औरत चाहे तो अपने घर को जन्नत बना सकती है

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Khalid Aijaz
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गर बीवी हो ऐसी तो शौहर पागल पन की हद तक मुहब्बत क्यूँ ना करे ?

एक तजुरबे कार उमर याफ़ता बा वक़ार टैलेंटेड ख़ातुन का इंटरव्यु जिन्होंने अपने शौहर के साथ पचास साल का अरसा पुर सुकुन तरीक़े से हंसी खुशी गुज़ारा ।

ख़ातुन से पूछा गया कि इस पचास साला पुर सुकुन ज़िन्दगी का राज़ क्या है ?
क्या आप खाना बनाने मे बहुत माहिर थी ? या आपकी ख़ूबसूरती उस का सबब है ? या तीन चार बच्चों का होना उस की वजह है या फिर कोइ ओर बात ???
ख़ातुन ने जवाब दिया पुरसुकुन शादी शुदा ज़िन्दगी का दारोमदार अल्लाह तबारक व तआला की तौफ़ीक़ के बाद औरत के हाथ में है, औरत चाहे तो अपने घर को जन्नत बना सकती है और वो चाहे तो उस के बर अक्स जहन्नम भी बना सकती है ।
इस सिलसिले मे माल व दौलत का नाम भी मत लीजिए बहुत सारी मालदार ओरतें जिनकी ज़िन्दगी अज़ीरन बनी हुइ है शौहर उन से भागा भागा रहता है

ख़ुश हाल ज़िन्दगी का सबब औलाद भी नही है बहुत सारी औरतैं हैं जिनकी दसियों बच्चे हैं फिर भी वौ शौहर की मोहब्बत से महरुम हैं बल्की तलाक़ तक नौबत आ जाती है

बहुत सारी ख़्वातीन खाना पकाने में माहिर होती हैं दिन दिन भर खाना बनाती रहती हैं लैकिन फिर भी उन्हें हसबेंड से बदसुलूकी की शिकायत रहती हे
इंटरव्यु लेने वाली ख़ातुन सहाफ़ी को बहुत हैरत हुई ,उस ने पूछा फिर आख़िर इस ख़ुशहाल ज़िन्दगी का राज़ क्या है ???

बुढ़ी ख़ातुन ने जवाब दिया : जब कभी मेरा शौहर इन्तहायी ग़ुस्से में होता है तो मेैं ख़ामोशी का सहारा ले लेती हूँ लैकिन उस ख़ामोशी में भी एहतराम शामिल होता है में अफ़सोस के साथ सर झुका लेती हुँ, एेसे मौक़े पर बाअज़ ख़्वातीन ख़ामोश तो हो जाती हैं लेकिन उस में तमस्ख़ुर का अनासिर शामिल होता है इस से बचना चाहिये, समझदार आदमी उसे फ़ौरन भांप लेता है

स्टोरी कवर करने वाली ख़ातुन ने पूछा : ऐसे मौक़े पर आप कमरे से निकल क्यूँ नहीं जातीं ?
बुढ़ी ख़ातुन ने जवाब दिया :नहीं, ऐसा करने से शौहर को ये लगेगा कि आप उस से भाग रही हैं , आप उसे सुन ना भी नही चाहती हैं ऐसे मौके़ पर बहुत सन्जीदा या नदामती तरीक़े पर ख़ामोश रहना चाहिये और जब तक वो पुर सुकुन ना हो जाऐं उनकी किसी बात की मुख़ालिफ़त नही करना चाहिये .
जब शौहर किसी हद तक पुर सुकुन हो जाता है तो मेैं कहती हुं : पूरी हो गई आप की बात? फिर मेैं कमरे से चली जाती हूं क्युंकी शौहर बोल बोल कर थक चुका होता है ओर चिखने चिल्लाने के बाद अब उसे थोड़े आराम की ज़रूरत होती है मैं कमरे से निकल जाती हुं ओर अपने मामूल के कामों में मसरूफ़ हो जाती हुं

ख़ातून सहाफ़ी ने पूछा :उस के बाद आप क्या करती हैं ? क्या आप बातचीत बंद करने का असलूब अपनाती है?एक आधा हफ्ते तक बोल चाल नहीं करती हैं ?

