आयतें और निशानियां : क्योंकि तुम सिर्फ़ नसीहत करने वाले हो : पार्ट 6

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सृष्टि की आश्चर्य चकित करने वाली चीज़ों में से एक धरती है।

धरती मनुष्य का शरणस्थल टैजी और उसके आराम करने का स्थान है। सूरे ज़ारियात की 20वीं आयत में कहा गया है कि विश्वास करने वालों के लिए धरती पर निशानियां मौजूद हैं। इस आयत में सोच-विचार करने से पता चलता है कि ज़मीन पर ईश्वर की इतनी अधिक निशानिया हैं जिन्हें कोई भी मनुष्य पूरी तरह से समझ सकने में सक्षम नहीं है।

सूरे बक़रा की आयत संख्या 22 में ईश्वर कह रहा है कि हे लोगो, अपने ईश्वर की उपासना करो, उस ईश्वर की जिसने तुमको और तुमसे पहले वालों को पैदा किया ताकि तुम सदाचारीबन सको। ईश्वर वहीं है जिसने धरती को तुम्हारे लिए बिस्तर बनाया है। पालनहार ने इन आयतों में धरती को एक विभूति के रूप में पेश किया है ताकि वे उसको पूरी पहचान के साथ समझें।

इमाम ज़ैनुल आबेदीन इस आयत की व्याख्या में कहते हैं कि ईश्वर ने धरती को तुम्हारी प्रवृत्ति और शारीरिक क्षमताओं के हिसाब से बनाया है। उसने धरती को न तो इतना गर्म बनाया कि तुम झुलस कर रह जाओ और न ही इतना ठंडा बनाया कि तुम जमकर अकड़ जाओ। न तो उसमें ऐसी तेज महक रखी जिससे तुमको कठिनाई हो। वास्तव में ईश्वर ने धरती को संतुलन के साथ बनाया है।

एक अन्य आयत में ईश्वर कहता है कि वह, वही है जिसने धरती को तुम्हारे नियंत्रण में दिया ताकि तुम उसपर चलो और ईश्वर की दी हुई आजीविका से लाभ उठाओ। आख़िर में सबको उसी के पास जाना है। धरती की एक विशेषता यह है कि इसको मानव जाति के लिए सवारी के रूप में पेश किया गया है। यह ऐसी सवारी है जो सदैव गतिशील रहती है किंतु उसकी गतिशीलता का आभास धरती पर रहने वालों को नहीं हो पाता। धरती के ऊपर खड़े होकर तो ऐसा नहीं लगता कि वह चक्कर लगा रही है। इस बारे में हज़रत अली कहते हैं कि ईश्वर ने धरती की रचना की और उसे ऐसी स्थिति में रोक रखा कि वह गतिशील भी है। इसकी कोई धुरी नहीं है और वह चक्कर लगाते समय गिरती नहीं है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती 14 प्रकार से चक्कर लगाती है जिसके बारे में आम लोगों को कोई जानकारी नहीं है।