#ईश्वरीय वाणी पार्ट 37 : सूरए अल-नम्ल : : पवित्र क़ुरआन अज्ञानता और अंधकार से मुक्ति दिलाता है!

Posted by

अल-नम्ल सूरे की आयतें मक्के में विभिन्न अवसरों पर नाज़िल हुईं।

क़ुरान के अन्य सूरों के विपरीत इस सूरे में बिस्म… का ज़िक्र दो बार हुआ है। एक बार सूरे के शुरू में और दूसरी बार 30वीं आयत में हज़रत सुलेमान की ओर से सबा की रानी को लिखे गए पत्र के शुरू में।

18वीं आयत में ईश्वरीय दूत हज़रत सुलेमान और चूंटियों के बीच घटने वाली घटना का ज़िक्र है, इसी के दृष्टिगत इस सूरे का नाम नम्ल पड़ गया। अरबी भाषा में नम्ल का अर्थ होता है चूंटी। इस सूरे का दूसरा नाम सुलेमान है। इस सूरे में ईश्वरीय दूतों, मूसा, सुलेमान, सालेह और लूत द्वारा अपने समय के भ्रमित समुदायों से संघर्ष का उल्लेख है। सबा की रानी से हज़रत सुलेमान के मुक़ाबले का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया है। इस सूरे में हुदहुद और चूंटी की बातचीत और हज़रत सुलेमान की सेवा में जिनों की उपस्थिति का भी उल्लेख है।

सूरे की आरम्भिक आयतों में हज़रत सुलेमान की चर्चा की गई है। उसके बाद बनी इस्राईल के अन्य ईश्वरीय दूतों हज़रत दाऊद और सुलेमान का ज़िक्र है। अन्य ईश्वरीय दूतों की तुलना में यह ईश्वरीय दूत अनुकूल परिस्थितियों के कारण, विशाल राज्यों की स्थापना में सफल रहे और उन्होंने ईश्वरीय क़ानून को लागू किया। क़ुरान में उल्लेख है कि हमने दाऊद और सुलेमान को ज्ञान प्रदान किया, और उन दोनों ने कहा, प्रशंसा उस ईश्वर से विशेष है कि जिसने हमें अपने अनेक नेक बंदों के बीच वरीयता प्रदान की और सुलेमान, दाऊद के वारिस बने और उन्होंने कहा, हे लोगों हमें परिंदों की भाषा का ज्ञान प्रदान किया गया है और हमें सब कुछ प्रदान किया गया है, यही स्पष्ट श्रेष्ठता एवं वरीयता है।

दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों ईश्वरीय दूतों के बारे में क़ुरान ने ज्ञान प्रदान करने से बात आरम्भ की है, कि जो एक शक्तिशाली शासन की बुनियाद है।

यहां ज्ञान का अर्थ बहुत विस्तृत है। इससे तात्पर्य एकेश्वरवाद, धार्मिक क़ानून, न्याय और समस्त उन विद्याओं का ज्ञान है कि जो एक विशाल एवं शक्तिशाली शासन के संचालन के लिए ज़रूरी होता है। इसलिए कि न्याय पर आधारित एक अच्छे शासन की स्थापना विस्तृत ज्ञान से लाभ उठाए बिना संभव नहीं है।

क़ुरान की आयतों से यह समझा जा सकता है कि हज़रत सुलेमान के शासन की स्थापना कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि इसमें अनेक चमत्कारों की भूमिका थी। वे ऐसे ईश्वरीय दूत थे जिन्हें ईश्वर ने अपना दूत भी बनाया और विशाल शासन भी प्रदान किया।

सूरे नम्ल की आयतों में उल्लेख है कि, सुलेमान की सेना में जिन्न, मानव और पंक्षी थे। उनकी सेना की संख्या इतनी अधिक थी कि उसे व्यवस्थित करने के लिए वे आदेश देते थे कि पहली पंक्तियों को रोक कर रखा जाए और अंतिम पंक्तियों को चलने का आदेश दिया जाए ताकि सब एक साथ पहुंचे।

