#कठुआ कांड की जांच करने वाली DSP श्वेतांबरी शर्मा का खुलासा, हमें परेशान करने की कोशिश की जा रही है!!VIDEO!!

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@ShwetambriGupta
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कठुआ गैंगरेप मामले की जांच करने वाली एसआईटी टीम की पुलिस अधिकारी श्वेतांबर शर्मा ने कहा कि हमें परेशान करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन हम अपने स्टैंड पर कायम है। उन्होंने कहा, कई बार आरोपियों ने उनसे कहा कि हम सभी एक ही धर्म और जाति से आते हैं। इसीलिए मुझे उन्हें एक मुस्लिम लड़की के मामले में दोषी नहीं ठहराना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं एक ऑफिसर के तौर पर मेरी ड्यूटी कर रही हूं और यह मेरा धर्म है और मेरी वर्दी ही मेरी धर्म है।

और वही जम्मू पुलिस ने 8 वकीलों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन वकीलों पर गैंगरेप के आरोपियों के बचाव में क्राइम ब्रांच को मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोकने की कोशिश करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक वकीलों के रवैए पर बार काउंसलिंग ऑफ इंडिया ने भी इन सभी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची से हुए जघन्य बलात्कार और हत्याकांड को सुलझाने वाली जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की स्पेशल इंवेशटिगेशन टीम (एसआईटी) की एकमात्र महिला सदस्य और पुलिस अधिकारी श्वेतांबरी शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि तमाम कठिनाइयों से भरे इस केस को सुलझाने में उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा। और कैसे वे केस के अंजाम तक पहुंचा सकीं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात डिप्टी एसपी श्वेतांबरी शर्मा जम्मू की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया, “उस आठ साल की मासूम बच्ची के जघन्य बलात्कार और हत्या में हमें जिन लोगों के शामिल होने का शक था, जैसे उनके रिश्तेदार और उनसे सहानुभूति रखने वाले जिनमें कई वकील भी शामिल हैं, उन्होंने हमारी जांच में अड़चन डालने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने हमें अपमानित और परेशान करने की सभी हदें पार कर दीं। लेकिन हम अपने इरादों में आखिर तक डटे रहे।

जम्मू के कठुआ जिले में हीरानगर के रासना गांव से एक आठ साल की बच्ची 10 जनवरी को लापता हो गई। बच्ची के अपहरण होने के आरोपों के बीच पुलिस लड़की को खोजने में नाकाम रही। इस वजह से जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के एक सत्र की कार्यवाही बाधित हो गई। 17 जनवरी को बच्ची की लाश मिली।

@ShwetambriGupta “we cracked this rape and murder mystery during the holy navrataras. I believe there was a divine intervention to bring the culprits to justice. I believe Durga Mata had her hand on our head,” – Shwetambri Sharma

कठिन चुनौतियों के बीच काम किया
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जम्मू-कश्मीर पुलिस सेवा की 2012 बैच की अधिकारी श्वेतांबरी शर्मा ने बताया, “हमने कड़ी चुनौतियों के बीच काम किया। कई बार हम बहुत निराश हो गए। खास तौर पर जब हमे ये मालूम हुआ कि हीरानगर पुलिस स्टेशन के लोगों को केस दबाने के लिए रिश्वत दी गई है और उन्होंने पीड़ित लड़की के कपड़ों को धो दिया जिससे अहम सबूत मिटाया जा सके। इसके बावजूद हमने बलात्कार और हत्या की इस गुत्थी को पवित्र नवरात्र के दिनों के दौरान सुलझा लिया। मैं मानती हूं कि एक दैवीय हस्तक्षेप हुआ ताकि गुनहगारों को सजा मिल सके। मुझे विश्वास है कि दुर्गा मां का हाथ हमारे सिर पर था।”

एसआईटी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अपराध शाखा जम्मू के रमेश कुमार जल्ला के अलावा पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) आलोक पुरी और सय्यद अहफदुल मुजताबा की देखरेख में काम करना शुरू किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) क्राइम नावीद पिरजादा टीम का नेतृत्व कर रहे थे। जिसमें डिप्टी एसपी श्वेतांबरी, सब-इंस्पेक्टर इरफान वानी, इंस्पेक्टर केके गुप्ता और सहायक सब-इंस्पेक्टर तारिक अहमद शामिल थे।

