उम्मीद, उस छोटी सी लौ को कभी मिटने नहीं दूंगी🌸🌸🌸प्रीत प्रतिमां 🌸🌸🌸

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Preet Pratima

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कभी कभी ये जिंदगी
अमावस की रात जैसे,
स्याह काली और,
अंधेरी लगने लगती है,
तुम आ जाते हो तो
यकायक,
चाँद निकल आता है,
चारों तरफ़,
इक रौशनी सी
बिखर जाती है
संवर जाती है हर शै
सूरत मेरी भी
निखर जाती है,
बस, जब तुम,
आ जाते हो,
लेकिन तुम तो कभी
आते ही नहीं,
इसलिए,
मैंने भी सोच लिया,
और अंधेरों से ही इश्क़
कर लिया,
इक आस का दीया जला कर
छोड़ दिया है
तुम आओ या ना आओ
मेरे अंदर का चिराग
बुझने नहीं दूंगी,
उम्मीद की
उस छोटी सी लौ को
कभी
मिटने नहीं दूंगी।

प्रीत प्रतिमां 🌸