एक वर्षीय आप्रवासी बच्चे को सज़ा, अमेरिकी अदालत का इंसानियत को शर्मसार करने वाला फ़ैसला

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अमेरिका के एरिज़ोना राज्य के फीनिक्स सिटी की अदालत ने एक वर्षीय आप्रवासी बच्चे पर, जो अपने माता पिता के साथ शरणार्थी के रूप में अमेरिका आया था, मुक़द्दमा चलाकर उसके ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है।

अमेरिकी मीडिया ने ख़बर दी है कि इस देश के एरिज़ोना राज्य के फिनिक्स सिटी की अदालत ने एक वर्षीय बच्चे पर मुक़द्दमा चलाकर उसे सज़ा देने और अमेरिका से बाहर वापस भेजने का फ़ैसला सुनाया है। इस एक वर्षीय बच्चे को जो अपने माता-पिता के बिना अदालत में हाज़िर हुआ था अब निर्णय के अनुसार वापस होन्डुरस भेजा जाएगा जबकि फिनिक्स सिटी की अदालत ने बच्चे के आप्रवासी माता-पिता को पहले से ही उनके देश होन्डुरस भेज दिया था। जिस समय इस मासूम बच्चे के ख़िलाफ़ अमेरिकी अदालत में कार्यवाही चल रही थी वह दुनिया से बेख़बर प्लास्टिक की गेंद से खेल रहा था और फिर उसी दौरान वह दूध पीने लगा और आख़िर में अन्य मासूम बच्चों की तरह वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा।

बच्चे के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाने वाले फिनिक्स सिटी की अदालत के जज जॉन रैचर्डसन ने कहा कि यह बच्चा मासूम है। उन्होंने कहा कि इस मासूम बच्चे के ख़िलाफ़ अदालती कार्यवाही और उसके साथ अमानवीय व्यवहार करने पर मुझे शर्म महसूस हो रही है क्योंकि यह बच्चा तो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बनाए गए आप्रवासियों के लिए नए क़ानून से बिल्कुल बेख़बर है।

इससे पहले अमेरिका में, सांसदों और अधिवक्ताओं ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि अदालतों में बच्चों की पेशी, एक डरावना काम है, जो इंसानियत को शर्मसार करने देने वाली प्रक्रिया है जिससे पूरी दुनिया में अमेरिका के लिए लोगों में नफ़रत बढ़ रही है। समाचारों में यह भी कहा गया है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आप्रवासियों और विशेष रूप से आप्रवासियों के बच्चों के लिए अमेरिकी अदालत में उनकी पैरवी करने के लिए कोई वकील मौजूद हो।

ज्ञात रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा आप्रवासियों के लिए बनाए गए नए क़ानून की स्वयं अमेरिका सहित पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। ट्रम्प प्रशासन के इस नए क़ानून के तहत अब तक सैकड़ों मासूम बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ गए हैं और इस समय बहुत से आप्रवासी बच्चे अमेरिका के ऐसे कैम्पों में रह रहे हैं जो बिल्कुल जेल की तरह है।