अभियुक्तों के परिवारों और उनके समर्थकों द्वारा केस की जांच सीबीआई को सौंपने की मांगों के बीच, 9 अप्रैल को एसआईटी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत के सामने आरोपी के खिलाफ दो आरोप पत्र दाखिल किए जिसमें आठ आरोपियों को बलात्कार, हत्या, अपहरण, गलत तरीके से कैद रखना, आपराधिक साजिश और प्रमाणों को नष्ट करने का दोषी ठहराया गया।

सीजेएम ने वयस्क को नाबालिग बताया
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चार्जशीट के मुताबिक आरोपियों में शामिल एक युवक ने बंधक बनाई गई बच्ची के साथ दो बार बलात्कार किया और बर्बरता से उसकी हत्या करने के बाद उसकी लाश को फेंक दिया था। एक

ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने उसे नाबालिग घोषित कर दिया गया था, जबकि एसआईटी ने उसके स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर उसे वयस्क साबित किया। सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू में डॉक्टरों की एक टीम ने भी उसे 19 से 20 साल का बताया था।

श्वेतांबरी ने 7 सालों तक माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी और जम्मू विश्वविद्यालय से संबद्ध कुछ अन्य कॉलेजों में मैनेजमेंट पढ़ाया। 2012 में जब वह पुलिस सेवा में शामिल हुईं तो वे प्रबंधन में पीएचडी कर रही थीं।

धर्म और जाति के नाम पर छूट मांगी
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श्वेतांबरी कहती हैं कि, “आरोपियों में से ज्यादातर ब्राम्हण थे, और अपने उपनाम पर ज्यादा जोर दे रहे थे। उन्होंने खासतौर पर मुझे प्रभावित करने की कोशिश की और कई जरिये से मुझ तक यह बात पहुंचाई कि हम एक धर्म और एक जाति से हैं और मुझे उन्हें एक मुस्लिम लड़की के बलात्कार और हत्या का दोषी नहीं ठहराना चाहिए। मैंने उन्हें बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक अधिकारी होने के नाते मेरा कोई धर्म नहीं है और मेरा एकमात्र धर्म पुलिस की वर्दी है।”

ब्लैकमेल किया, धमकी दी
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श्वेताबरी बताती हैं कि, “जब सब चालें फेल हो गईं, उनके परिजनों और सहानुभूति रखने वालों ने मुझे हम मुमकिन तरीके से ब्लैमेल करने और धमकी देने पर उतर आए। उन्होंने लाठियां पकड़ी, नारे लगाए, तिरंगा के नीचे रैलियां निकालीं और कई गांवों में और आखिरकार कोर्ट तक हमारा रास्ता रोका। लेकिन हिम्मत और धैर्य के साथ हम डटे रहे अपना पूरे दृढ़ निश्चय, समर्पण और पेशेवर तरीके से अपना काम किया।”

अकेले वारदात के सबूत जुटाए
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इस महिला अधिकारी ने बताया कि जब उन्हें यह बात पता चली कि एक रिटायर्ड गिरदवार सांझी राम के निजी देवस्थान में बच्ची के बाद ऐसी बर्बरता की गई तो यह रोंगटे खड़े करनेवाला था। श्वेतांबरी ने बताया कि वह वे अधिकारी थीं जो मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उस देवस्थान में घुसीं और सबूत जुटाए, जिसमें वहां पीड़ित के बिखरे पड़े बाल भी शामिल थे। बाद में फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला ने भी इस बात की पुष्टि की कि बालों के सैंपल उस आठ साल की बच्ची के थे।

वकील जिरह करने की बजाए प्रदर्शन कर रहे थे
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श्वेतांबरी ने बताया, “एक बार जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान, जो बाद में खारिज कर दिया गया, हम कोर्ट में बहस के लिए पहुंचे। लेकिन बचाव पक्ष की ओर से बहस करने की बजाए 10 से 20 वकीलों की भीड़ ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। हमने लगातार कोर्ट के बाहर विरोध करनेवाली भीड़ का सामना कर रहे थे।

