एकमात्र इस्लाम मज़हब और कुरआन औरतों के अधिकारों की बात करने वाला है

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Sikander Kaymkhani
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★औरतों के अधिकारों की बात करने वाला★

इस्लाम एकमात्र मज़हब और कुरआन एकमात्र धर्मग्रन्थ है, जिसने ये सवालात उठाये…..
आज सारी दुनिया इस्लाम मज़हब को बदनाम करने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुई है…

उस इस्लाम के पीछे जिसने पूरी दुनिया को दिखाया की औरत आपकी विरासत या जागीर नहीं बल्कि अल्लाह ताआला का दुनिया को दिया गया बेशकीमती तोहफा है…

आज पूरी दुनिया उस कुरआन को औरतों की दुर्दशा का जिम्मेदार ठहराती है जिसने सबसे पहले सवाल उठाया की औरतो का संपत्ति में अधिकार होना चाहिए… इतिहास गवाह है की आज तक किसी भी मज़हब ने इस तरह औरतो के हुकूक (अधीकार) की बातें नहीं की.. जिस तरह से कुरआन ने उनके मामलो को दुनिया को दिखाया की … “इस संसार में औरतें भी सम्मान रखती हैं”….

आइये देखते उन लोगो के बारे में कुरआन क्या कहता है जो बेटी के पैदा होने पे शर्मिन्दा और बीवी से गुस्सा हो जाते हैं… “जैसे की बीवी ही बेटी होने की जिम्मेदार हो” हालाँकि ये नेअमत तो अल्लाह ही देता है … और वो जिसको चाहता है नवाजता है..
. -बेटी-
‘और जब इनमें से किसी को बेटी की पैदाइश का समाचार सुनाया जाता है तो उसका चेहरा स्याह पड़ जाता है और वह दु:खी हो उठता है। इस ‘बुरी’ खबर के कारण वह लोगों से अपना मुँह छिपाता फिरता है। (सोचता है) वह इसे अपमान सहने के लिए जिन्दा रखे या फिर जीवित दफ्न कर दे? कैसे बुरे फैसले हैं जो ये लोग करते हैं।’ (कुरआन, 16:58-59)

पैगम्बर मुहम्मद (सल्ललाहू अलैहि वा-सल्लम) के जन्म से पूर्व के वक़्त को जमाना ए जहिलयत कहा जाता है… और वो इसलिए की उस दौर में लोग इस बात को बेहद ही बुरा समझते थे की अगर उनके कोई बेटी होगी तो वो दामाद के सामने नज़र नहीं उठा पाएंगे.. इस वजह से वो लोग पुत्री का जन्म होने पर उसे क़त्ल कर देते थे… इसके अलावा भी दुनिया में बुराई का वो दौर चरम पर था… इसे लोग जो भ्रूण हत्या कराते हैं वो भी इस हदीस पर गौर करें..
इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया- बेटी होने पर जो कोई उसे जिंदा नहीं गाड़ेगा (यानी जीने का अधिकार देगा), उसे अपमानित नहीं करेगा और अपने बेटे को बेटी पर तरजीह नहीं देगा तो अल्लाह ऐसे शख्स को जन्नत में जगह देगा। (इब्ने हंबल)

,. -बीवी –
वो लोग जो शराब पी कर आये दिन अपनी बीवियों के साथ मार पीट करते रहते हैं… और ये सन्देश देते हैं की उनकी बीवी उनकी प्रोपर्टी है जिस तरह चाहे उसका इस्तेमाल करें….बड़ा अजीब लगता है जब कुरआन या हदीसों के रेफरेंस से ऐसी बाते बनाते हैं जो पूर्णतः मनघडंत होती हैं…

जानिये मुहम्मद (सल्ल) का बीवी के बारे में वास्तव में क्या नजरिया है…
पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया- तुम में से सर्वश्रेष्ठ इंसान वह है जो अपनी बीवी के लिए सबसे अच्छा है। (तिरमिजी, अहमद)

एक दूसरी जगह यूँ बताया गया…
पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया- तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए जो भी खर्च करोगे उस पर तुम्हें सवाब (पुण्य) मिलेगा, यहां तक कि उस पर भी जो तुम अपनी बीवी को खिलाते पिलाते हो। (बुखारी,मुस्लिम)।

एक और जगह आता है ….
पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने कहा- आदमी अगर अपनी बीवी को कुएं से पानी पिला देता है, तो उसे उस पर बदला और सवाब (पुण्य) दिया जाता है। (अहमद)

एक हदीस और…

मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया- महिलाओं के साथ भलाई करने की मेरी वसीयत का ध्यान रखो। (बुखारी, मुस्लिम)
,. -माँ-
क़ुरआन में अल्लाह ने माता-पिता के साथ बेहतर व्यवहार करने का आदेश दिया है,

‘तुम्हारे स्वामी ने तुम्हें आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की पूजा न करो और अपने माता-पिता के साथ बेहतरीन व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों बुढ़ापे की उम्र में तुम्हारे पास रहें तो उनसे ‘उफ् ‘ तक न कहो बल्कि उनसे करूणा के शब्द कहो। उनसे दया के साथ पेश आओ और कहो- ‘ऐ हमारे पालनहार! उन पर दया कर, जैसे उन्होंने दया के साथ बचपन में मेरी परवरिश की थी।’ (क़ुरआन, 17:23-24)

ईशदूत हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने कहा- ‘यदि तुम्हारे माता और पिता तुम्हें एक साथ पुकारें तो पहले मां की पुकार का जवाब दो।’ एक बार एक व्यक्ति ने हजरत मुहम्मद (सल्ल.) से पूछा ‘हे ईशदूत, मुझ पर सबसे ज्यादा अधिकार किस का है?’ उन्होंने जवाब दिया ‘तुम्हारी माँ का’, ‘फिर किस का?’ उत्तर मिला ‘तुम्हारी माँ का’, ‘फिर किस का?’ फिर उत्तर मिला ‘तुम्हारी माँ का’ तब उस व्यक्ति ने चौथी बार फिर पूछा ‘फिर किस का?’ उत्तर मिला ‘तुम्हारे पिता का।’

अब आप बताइए की वो कौन लोग हैं जो आपको बरगलाते हैं और कहते हैं.. कुरआन औरतो के बारे में यूँ कहता है हदीस यूँ कहती है…
आप ऐसे लोगो से बचिए और उनसे किसी भी हदीस या आयत का सन्दर्भ मांगिये … हम पूरे यकीन के साथ कहते हैं आपको ऐसी कोई हदीस नहीं मिलेगी जिसमे औरतों के अधिकारों के हननं की बातें की गयी हों…