कभी क्लर्क तो कभी हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले यदुरप्पा, अब नहीं बन पाएंगे CM

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Sagar_parvez
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बीजेपी ने कर्णाटक चुनावों से पहले यदुरप्पा को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था पर उम्मीद अब ख़तम होती नज़र आ रही है, यहाँ हुए चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता दिख रहा है ऐसे में कांग्रेस ने जेडीएस को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया है|

कर्नाटक विधानसभा में जीत हासिल कर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से दक्षिण भारत में वापसी की है।

2014 में जब भाजपा ने केंद्र में सरकार बनाई थी तो उस वक्त भाजपा या एनडीए की सरकार केवल 8 राज्यों में थी, लेकिन अब ये आंकड़ा 21 राज्यों तक पहुंच गया है। कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर पेश किया। येदियुरप्पा ने भी जी-जान लगा दी और उनकी मेहनत के बदौलत भाजपा एक बार फिर से कर्नाटक में वापसी कर पाने में सफल हो सकी।

कभी क्लर्क तो कभी हार्डवेयर की दुकान
येदियुरप्पा का सियासी जीवन जितना उथल-पुथल से भरा रहा उनके निजी जीवन में भी ऐसे ही उतार-चढ़ाव रहे। उनका जन्म 27 फरवरी 1943 को राज्य के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में सिद्धलिंगप्पा और पुत्तथयम्मा के घर हुआ था। वो 4 साल के ही थे जब उनकी मां का देहांत हो गया। मां के जाने के बाद पिता ने ही उनकी जिम्मेदारी संभाली। पढ़ाई के साथ-साथ वो किसान के तौर पर खेतों के काम करते थे

हालाँकि शिक्षा पर विवाद है!

फिर बीए पास करने के बाद उन्होंने चावल मिल के क्लर्क की नौकरी की, लेकिन वहां मन नहीं लगा तो नौकरी छोड़कर हार्डवेयर की दुकान खोल ली। इसी दौरान वो संघ के करीब आएं और उन्होंने संघ ज्वाइन कर लिया। 1972 में शिकारीपुरा तालुका जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया और इस तरह उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। फिर येदियुरप्पा ने थमने का नाम नहीं लिया। 1977 में जनता पार्टी के सचिव पद पर काबिज होने के साथ ही राजनीति में उनका कद और बढ़ गया। 1975 में इमरजेंसी के दौरान उन्हें 45 दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा।

सियासी सफर
लिंगायत यमुदाय से ताल्लुक रखने वाले येदिदुप्पा 1983 में पहली बार विधायक बने। उन्होंने शिकारीपुरा विधानसभा सीट से पहली बार जीत हासिल की और तब से लेकर अब तक 7 बार वहां से लगातार जीत हासिल की है। पार्टी में 1988 में उन्हें कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बनाया और तब से लेकर अब तक वो तीसरी बार पार्टी की कमान संभाल रहे हैं। 1994 के विधानसभा चुनाव के बाद वे विपक्षी दल के नेता बने। साल 2008 में भाजपा ने येदियुरप्पा के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और पार्टी जीत गई।

भ्रष्टाचार के लगे आरोप
येदियुरप्पा पर साल 2011 में लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इस आरोप के बाद उन्हें 25 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। आरोप लगने के बाद साल 2012 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता और विधासभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी अलग पार्टी बनाई। भाजपा जानती थी कि बिना येदियुरप्पा के वो दक्षिण भारत में कांग्रेस का किला ध्वस्त नहीं कर पाएगी, इसलिए एक बार फिर से 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन्हें अपने साथ कर लिया।