हमने इस बारे में कुछ नहीं किया, बल्कि एसएचओ से एफआईआर दर्ज को कहा। जब उसने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया तब हम हमने अपने एसआईटी प्रमुख के जरिये जिला मजिस्ट्रेट के पास गए। उस समय चारों ओर अराजकता का माहौल था और धमकियां मिल रही थीं।

सबसे ज्यादा भयावह पल
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श्वेतांबरी ने बताया कि उनेके लिए वह पल सबसे ज्यादा भयावह था, जब अपने बेटे की उम्र की बच्ची के साथ हुए बलात्कार और हत्या की बारीकियों के बारे में उन्हें आरोपियों से पूछताछ करनी पड़ी। यह भयावह था। लेकिन दुर्गा माता हमारे साथ थीं। उन्होंने मुझे साहस दिया और मैंने एसआईटी टीम के पुरुष सदस्यों की मौजूदगी में जांच से जुड़े वे सभी जरूरी सवाल किए।

जांच के बाद उन्होंने ये स्पष्ट किया कि देव स्थान के संरक्षक सांझी राम का बेटा विशाल जंगोटा मेरठ से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहा था अपनी हवस मिटाने के लिए आया था। उसे नवरात्र के पहले दिन और सांझी राम को नवरात्र के तीसरे दिन गिरफ्तार किया कर लिया गया।

मेरी नींद उड़ गई थी
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डीएसपी श्वेतांबरी कहती हैं कि यह बेहत कठिन केस था। “मुझे नींद नहीं आती थी। मैं रातों को जागती थी। जब मेरे पति पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा रहे थे उनका साथ देने के लिए मैं मौजूद नहीं थी। मैं अपने बच्चे की सही तरीके से देखभाल नहीं कर पाई, जब उसे परीक्षा की तैयारी कराई जानी थी।

लेकिन भगवान का शुक्र है हम अपने काम में कामयाब हुए। और मुझे इस बात का संतोष है कि अपने टीम के अन्य सदस्यों के साथ मैंने कुछ ऐसा किया कि बलात्कार और हत्या के उन आरोपियों को न्याय के कठघरे तक पहुंच सके।

डीएसपी श्वेतांबरी कहती हैं, “मुझे न्यायपालिका पर पूरा यकीन है। हम सभी को विश्वास है कि न्याय होगा क्योंकि हमारी जांच पुख्ता है। इसमें ना सिर्फ आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल किया है बल्कि सभी जरूरी टेक्निकल और वैज्ञानिक सबूत भी शामिल हैं।
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मेरी वर्दी मेरा पहला धर्म : कठुआ रेप को सामने लाने वाली ऑफिसर
अहमद अली फय्याज
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कठुआ गैंगरेप में अधिकारी लगातार भारी दबाव के बीच काम कर रहे हैं. ऐसे में क्विंट ने कठुआ मामले की पड़ताल कर रही SIT की अकेली महिला सदस्य श्वेताम्बरी शर्मा से खास बातचीत की और जाना कि धमकियों की परवाह किए बिना 8 साल की बच्ची के साथ हुए गैंगरेपऔर हत्या की जांच करना उनके लिए कितना मुश्किल रहा.

“जिन लोगों पर हमें 8 साल की मासूम बच्ची के साथ बेरहमी से रेप और हत्या करने का शक था, वो लोग, उनके रिश्तेदार और समर्थक समेत तमाम वकीलों ने मिल कर हमारी तफ्तीश में खलल डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. उन्होंने हमें प्रताड़ित और अपमानित किया. लेकिन हम आखिर तक टिके रहे”. श्वेतामबरी ने क्विंट से कहा.

रेप की सच्चाई सामने आने से पहले इसे अपहरण और हत्या की घटना माना जा रहा था. कठुआ के रसाना गांव में 8 जनवरी को बच्ची गायब हुई थी, जिसका पुलिस का पता लगाने में नाकामयाब रही और 17 जनवरी को बच्ची की लाश बरामद हुई.

23 जनवरी को मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया और SIT गठित हुई जो IGP आलोक पुरी और सय्यद अहफदुल मुजतबा की अगुवाई में काम कर रही थी.

