखाया गया है। इस फिल्म ने विश्व मिडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। क्योंकि इसमें जो तस्वीरें ली गयी थीं उनमें बहुत उच्च तकनीक का प्रयोग किया गया था और फिल्म की जो विषय वस्तु थी वह अंग्रेजी भाषा में थी और इस फिल्म में उन राष्ट्रों व सरकारों को संबोधित किया गया था जो दाइश के खिलाफ अमेरिका द्वारा बनाये गये तथाकथित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल थे। समय बीतने के साथ-2 आतंकवादी गुट दाइश ने युद्धों व लड़ाइयों में कैमरों का प्रयोग बढ़ा दिया और इस कार्य से उसने अपने संबोधकों तक अपने संदेश को पहुंचाने का प्रयास किया और दाइश द्वारा बनाई जाने वाली समस्त फिल्में सोशल साइटों में प्रकाशित होती थीं। आतंकवादी गुट दाइश के तत्व इस संबंध में इस प्रकार अमल करते थे कि उनकी हैवानियत, फिल्म की पहली विशेषता बन गयी और खासकर इस विशेषता को सिर कलम करने के अवसरों पर देखा जाता था।

इन फिल्मों में यह दिखाया जाता था कि दाइश के लड़ाके दुश्मन के गढ़ में घुस गये हैं। इसी प्रकार इन फिल्मों में फिल्म बनाने के पेशेवराना तरीकों का प्रयोग होता था। फिल्म बनाने का यह तरीका सीरिया में नुस्रा फ्रंट सहित दूसरे सशस्त्र गुटों के प्रोत्साहन का कारण बना और इन गुटों ने इस संबंध में दाइश का अनुसरण किया।

आतंकवादी गुट दाइश के विशेषज्ञों ने छोटी फिल्में बनाने के संबंध में तस्वीर आदि के संदर्भ में आकर्षक बिन्दुओं का ध्यान रखा और उच्च तकनीक का प्रयोग किया। दाइश के विशेषज्ञों ने बंधक बनाये गये अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोली के सिर कलम किये जाने के संबंध में जो फिल्म बनाई हैं उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। इसके अलावा दाइश ने दूसरी फिल्में भी बनाई हैं जैसे लेट्स गो। इस फिल्म में जोशीली तस्वीरों और उत्साहवर्धक संगीत का प्रयोग करके पश्चिमी जवानों को संबोधित किया गया है और उन्हें इराक और सीरिया में दाइश के साथ मिलकर लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

आतंकवादी गुट दाइश ने इसी प्रकार बहरों के लिए भी फिल्म बनाई है। इस फिल्म में दो अर्ध सैनिक, संकेत की भाषा का प्रयोग करके पश्चिमी युवाओं का आह्वान दाइश से मिल जाने के लिए करते हैं। इस फिल्म में दोनों अर्ध सैनिकों को एक दूसरे का भाई दिखाया गया है। इसी प्रकार इस फिल्म में एक को गूंगा और दूसरे को बहरा बताया गया है और दोनों इराक के मूसिल नगर में दाइश की ट्रैफिक पुलिस का काम संभाल लेते हैं।

एक ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि दाइश ने जो फिल्में बनाई हैं उन समस्त में नारंगी रंग का प्रयोग किया गया है। दाइश जब लोगों को गोली मारने या सिर कलम करने की तैयारी करता था तो उन्हें नारंगी रंग का वस्त्र पहनाता था। सवाल यह है कि दाइश ने इस रंग का चयन क्यों किया? इसका कारण क्या था? दाइश इस रंग का चयन करके किसे क्या संदेश देना चाहता था?

अमेरिकी समाचार पत्र वाशिंग्टन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि दाइश अपने बंधको को जो नारंगी रंग का वस्त्र पहनाता है यह चीज़ उसने ग्वांतानामों के बंदियों से ली है और यह चीज़ उन बंदियों का संयुक्त प्रतीक है जिनकी प्रतीक्षा में मौत हो।

वास्तव में आतंकवादी गुट दाइश ने इस रंग का चयन करके पश्चिम को प्रतिक्रिया दिखाने का प्रयास किया है। इस अर्थ में कि अफ़गानिस्तान में अमेरिकी हमला आरंभ होने के बाद वर्ष 2002 में क्यूबा में ग्वांतानामों की जेल बनाई गयी और उसी समय से ग्वांतानामों के बंदियों को नारंगी रंग का वस्त्र पहनाया जाता था। इस आधार पर दाइश ने अमेरिका से अपनी घृणा दर्शाने के लक्ष्य से नारंगी रंग का प्रयोग किया जबकि यह विदित रूप था और वास्तविकता यह थी कि दाइश जो कुछ कर रहा था उसके पीछे अमेरिका था।