एक दिन जब दूर होगे तुम….

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Sandhy A
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पानी की आवाज़ घेरे रहती हैं मुझे आजकल , जैसे किसी गहरे अँधेरे जंगल में रास्ता भटक गयी हूँ और कहीं दूर बह रहा है एक झरना …आवाज़ की ऒर बही चली जाती हूँ …मेरे कदम के साथ एक जोड़ी और भी क़दमों की आवाज़ सुनाई देती है मुझे …कुछ है जो टकराता है मेरे पैरों से कोई पत्थर , या शायद किसी बहुत पुराने पेड़ की जड़ का उभरा हिस्सा …..अरण्य का हरा अँधेरे में काला दिखता है …..जंगली घाँस की नोकें पैरों को जगह बताती चलती हैं…

चलना ..ढूंढना भी हो सकता है कभी…..

कहते हैं कुछ अरण्य गंधी माटी आपको रास्ता भी बताते चलती है ।

एक ख़ौफ़ है जो हाथों और पैरों में लिपट जाता है ,पानी की आवाज़ …चलना साधे रहती है ….कहीं झरने की आवाज़ मरीचिका न साबित हो …पानी की आवाज़ भी भी बचानी होगी ….अपनी प्यास भी बचा लेती हूँ …..नहीं …ढूंढना ही होगा आवाज़ की ऒर बढ़ लेती हूँ….

फिर …तुम्हारा नाम पानी की लय-गंध का दिशा सूचक भी तो है …..

कहते हैं तुम्हें खो दिया तो जीवन खो जाएगा…..

संध्या