जांच के बारे में बात करते हुआ श्वेताम्बरी ने कहा “केस की जांच के दौरान हमें कई बार निराशा हुई, खास तौर पर उस समय, जब हमें पता चला पुलिस ने इस मामले को दबाने के लिए घूस ली और सबूत मिटाने के लिए बच्ची के कपड़े धो दिए“

9 अप्रैल को SIT ने CJM के सामने 8 लोगों के खिलाफ चार्ज शीट दायर की जिन पर बलात्कार, हत्या, अपहरण और सबूतों को मिटाने जैसे आरोप लगाए गए. जिसके बाद आरोपियों और उनके समर्थकों की तरफ से इस केस को CBI को सौंपने की मांग उठनी शुरु हो गई.

श्वेताम्बरी जांच के दौरान धर्म के नाम पर डाले जा रहे दबाव पर कहती हैं कि “क्योंकि ज्यादातर आरोपी ब्राह्मण थे, इसलिए मुझे बार-बार ये याद दिलाने कि कोशिश की गई की हम एक धर्म और जाति के हैं, मुझे उन्हें एक मुसलमान लड़की के रेप और हत्या के लिए आरोपी नहीं बनाना चाहिए, मैंने उनसे कहा कि एक पुलिस ऑफिसर होने के नाते मेरा सिर्फ एक ही धर्म है, वो है मेरी वर्दी”

श्वेताम्बरी आगे कहती हैं कि “जब ये सारी कोशिशें काम नहीं कीं तो आरोपियों के परिवार वाले और समर्थक किसी भी तरह डराने और धमकाने में लग गए. वो लाठियां लेकर घूमते, नारे लगाते और सड़कें जाम कर के जगह-जगह तिरंगा लेकर रैलियां निकालते. लेकिन हम संयम के साथ लगातार काम करते रहे.”

श्वेताम्बरी 2012 में पुलिस में भर्ती हुईं. इससे पहले वो यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट पढ़ाती थी. पुलिस में आने के बाद भी उन्होने अपनी पढ़ाई जारी रखी और डॉक्टरेट हासिल किया.

श्वेताम्बरी बताती हैं कि इस केस की तह तक जाने और बच्ची के साथ हुई भयावह घटना ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी.

“मैं इस केस के दोरान अपने पति और बच्चों के साथ बिलकुल वक्त नहीं बिता पाई, लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि हम आरोपियों के खिलाफ सबूत इकठ्ठा कर पाए.”

बच्ची का अपहरण कर के उसे नशे की दवाई दी गई थी जिससे वो बेहोश रहे. आरोपियों में से एक सांझी राम ने उसे अपने देविस्थान मंदिर में रखा था. श्वेताम्बरी ने ही उस मंदिर के अंदर जाकर सबूत इकठ्ठा किए थे जिससे बाद में ये साबित हो पाया की बच्ची मंदिर में ही थी.

श्वेतामबरी आगे कहती हैं “केस की सुनवाई के दौरान जब हम कोर्ट में गए तो 10-20 वकीलों ने हमारे खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी. हमसे कहा गया हम आरोपियों के नाम बताएं, जबकि हम ऐसा नहीं कर सकते थे. हमें बार-बार भीड़ ने रोका, हमने जब SHO से FIR दर्ज करने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया, जिसके बाद हम अपनी शिकायत लेकर DM के पास गए. हर जगह अराजकता और डराने-धमकाने का माहौल था”

लेकिन उनका कहना है कि इस केस का सबसे मुश्किल वक्त उनके लिए तब था जब उन्हें आरोपियों से बच्ची के साथ किए दुष्कर्म की सिलसिलेवार जानकारियां पूछनी थीं, वो बच्ची जो उनके बेटे की ही उम्र की थी.

श्वेताम्बरी का कहना है कि केस पर काम करना मुश्किल जरूर था लेकिन मां दुर्गा हमारे साथ थी. उन्होंने मुझे शक्ति दी और मैंने SIT के पुरुष सदस्यों के सामने घटना से जु़ड़े सारे सवाल आरोपियों से पूछे.
श्वेताम्बरी आगे कहती हैं कि हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. हमें पूरा यकीन है कि न्याय होगा, हमारी जांच में सारे सबूत और तथ्य मौजूद हैं.

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https://youtu.be/CHA2YONeB1g