”कांग्रेस जीतने के बाद भी लगातार हार रही है”

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Joher Siddiqui
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कांग्रेस को राहुल गांधी के अलावा विकल्प देखना चाहिए, वर्णा कांग्रेस जिसे भारत की आत्मा तक समझा जाता रहा है, वो मर जाएगी।

आज कर्नाटक चुनाव का रिजल्ट आया है, कांग्रेस को कर्नाटक की 38% जनता ने वोट दिया जबकि उसे सिर्फ 66 सीटें मिली है। वहीं बीजेपी को कर्नाटक की 36.7% जनता ने वोट दिया और उसे 111 सीटें आई हैं।

ये आंकड़ा अपने आप मे बहुत कुछ कहता है, राहुल गांधी में इतनी चतुराई और समझदारी नहीं है, जिसकी ज़रूरत आज के विपक्ष को है, मैं मानता हूँ, राहुल गांधी सभ्य सुशील और बातों को समझने वाले व्यक्ति है, लेकिन परिपक्व नेता नहीं हैं।

2014 के बाद हुए सभी विधानसभा इलेक्शन के नतीजों पर ग़ौर कर के देखिये:

गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 18 सीटें मिली थी, बीजेपी को 13 सीट जबकि बहुमत के लिए 21 सीट की ज़रूरत थी, प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस गोवा में सरकार नहीं बना पाई और बीजेपी ने एमजीपी और गोवा फारवर्ड पार्टी से मिलकर सरकार बना ली।

मणिपुर में भी यही हुआ, कांग्रेस को 28 सीट मिली और बीजेपी को 21 फिर भी बीजेपी ने इधर उधर से जोड़ तोड़ कर सरकार बना ली।

फिर मेघालय में जो हुआ व्व इतिहास बन गया, मेघालय की जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया, सिर्फ 2 सीट जीतने वाली बीजेपी ने नेशनल पिपुल्स पार्टी की सरकार बनवा कर कांग्रेस को विपक्ष में बैठा दिया।

बिहार में भी यही हुआ, बिहार की जनता ने महागठबंधन को चुना जिसमे कांग्रेस भी शामिल थी लेकिन आज वहाँ बीजेपी के समर्थन से जदयू की सरकार है।

कांग्रेस जीतने के बाद भी लगातार हार रही है, राहुल गांधी इतने परिपक्व नहीं है कि अमित शाह के आगे खड़े हो सके, जबकि आज कांग्रेस को कोई ऐसा नेता चाहिए जो अमित शाह से टक्कर ले सकता हो।

गुजरात मे ये टक्कर दिखाई दी थी, जब अहमद पटेल को राज्यसभा भेजना था, उस वक़्त राहुल क्या कर रहे थे? अहमद पटेल उस वक़्त राज्यसभा कैसे पहुँचे जब पूरी भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री सहित बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह सहित पूरी बीजेपी उन्हें वहाँ पहुँचने से रोक रही थी, ये किस्से छुपा है?

फिर गोवा से लेकर मणिपुर होते हुए मेघालय में कांग्रेस सरकार क्यों नहीं बना पाई, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

आज कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने जा रही है, और पूरा देश जनता है, अगर अमित शाह तोड़ जोड़ पर उतर आए तो राहुल गांधी कुछ नहीं कर पाएंगे, फिर राहुल गांधी को विपक्ष का नेता किस बुनियाद पर मान लिया जाए?

कांग्रेस किसी ज़माने में द कांग्रेस रही होगी, आज उसका ढाँचा इतना कमज़ोर हो चुका है कि वोट प्रतिशत ही नहीं ज़्यादा सीट लाने के बाद भी वो सरकार नहीं बना पा रही है, और विपक्ष में बैठ कर सरकार के साफ दिख रहे पक्षपात और ग़लत नीतियों पर ढंग से विरोध तक नहीं जता पा रही है।।

अगर 2019 लोकसभा चुनाव के बाद, राहुल गांधी देश मे कांग्रेस पार्टी का प्रधानमंत्री चाहते है तो उन्हें खुद को कांग्रेस अध्यक्ष पद से आज़ाद करना होगा।।