#आतंकवाद के फ़र्ज़ी आरोपों मैं 5 मुस्लिम नौजवान 16 सालों बाद हुऐ बरी!

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06 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भारत में आतंकवादी हमलों की बाढ़ सी आ गयी थी, एक के बाद एक अनेक हमले, धमाके हुए, जाँच एजेंसियों, पुलिस, खुफिया विभाग, मीडिया ने तै शुदा नीति ‘कार्यक्रम’ के तहत इन घटनाओं को मुस्लिम समाज से जोड़ा दिया और हर घटना में मुस्लिम समाज के कुछ नौजवानों को पकड़ कर फ़र्ज़ी मुकद्म्मे लगा लगा कर जेलों में डाला जाता रहा|

उस समय ‘एक आँख’ से काम हो रहा था, वह आँख सिर्फ मुसलमानों की तलाश में रहती थी, लेकिन जब भगवा आतंकवादियों का खुलासा हुआ तो उसे दबाने के अनेक प्रयास भी हुए और अंत में षड़यंत्र कारी अपने मंसूबों में कामयाब भी रहे, उन्होंने सरकार के ज़रिये सभी भगवा आतंकवादियों को जेल/अदालत से बचा लिया|

फ़र्ज़ी केसों में फंसाये गए मुसलमानों को अपनी जिंदिगी के कई कई साल जेलों में बिताने पड़े और अदालत से मामलों का निपटारा होने पर रिहाई मिली|

जबलपुर की विशेष अदालत ने 5 मुस्लिम नौजवानों को 16 सालों बाद सबूत के अभाव की बुनियाद पर मुकदमे से बाइज्जत बरी किए जाने आदेश जारी किये हैं।

बतातें चलें कि प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सेमी) से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार 5 मुस्लिम नौजवान को 16 साल से जेल की सलाखों के पीछे थे इन आरोपियों पर पुलिस ने बेहद गंभीर आरोप आयद करते हुए उनके कब्जे से आपत्तिजनक सामग्री व इस्लामी लिटरेचर जब्त करने का भी दावा किया था।

साथ ही उनकी गतिविधियों पर भी शक का इज़हार किया था लेकिन अदालत ने सबूत और गवाह की गैर मौजूदगी बिना पर उन मुस्लिम नौजवानों को आतंकवाद के आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया।

उन आरोपियों को जमीअत उलेमाए हिन्द की कानूनी सहायता समिती ने कानूनी मदद दी थी। जमीअत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने उन मुस्लिम नौजवानों की रिहाई पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि आखिरकार मजलूमों को इंसाफ मिल ही गया उन्होंने कहा कि इस फैसले से भी अदालत के प्रति मेरे विश्वास में इजाफा हुआ है।

और इस बात को बल मिली है कि सरकारें बेगुनाहों का भले ही इंसाफ न करें अदालतों से उन्हें इंसाफ मिल कर रहता है।

इसके साथ ही मौलाना मदनी ने इस बात पर सख्त अफ़सोस का इज़हार किया कि इस इंसाफ की संघर्ष में पूरे सोलह साल लग गए जबकि इस अवधि में एक नसल जवान हो जाती है।

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी अवधि किसी भी शख्स की जिंदगी तबाह कर देने के लिए काफी होती है। इसी लिए मैं इसे एक अधूरा इंसाफ कहता हूँ।

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@indians_muslim
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