#ईदगाह : ज़कात के मुस्तहिक़ लोगों को ढूँढे और ज़कात दें

Posted by

Humayou Hasan
===========
#ईदगाह 

मैंने ईदी मिलने की ख़ुशी में पूरी रात आँखों में काट दी

मैं सोचता रहा की मेरे पड़ोस के लड़के सौ-सौ, हजार-हजार रुपया ईदी पाएंगे उनके यहाँ तो पैसे की कमी नही है ।

लेकिन मुझे दस रुपया भी मिल जाए तो क्या कहना ,

एक रूपये की लाल बर्फ, एक रूपये की सीटी, दो रुपया का कचालू खरीदूंगा और एक रुपया अपनी छोटी बहन जैनब को दूंगा

और तब भी मेरे पास पांच रुपया बचेगा कितना मज़ा आएगा !

मै यही सोच रहा था कि अम्मी को देखा की वो अपने पुराने कपड़े को काट कर जैनब का सूट सिल रही है जिसे ईद में जैनब पहनेगी

और मेरा तो पिछली ईद वाला रखा है उसी को पहनूंगा !

रात गुजर गयी चारो तरफ उजाला फ़ैल गया ,

चिड़ियों की चह्चहाहट मानो ईद मुबारक कह रही हो,

अम्मी की आवाज़ आई चलो नहाओ -धोओ ईदगाह जाने की तैयारी करो हम सब तैयार हो गए ,

हम दोनों को अम्मी ने 5-5 रूपये ईदी दी,

मोहल्ले के लड़के भी तैयार होकर मुझ बुलाने आ गये थे !

हम सब ईदगाह की ओर चल पड़े,

मैंने देखा साथी अनीस के हाथ में खुबसूरत घडी थी और मेरे हाथ में जैनब की ऊँगली थी ,

उनके पैरों में महंगे जूते थे मेरे पैर में अम्मी की पुरानी चप्पल थी ,

उनकी जेब नोटों से फूली थी और हम दोनों की मुट्ठी में पाँच -पाँच रुपया बंद था !

ईद की नमाज़ पढ़ कर निकले तो लोगो ने दही -बड़े, कबाब -पराठा, समोसा -रसगुल्ला और हवाई जहाज़-बंदूक आदि खरीदा,

और मै सोचता रहा पांच रु० का क्या खरीदूं ?

अनीस के हाथ में जहाज़ देख कर ज़ैनब ने छू लिया तो अनीस ने डपटते हुए कहा “सौ रुपया का है खराब हो गया तो दे पाएगी जो हाथ लगा रही है “

यह सुनकर नन्ही जैनब काँप उठी और मेरी तरफ देखने लगी !

मैंने अनीस से कहा यार एक बार मेरी बहन को उड़ाने को दे दो,

वह झट से बोला “एक बार उड़ाने का पांच रुपया लगेगा बच्चू , क्या फ्री का समझा है ?

मै राजी हो गया और जैनब को जहाज़ उड़ाने का अवसर मिला उसने चाभी भरी और उछलते हुए जहाज़ को हवा में छोड़ दिया

जहाज़ हवा में घूमते हुए नीचे आ गया जैनब का चेहरा ख़ुशी से खिल गया और मेरी कुल ईदी अनीस की जेब में चली गयी !

बिना कुछ खाए-पिए पैसा ख़त्म हो चुका था, भूख तेज़ हो रही थी,

जल्दी -जल्दी घर की तरफ बढ़ रहा था तभी ……..एक जोर की ठोकर लगी मै दूर जा गिरा,

वो पुरानी चप्पल टूट गयी,

मुझे गंभीर चोट लगी लेकिन चाह कर भी न रो सका की जैनब भी रो देगी !

मै उठा चप्पल हाथ में लिया और आगे चल पड़ा !

रास्ते में मोची की दुकान मिली तो जैनब बोली कि भैय्या यहाँ चप्पल बनवा लो !

मेरे पास पैसा तो था नहीं अपनी बेबसी छुपाते हुए बोला “पहले घर चलो , चप्पल बाद में बनवा लेंगे “!

इतने में जैनब ने मेरे हाथ से चप्पल लेकर मोची से कहा “मेरे पास पांच रुपया है क्या चप्पल बना दोगे

चप्पल बन गयी और जैनब की मुट्ठी में चिपका हुआ पांच का सिक्का मोची के हाथो में जाते हुए देख कर मेरी नजर झुक गयी !

घर पहुंचे तो माँ इंतिजार में थी,

रास्ते भर की पूरी बात खोद-खोद कर पूछ डाली, जैनब ने अममी को सब बता दिया

कुछ देर बाद मैंने देखा कि अम्मी के आँख भर अ़यी थी और रोते हुए लब पर दुआ थी हमारे लिए !

उधर अनीस ने भी अपने मम्मी -पापा को एक चक्कर जहाज़ उड़ाने देने के बदले पाँच रूपये कमाने की बात बताई तो उसके घर वाले बहुत खुश हुए

वो अनीस को शाबाशी दे रहे थे कि “मेरा बेटा तो बड़ा होशियार निकला आगे चल कर बड़ा नाम करेगा !!

ना जाने कितने एेसे ग़रीब बच्चे जो अपकी जकात आैर सदक़ा का ईनताजार करते है.!

ज़कात के मुस्तहिक़ लोगों को ढूँढे और ज़कात दें ।
#Celebrate Eid with helping poor people HR