हज़रत सुलेमान जानवरों और परिंदों की भाषा समझते थे। हवा और अन्य प्राकृतिक तत्वों पर उनका अधिकार था। 16वीं आयत में हज़रत सुलेमान की दिलचस्प कहानी का उल्लेख किया गया है। हज़रत सुलेमान और उनके साथी एक यात्रा से वापसी के दौरान जब चूंटियों के एक इलाक़े में पहुंचे तो एक चूंटी ने अपनी साथियों से कहा, हे चूंटियों अपने घरों में चली जाओ ताकि सुलेमान और उनकी सेना तुम्हें कुचल न दे। इसलिए कि वे नहीं समझते हैं, चूंटी की यह बात सुनकर हज़रत सुलेमान मुस्कराने और हंसने लगे।

दूसरे स्थान पर उल्लेख है, एक दिन सुलेमान ने परिंदों की स्थिति के बारे में पूछा और हुदहुद को उपस्थित न देखकर पूछा, मैं हुदहुद को नहीं देख रहा हूं, हुदहुद क्यों अनुपस्थित है? निश्चित रूप से मैं उसे कड़ी सज़ा दूंगा या उसे ज़िब्ह कर दूंगा, या फिर वह इसके लिए कोई ठोस तर्क पेश करे। तुरंत हुदहुद ने उपस्थित होकर कहा, मैं एक ऐसी चीज़ के बारे में जानता हूं कि आपको उस बारे में ज्ञान नहीं है। मैं आपके लिए सबा राज्य से सटीक और सच्ची ख़बर लाया हूं। मैंने वहां एक महिला को देखा कि जो वहां राज करती है और उसके पास सब कुछ है और उसका सिंहासन बहुत विशाल है। मैंने देखा है कि वह महिला और उसकी प्रजा ईश्वर के बजाए सूर्य की पूजा करते हैं और शैतान ने उनके इस कार्य को उनके लिए अच्छा बनाकर पेश किया है, अतः उन्हें सीधे रास्ते से भटका दिया है और वे सुधरने वाले नहीं हैं।

सुलेमान को यह सुनकर आश्चर्य हुआ और उन्होंने कहा, मैं इस संबंध में जांच करूंगा ताकि पता चल जाए सही कह रहा है या झूठ बोलने वालों में से है। उसके बाद सुलेमान ने एक छोटा सा पत्र लिखा और हुदहुद को दिया और उससे कहा, मेरा यह पत्र ले जाओ और उनके लिए छोड़ आओ, और वहीं किसी कोने में रुककर देखना कि वे क्या जवाब देते हैं।

सबा की रानी बिल्क़ीस बहुत ही गौरव से महल में बैठी हुई थी, हुदहुद ने जाकर उसके लिए वह पत्र गिरा दिया। आश्चर्य से उसने उस पत्र को खोला और उसे पढ़ा। वह पहले भी सुलेमान का नाम और उनकी प्रसिद्धि के बारे में सुन चुकी थी, इसलिए गहरी चिंता में पड़ गई। वे एक समझदार महिला थी और राज्य के महत्वपूर्ण कार्यों में अपने सलाहकारों से सलाह लेती थी। इस संबंध में उनसे बुलाकर पूछा, हे सज्जनों, एक महत्वपूर्ण पत्र मेरे लिए भेजा गया है, सुलेमान का पत्र है जिसमें कहा गया है, शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से जो बहुत ही क्षमाशील और कृपालु है, मुझ पर वरीयता न जताना और मेरे सामने उपस्थित हो जाओ, इस प्रकार सत्य को स्वीकार करोगी। बिल्क़ीस ने कहा, हे सज्जनों, इस संबंध में सलाह दो, मैं कोई भी महत्वपूर्ण कार्य तुम्हारी सलाह के बिना अंजाम नहीं देती हूं। राज्य के महत्वपूर्ण लोगों ने कहा, हमारे पास युद्ध के लिए काफ़ी शक्ति है, लेकिन फ़ैसला आप ही को करना है, अपना दृष्टिकोण बयान कीजिए ताकि हमें पता चले कि क्या आदेश है?

