ऐसे फ़ेमिनिज्म से भगवान बचाए!

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सोनाली मिश्र
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दो तीन दिनों में जिस तरह से क्षितिज रॉय के साथ पढ़े लिखे लोग समर्थन में आए, उससे एक दो बातें स्पष्ट हुईं कि स्त्री चाहे कोई भी हो, उसे अपनी सत्यता के पक्ष में सबूत देने के बाद भी मानसिक रूप से यह झेलने के लिए तैयार होना चाहिए कि जिसने उसके साथ बदतमीजी की वह “युवा था!, कान्वेंट कल्चर वाला था! भाषा की समझ नहीं थी, और सबसे बढ़कर वह एक प्रतिभाशाली इंसान है, तो उसकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए लड़की को उसकी गालियों को सह लेना चाहिए.” दरअसल जो लोग फेमिनिस्ट होने का दम भरते हैं, हकीकत में जब ऐसी दलीले देते हुए बददिमागों के पक्ष में आते हैं, तो उनके फेमिनिज्म पर तरस आता है और हंसी भी! आखिर क्या फर्क रहा चौपालों पर बैठकर लड़की को जींस पहनने के लिए दोषी ठहराने वाली काकियों में और फेमिनिज्म पर ज्ञान बघारने वाली महान लेखिकाओं के यह कहने में कि ये सब बातें इस तरह से सामने नहीं लानी चाहिए! यदि बिना सबूत के कोई लड़की किसी पर आरोप लगाती है, तो उसका विरोध हो, मगर जब लड़की एकदम सबूत के साथ आरोप लगा रही है, तो लड़की को यह कहकर पीछे धकेल देना कहाँ का स्त्रीवाद है कि लड़का प्रतिभाशाली है और इस तरह का कोई कदम उसकी प्रतिभा को नष्ट कर देगा! भाड़ में जाए ऐसी प्रतिभा! और जो लोग दो तीन दिनों से उसके पक्ष में कुतर्क दे रहे हैं, वे अपने राजनीतिक आकाओं का इशारा मिलते ही न जाने किस किस के चरित्र का चीर हरण इसी फेसबुक पर करते हैं, जो आज अपने लाड़ले की हकीकत की गंदी बात का समर्थन कर रहे हैं. मुझे आज वाकई उन स्त्रियों पर तरस आ रहा है, जो बातें बड़ी बड़ी करती हैं, फेमिनिज्म को ब्रा और पीरियड के दागों तक पहुंचाती हैं, सच में ही पतनशील फेमिनिस्म! मगर जब कोई लड़की सबूत देती है, उनके प्रिय के खिलाफ, तो वे अपने प्रिय के साथ खड़ी हो जाती हैं. नहीं नहीं, ऐसा दोगलापन नहीं चलेगा, सोशल मीडिया पर लिंचिंग अगर किसी धार्मिक गुरु के लिए सही है, तो आपके लाड़ले के लिए भी सही है, और अगर आपके लाड़ले के लिए गलत है, तो आज तक आपने अपने राजनीतिक आकाओं के हाथों जिन जिन का चीर हरण सोशल मीडिया पर किया वह भी गलत है!

फेमिनिज्म राजनीतिक आकाओं के हाथों उठाए गए मुद्दों पर शोर मचाने, ब्रा और पेंटी और पीरियड से परे बहुत कुछ है, फेमिनिज्म है उन लड़कियों के साथ खड़े होना जो सबूत लेकर आई हैं, फेमिनिज्म हैं, उन लडकियों की हिम्मत बढ़ाना, जो बहुत हिम्मत लेकर सबूतों के साथ आपके सामने हैं. न कि उन्हें उसी तरह इमोशनली विक्टिमाईज करना, जिस तरह किसी बाबा या पीर की भक्तिनें करती हैं.
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