कवियित्री चन्द्रकांता सिवाल हुई अंतरराष्ट्रीय “नेपाल-भारत साहित्य सेतु सम्मान” से सम्मानित, बढ़ाया दिल्ली का मान

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क्रान्तिधरा साहित्य अकादमी मेरठ द्वारा नेपाल की वाणिज्यिक नगरी बीरगंज में त्रिदिवसीय भारत-नेपाल साहित्यिक महोत्सव का आयोजन भारतीय राज दूतावास नेपाल, नेपाल भारत सहयोग मंच एवं हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका मुख्य सहयोगी रहे। इस भव्य आयोजन का उद्धघाटन नेपाल के मुख्यमंत्री माननीय लालबाबू राउत के कर कमलों से वीरगंज नेपाल में हुआ। जिसमें भारत व नेपाल से साहित्यकार,पत्रकार , पर्यावरणविद बन्धुओं के साथ समस्त नेपाल से साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की तीन दिन चलने वाले इस साहित्यिक महोत्सव में पुस्तक प्रदर्शनी,पुस्तक-लोकार्पण,पुस्तक समीक्षा, किस्सागोई रंगमंच, कवि सम्मेलन-मुशायरा, पर्यावरण चर्चाएं, पौधारोपण, साहित्यिक परिचर्चा, सामाजिक विचार गोष्ठी और दोनों देशों के सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ अनेक प्रकाशकों,शिक्षण संस्थानों की पुस्तक प्रदर्शनी भी लगी।

इस भव्य महोत्सव के प्रथम दिवस में हेटोंडा अकेडमी आवासीय माध्यमिक विद्यालय के संचालक “अरुण राज सुमार्गी” व “अंकिता सुमार्गी” द्वारा भारत से पधारे सभी अतिथियों का स्वागत समारोह का आयोजन जिसमें बच्चों द्वारा विशेष रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुति स्वादिष्ट भोजन जलपान व्यवस्था एवं सम्मान पत्र अंग वस्त्र भेंट किया गया। द्वितीय सत्र में दोनों देशों के बीच साहित्य परिचर्चा काव्यपाठ पर्यावरण जागरूकता हेतु विशेष पौधारोपण द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया एवं समापन समारोह में नेपाल भारत से सम्मिलित साहित्यकारों को “नेपाल भारत साहित्य सेतु सम्मान” से नवाजा गया। भारत से कवियित्री लेखिका चन्द्रकांता सिवाल “चन्द्रेश” को अंतरराष्ट्रीय “नेपाल भारत साहित्य सेतु सम्मान” से सम्मानित किया गया, साथ ही उनकी “काव्य रंगोली” पत्रिका का विमोचन एवं दोनों देशों के विरिष्ठ साहित्यविद के संग विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच सांझा करते हुए उनके द्वारा नेपाल, भारत के कई साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।

भारतीय साहित्यकारों के लिए यह विशिष्ट सम्मान आतिथ्य सत्कार प्रेम मित्रता का सौहार्दपूर्ण अनुभूति रहा वहीं बीरगंज के साहित्यविद आमजन का कहना रहा, गत समय में सात महीने बंद का दुखांत सहने के उपरांत इस आयोजन ने बीरगंज की भूमि में नयी ऊर्जा का संचार किया है। क्रान्तिधारा साहित्य अकादमी के संस्थापक डॉ विजय कुमार पंडित ने इस महोत्सव को गत दस वर्षों के अथक प्रयास का परिणाम बताया और कहा ये आयोजन भारत नेपाल के मित्रवत संबंधो में मिल का पत्थर होगा। अंत मे दोनों देशों के राष्ट्रगान के साथ के इस भव्य आयोजन का समापन हुआ।

साभार-चन्द्रकांता सिवाल चन्द्रेश (सदस्य क्रान्तिधारा साहित्य अकादमी)