रानी ने जब युद्ध के लिए उनका रूझान देखा तो उनका क्रोध कम करने के लिए कहा, राजा जब किसी इलाक़े में प्रवेश करते हैं तो उसे नष्ट कर देते हैं और वहां के सज्जनों का अपमान करते हैं। हमें कोई भी क़दम उठाने से पहले सुलेमान को परखना चाहिए। मैं उनके लिए मूल्यवान उपहार भेजती हूं ताकि पता चल सके कि मेरे दूत उनके बारे में क्या सूचना लाते हैं।

सबा की रानी के दूत मूल्यवान उपहार लेकर हज़रत सुलेमान के राज्य के केन्द्र शाम की ओर जिसे वर्तमान में सीरिया कहा जाता है, चल दिए। जब वे हज़रत सुलेमान की सेवा में उपस्थित हुए तो उन्होंने कहा, मुझे इन उपहारों द्वारा धोका देना चाहते हो? ईश्वर ने जो कुछ मुझे प्रदान किया है वह उससे बेहतर है जो तुम्हें प्रदान किया है। यह तुम लोग हो कि जो एक दूसरे को मूल्यवान उपहरा भेजकर ख़ुश होते हो, लेकिन यह मेरे निकट मूल्यहीन हैं। हज़रत सुलेमान ने उन्हें उनके उपहारों के साथ वापस लौटा दिया और कहा, हम शीघ्र ही एक ऐसी सेना के साथ वहां पहुंचेंगे जिसका वे मुक़ाबला करने की शक्ति नहीं रखते होंगे और उन्हें उनके राज्य से अपमानित करके बाहर निकालेंगे। रानी के दूत यह संदेश लेकर वापस लौटे और उन्होंने हज़रत सुलेमान के चमत्कारिक विशाल राज्य के बारे में रानी को बताया। आश्चर्यचकित करने वाला हज़रत सुलेमान का राज्य इस बात का प्रमाण था कि वे कोई सामान्य राजा नहीं हैं, बल्कि वास्तव में ईश्वर के दूत हैं और उनका शासन ईश्वरीय शासन है और वे उसका मुक़ाबला नहीं कर सकते। इसलिए रानी और उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने हज़रत सुलेमान की सेवा में उपस्थित होने का फ़ैसला किया।

जब हज़रत सुलेमान को यह सूचना मिली तो उन्होंने बिल्क़ीस के सिंहासन को अपने यहां लाने का फ़ैसला किया और इस प्रकार ईश्वरीय दूत के रूप में चमत्कार दिखाया। उन्होंने अपने दरबारियों से पूछा कि तुममें से कौन रानी का सिंहासन मेरे पास लाएगा? एक जिन्न ने कहा, मैं उस सिंहासन को आपके अपने स्थान से उठने से पहले उपस्थित कर दूंगा।

लेकिन एक व्यक्ति कि जिसके पास ईश्वरीय किताब का कुछ ज्ञान था उसने कहा, मैं उसे इससे पहले कि आप को पलक झपकें आपके सामने हाज़िर कर दूंगा। जैसे ही सुलेमान ने उस सिंहासन को अपने सामने देखा कहा, यह मेरे पालनहार की कृपा है, ताकि वह मुझे परख ले कि क्या मैं उसकी अनुकंपाओं का आभारी होता हूं या उनकी उपेक्षा करता हूं। और जिसने भी आभार व्यक्त किया उसने ख़ुद अपने लाभ के लिए आभार जताया, और जो कोई भी इनकार करे, मेरा ईश्वर किसी को मोहताज नहीं है और वह दयालु है।

हज़रत सुलेमान ने सबा की रानी की दूरदर्शिता को परखने के उद्देश्य और ईश्वर पर ईमान लाने के लिए भूमि प्रशस्त करने के लिए आदेश दिया कि उसके सिंहासन में कुछ बदलाव कर दिया जाए ताकि वह पहचाना न जा सके। जब सबा की रानी आई तो उससे कहा गया, क्या तुम्हारा सिंहासन ऐसा था? बिल्क़ीस ने आश्चर्य से कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि वही है।

सूरए नम्ल की 44वीं आयत में इस कहानी का दूसरा भाग पेश किया गया है। इस भाग में सबा की रानी हज़रत सुलेमान के विशेष महल में प्रवेश करती है। बिल्क़ीस को एक महल में ले जाया गया। जब उसने प्रवेश करना चाहा तो देखा कि वहां पानी की नहर है और पानी से गुज़रने के लिए अपने कपड़ों को पिंडलियों तक उठा लिया। सुलेमान ने उससे कहा, यह पानी नहीं है, बल्कि यह शीशों से बना हुआ फ़र्श है। जब सबा की रानी ने यह दृश्य देखा तो कहा, हे पालनहार मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया और मैं सुलेमान के साथ संसार के पालनहार के सामने नतमस्तक होती हूं।