ओ पिया,,,आपने मन की सुना देते हो…. मेरे मन की भी सुनो कभी

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Vikram Partap Jp
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ओ पिया
आपने मन की सुना देते हो
मेरे मन की भी सुनो कभी
याद करो वो वक़्त सुनहरा
चाय की रेहड़ी पे आना मेरा
छुप जाना तेरा केतली पीछे
सपने पुराने फिर बुनो कभी
मेरे दिल की भी सुनो कभी
दिल्ली तुमको खूब है भाई
मेरी कभी क्यों याद न आई
इस सावन ने है आग लगाई
इस मौसम में तो सुनो कभी
दर पर मेरी नजर है प्यासी
आओगे कब अंतरिक्ष वासी
मुझको चन्द जुमले ही सुना
खुल्ला है दरवाज़ा जल्दी आ

विक्रम प्रताप 😁👇👆
Vikram Partap Jp