बूढी ख़ातून ने जवाब दिया : नहीं इस बुरी आदत से हमेशा बचना चाहिए ये दो धारी हथियार है जब आप एक हफ़्ते तक शौहर से बातचीत नहीं करेंगी ऐसे वक़्त में जब की उसे आप के साथ मुसालिहत (सुलह) की ज़रूरत है तो वो इस कैफ़ियत के आदी हो जायेंगें और फिर ये चीज़ बढ़ते बढ़ते ख़तरनाक क़िस्म की नफ़रत की शक्ल इख़्तियार कर लेगी .
सहाफ़ी ने पूछा : फिर आप क्या करती हैं?
बूढी ख़ातून बोलीं : में दो तीन घंटे बाद शौहर के पास एक गिलास शरबत या एक कप चाय या कॉफ़ी लेकर जाती हूँ और मुहब्ब्त भरे अंदाज़ में कहती हूँ :पी लीजिये .हक़ीक़त में शौहर को इसी चीज़ की ज़रूरत होती है पर वो थोड़ी नाराज़गी पर नरम लहज़े में कहता है नहीं पीना :फिर मैं अदब और मुहब्बत के साथ कहती हूं प्लीज़ पी लीजिये :फिर में नार्मल और नरम लहज़े में बात करने लगती हूँ कुछ ही लमहे में वो पूछता है क्या में उससे नाराज़ हूँ ? में कहती हूँ, नहीं :उस के बाद वो अपनी सख़्त कलामी पर माज़रत (सॉरी )ज़ाहिर करता है और ख़ूबसूरत किस्म की बातें करने लगता है .
इंटरवयु लेने वाली ख़ातून ने पुछा : और आप उस की ये बाते मान लेती हैं ?
बूढी खातून बोलीं: बिलकुल मेैं कोई अनाड़ी थोड़ी हूँ, मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा होता है क्या आप चाहती हैं ? मेरा शोहर जब गुस्से में हो तो में उस की हर बात का यकीन कर लूं और जब वो पुर सुकुन हो तो उस की कोई बात ना मानूं

ख़ातुन सहाफ़ी ने पूछा : और आप की इज़्ज़ते नफ़्स ?(self respect)
बुढी ख़ातुन बोलीं :पहली बात तो ये कि मेरी इज़्ज़ते नफ़्स सेल्फ़ रिसपेक्ट उसी वक़्त है जब मैरा शौहर मुझ से राज़ी हो और हमारी शादी शुदा ज़िन्दगी पुर सुकून हो

दुसरी बात ये कि में इतनी पागल या बैवफ़ा नहीं कि उस के गुस्सा आ जाने वाले वक़्त पर उसके तमाम मोहब्बत भरे पलो को ,और उसकी सारी क़ुरबानियाँ जो मेरे लिए और मेरे बच्चों के लिये दी होती है वो भूल जाउं वो सख़्त तेज़ धूप मे काम पर जाना वो शिद्दत की सर्दी की सर्द शबों (ठंडी रातों) में गरम बिस्तर छोड़ कर काम के लिये बाहर जाना वो तेज़ बारिशों में भीगते हुए आना हर वक़्त घर की बेहतरी के लिये उसका फ़िक्रमन्द रहना !

तीसरी और लास्ट बात समझने की ये की शौहर बीवी के दरमियान इज़्ज़ते नफ़्स नाम की कोई चीज़ ही नहीं होती
जब बीवी ख़ुद अपने आप को और अपनी हर चीज़ को अपनी इज़्ज़त को अपने शौहर को सौंप देती है तो फिर उस के सामने कैसी इज़्ज़ते नफ़्स ?