इन्टरनेट के ज़रिये लड़कियों से चैटिंग करना इस्लाम में कैसा है, जानिये

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‎Sikander Kaymkhani‎
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फेसबुक और व्हाट्सअप आपस में बातचीत करने और राबते के ज़राएअ में से हैं जिन्हें जायज़ व नाजायज़ दोनों कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

जायज़ कामों के लिये ज़रूरत के वक़्त अगर इसका इस्तेमाल किया जाए तो जायज़ होगा जबकि दूसरी कोइ शरई खराबी ना पाई जाए वरना फेसबुक और व्हाट्सअप का इस्तोमाल नाजाएज़ होगा

फेसबुक और व्हाट्सअप के जरिए आप ये सारे काम अन्जाम दे सकते हैं और कुछ सूरतों में सवाब के भी मुस्तहिक़ हो सकते हैं जब कि अल्लाह की रजा शामिल हो।

दीन व मज़हब की तालीमात को दूसरों तक पहुंचा सकते हैं, अपने दोस्तों की खबर खैरियत मालूम कर सकते हैं, अपनी बात दुसरों तक पहुँचा सकते हैं, दीनी ग्रूप बनाकर आपस में एक दुसरों तक इस्लाम का पैग़ाम और बुज़ुर्गों के फरमूदात को शेयर कर सकते हैं।

याद रहे कि फेसबुक और व्हाट्सअप में इस क़दर बिज़ी हो जाना कि दूसरे फराएज़ व वाजिबात छूट जाएँ या उन लोगों के हकूक़ की अदाएगी ना हो पाए जिनकी अदाएगी उसपर जरूरी है, इस क़दर फेसबुक और व्हाट्सअप का इस्तेमाल नाजाएज़ और गैर दुरुस्त है।

आज हमारे नौजवान लड़के हों या लड़कियाँ अपनी दीनी व दुनीयावी जरूरतों से कहिं ज्यादा फेसबुक और व्हाट्सअप का इस्तेमाल सिर्फ टाइम पास करने के लिऐ करते हैं, जिसे खेल कहा जाएगा
अल्लामा इब्ने ह़जर असक़लानी लिखते हैं।

मुतलक़न किसी भी काम में मशग़ूल हो जाना लहव व लइब है चाहे वो काम जाएज़ हो या नाजाएज़, जैसे अगर कोई शख्स नफ्ल नमाज़, जिक्र व अज़कार तिलावत-ए-क़ुरआन और उसके मआनी के अन्दर ग़ौर व फिक्र करने में इस क़दर बिज़ी हो जाए कि जानबूझ कर फर्ज़ नमाज़ का वक़्त गुज़र जाए तो वो खेल में शुमार होगा, जब जायज़ चीज़ों में बिज़ी रहने का ये हुक्म है तो फिर नाजायज़ चीज़ों में मशग़ूल रहने का क्या हुक्म होगा।
(फतहुल बारी,जिल्द 12,पेज 367)

आज हमारे नौजवान अक्सर मोबाइल, इंटरनेट और व्हाट्सअप में इस क़दर बिज़ी रहते हैं कि नमाज़ का वक़्त आता है और गुज़र जाता है, एहसास तक नहीं होता खुद फैसला करें कि क्या इस क़दर इन चीज़ों में मशग़ूल रहना जाएज़ हो सकता है?

इसके इलावा आज कल लड़कों लड़कियों से उल्टी सीधी बातें करते हैं, इस सिलसिले में फुकहा फरमाते हैं, यह नाजायज़ है।
उलमा-ए-किराम फरमाते हैं।

जो काम हरामकारी की तरफ ले जाए वो हराम है, तो अक्सर जब हम अनजान लड़कियों से बात चीत करते हैं तो यह अंदेशा रहता है कि हम गुनाह की तरफ जायेंगे, इस लिए अनजान लड़कियों से बात चीत नहीं करनी चाहिए।