कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार समाप्त, ‘नीच’ भाषा का हुआ जमकर इस्तेमाल

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कर्नाटक में गुरुवार की शाम विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार समाप्त हो गया है और शनिवार को मतदान होगा।

गुरुवार को कर्नाटक में सभी दलों के नेताओं ने ज़ोरदार प्रचार किया। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष और मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार येदियुरप्‍पा ने राज्य में प्रचार किया। कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने प्रचार किया। राहुल गांधी ने कहा है कि उनकी पार्टी ने एकजुट होकर बहुत अच्‍छा चुनाव अभियान चलाया है और बुनियादी मुद्दे उठाकर कर्नाटक के विकास का प्रारूप तैयार किया है।

इस बीच भारत के उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर धर्म के नाम पर वोट मांगने का आरोप लगाने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है। मुख्य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्‍यायालय इसमें हस्‍तक्षेप नहीं कर सकता। पीठ ने यह भी कहा कि अल्‍पसंख्‍यक समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने के वादे का यह अर्थ नहीं है कि धर्म के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों के बीच जुबानी जंग थम गई है। अब राज्य की 224 सीटों पर ताल ठोक रहे 2,654 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला मतदाताओं के हाथों में है। 12 मई को मतदान होगा और 15 मई को तय होगा कि कौन विधानसभा जाएगा और कौन घर बैठेगा। बृहस्पतिवार को खत्म हुए प्रचार के दौरान भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए तो राज्य का तीसरा बड़ा दल जद (एस) दोनों के निशाने पर रहा। पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रचार अभियान शुरू करने के बाद विधानसभा चुनाव मोदी बनाम राहुल बन गया। इस फेर में महादयी, कावेरी जल बंटवारा, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर कम ही बात हुई।

– कांग्रेस ने केंद्र पर उत्तरी राज्यों को तरजीह देने और दक्षिण के राज्यों से भेदभाव का आरोप लगाया।
– कांग्रेस ने भाषा, संस्कृति, विचारधारा के आधार पर राज्य को कम आर्थिक मदद का आरोप लगाया।
– लिंगायत को धार्मिक आरक्षण का प्रस्ताव रख भाजपा के परंपरागत वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश की।
– महिला सुरक्षा, दलित उत्पीड़न, रोजगार, किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस ने भाजपा की केंद्र सरकार को घेरा।
– राफेल, नीरव मोदी, विजय माल्या के बहाने केंद्र की मोदी सरकार पर राहुल गांधी ने खूब किए हमले।

– राहुल और मोदी ने एक-दूसरे को कई मुद्दों पर 15 मिनट बोलने की चुनौती दी, जो 5 मिनट तक गई।
– राज्य के अलग झंडे के मुद्दे पर कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार और कांग्रेस पर जमकर हमले किए।
– भ्रष्टाचार, सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा और केंद्र की उपलब्धियां गिनाईं।
– केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों को भ्रष्टाचार, घोटालों सहित कई मुद्दों पर घेरा।
– सीएम सिद्धारमैया समेत राज्य के मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रधानमंत्री ने बनाया निशाना।

दलित 20 फीसदी
मुस्लिम 16 फीसदी
ओबीसी 16 फीसदी
लिंगायत 15 फीसदी
वोक्कालिगा 11 फीसदी
कुरुबा 7 फीसदी
आदिवासी 5 फीसदी
ईसाई 3 फीसदी
ब्राह्मण 3 फीसदी

हर दल ने दागियों को दिए टिकट

राजनीति में शुचिता की बातें सभी दल करते हैं, लेकिन दागी प्रत्याशियों को टिकट देने में कोई पीछे नहीं रहा। भाजपा के 223 उम्मीदवारों में 83 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 58 पर हत्या सहित गंभीर मामले हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस के 220 प्रत्याशियों में 59 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 32 पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। जद (एस) के 199 उम्मीदवारों में 41 पर आपराधिक मामले हैं। 1,090 निर्दलीय उम्मीदवारों में 108 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 70 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
कौन किसके साथ

– अल्पसंख्यक, ओबीसी और दलित कांग्रेस के साथ हैं।
– लिंगायत और ब्राह्मण भाजपा के पक्ष में दिख रहे हैं।

कहां कौन असरदार

– हैदराबाद से कटकर कर्नाटक में जुड़े हिस्से को हैदराबाद-कर्नाटक कहा जाता हैं। उत्तरी कर्नाटक के इस हिस्से में बेल्लारी, रायचूर, बीदर और गुलबर्ग शामिल हैं। यहां की 100 सीटों पर लिंगायत बड़ा उलटफेर करने की हैसियत रखते हैं।

– मुंबई से सटे कर्नाटक के इलाके को मुंबई-कर्नाटक के तौर पर पहचाना जाता है। इसमें बेलगाम और धारवाड़ आता है। ये इलाके भी उत्तरी कर्नाटक में आते हैं। इनमें कुरुबा प्रभावी हैं और प्रत्याशियों की किस्मत पलट सकते हैं।

– दक्षिण कर्नाटक में पड़ने वाले 10 जिलों की विधानसभा सीटों पर वोक्कालिगा समुदाय प्रभावी है। इनमें मैसूर, मंड्या, हासन, तुमकुर, कोलार शामिल हैं।

– तटीय कर्नाटक में भाजपा ने ब्राह्मण और अन्य पिछड़ा वर्ग को साधने की भरपूर कोशिश की है।