“कुरआन और पुनर्जन्म”

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मो. रफीक चौहान एडवोकेट
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विश्व के सभी धर्मों के मानने वाले इस निर्विवाद सत्य को स्वीकार करते हैं कि कोई भी व्यक्ति अमर नहीं हो सकता और उसे एक न एक दिन मौत जरुर आयेगी। लेकिन उसकी आत्मा, रूह , Soul कभी नहीं मरती है और मनुष्य अपने जीवनकाल में जो भी भले बुरे कर्म करता है। उसका फल अगर उस व्यक्ति को इसी जन्म में नहीं मिलता है। तो मौत के बाद उसकी आत्मा को अगले जन्म में भुगतना पड़ता है।

भारतीय धर्मों में इस नियम को “पुनर्जन्म ” का सिद्धांत कहा जाता है। यद्यपि कुरान, हदीस और मसनवी में पुनर्जन्म के बारे में उल्लेख मिलता है। लेकिन मुस्लिम विद्वान् इसे घुमा फिरा कर और कुतर्क पूर्ण व्याख्याएं करके स्वीकार करते हैं।

कुरान की इस बात से सभी सहमत होंगे कि हरेक व्यक्ति को एक दिन मरना ही पड़ेगा। लेकिन दूसरी गौर करने वाली बात यह है कि मनुष्य द्वारा किये गए छोटे छोटे भले बुरे सभी कर्मों की परीक्षा कि जाएगी और उसका बदला दिया जायेगा अर्थात अधिक होने पर भले कर्मों से बुरे या बुरे कर्मों से भले कर्म न तो घटाए जायेंगे और न कम किये जायेंगे। कुरआन में फरमाया गया है …

“तुम जहाँ भी रहोगे मृत्यु तुम्हें आकर ही रहेगी। चाहे तुम किसी मजबूत बुर्ज के भीतर रहो “सूरा -निसा 4 :78.”

“हरेक जीव को मृत्यु का स्वाद चखना होगा और उसके कामों का पूरा बदला दिया जायेगा “सूरा-आले इमरान 3 :185”

“हरेक जीव को मौत का स्वाद चखना है और हम अच्छी बुरी सभी हालत में सबकी परीक्षा करते हैं “सूरा-अल अम्बिया 21 :35”

“और जो कोई जर्रे के बराबर भी भलाई करेगा। वह उसे देख लेगा और जो जरे बराबर भी बुराई करेगा वह उसे भी देख लेगा ” सूरा -जिल्जाल 99 :7 और 8

पुनर्जन्म: इस बात को सभी धर्म के लोग स्वीकार करते हैं कि मनुष्य द्वारा किसे गए सभी भले बुरे कर्मों का फल उसे जरुर दिया जायेगा और अधिक होने पर भले कर्मों से बुरे या बुरे कर्मों से भले कर्म न तो घटाए जायेंगे और न कम किये जायेंगे।

लेकिन यदि इसी जन्म में कर्मों का फल नहीं दिया जा सका तो मृत्यु के बाद उस व्यक्ति की आत्मा को उसका बदला दिया जायेगा। चूंकि आत्मा का कोई शरीर नहीं होता है। इसलिए उसे कर्मों का बदला देने के लिए दोबारा शरीर दिया जायेगा।

भारत में इसी को पुनर्जन्म कहा जाता है। अरबी भाषा में पुनर्जन्म के लिए कोई एक उपयुक्त शब्द नहीं है। इसलिए कुरान में जगह जगह विभिन्न शब्द प्रयुक्त किये गए हैं। लेकिन सभी शब्दों का वही अर्थ और आशय पुनर्जन्म ही है।

कुरान में पुनर्जन्म के प्रमाण :
कुरान में आत्मा के फिर से जन्म लेने और पृथ्वी पर लौट आने के लिए कई शब्द प्रयोग किये गए हैं। जैसे कि-

पुनरागमन (नुईद ) “इसी धरती पर हमने तुम्हें पैदा किया है और इसी पर हम तुम्हें लौटायेंगे और इसी पर दोबारा निकालेंगे “सूरा -ताहा 20 :55.

(इस आयत में अरबी शब्द” नुईदنُعيد “प्रयुक्त किया गया है जिसका मतलब Bring forth है )

“अल्लाह ने तुम्हें इस धरती पर विशेष रूप से विकसित किया है और तुम्हें इसी भूमि पर लौटा देगा और विशेष रूप से निकलेगा ” सूरा -नूह 71 :17 और 18″

(नोट -इस आयत में अरबी शब्द ‘नुईद نُعيد” मौजूद है ,लेकिन हिंदी अनुवाद में पुनरागमन की जगह “निकलेगा “शब्द दिया है )

दोबारा पैदा होना- “और वे बोले हे हमारे रब तू हमें दोबार मौत दे चूका है और तूने मुझे दोबार पैदा कर दिया है। हमने अपने गुनाह कबूल कर लिए हैं अब इस ( जन्म मृत्यु )से निकालने का कोई रास्ता है “सूरा अल मोमिन 40 :11

लोगों के इस सवाल का जवाब कुरान की इस आयत में यह मिलता है ” “ऐसी चीज के लिए तो कर्म करने वालों को कर्म करते रहना चाहिए “सूरा -अस साफ्फात 37 :61.

पुनर्जीवित होना- “क्या तुमने नहीं देखा कि जो लोग मौत के डर से घरों से निकल गए थे, अल्लाह ने उनसे कहा – जाओ मर जाओ। फिर बाद में अल्लाह ने उन्हें फिर से जीवित कर दिया “सूरा -बकरा 2 :243.

( नोट -इस आयत में अरबी में “अहया हुम ثُم احياهُم” शब्द आया है। इसका अर्थ “brought them back to life ” या “पुनर्जीवित “करना है )

पुनरागमन – “इन में से जब किसी कि मौत आ जायेगी तो वह कहेगा रब मुझे संसार में लौटा दो ताकि मैं जिस संसार को छोड़ आया हूँ उसमे अच्छे काम करूँ। यह तो एक सचाई है कि उनके पीछे बरजख ( पर्दा ) है। उनके फिर से जीवित करके उठाये जाने वाले दिन तक। सूरा अल मोमिनून 23 :99 -100.

(नोट -इन आयत में अरबी में लौटने के लिए “अर्जिऊन ارجعون” send back और “युब्सिऊन يُبثعون” raised या उठाना शब्द है। इसका तात्पर्य पुनर्जन्म नहीं है परन्तु बताया है कि निर्धारित समय यानि बरजख का पर्दा हट जाने के बाद पुनर्जीवन मिल सकता है )

भारतीय मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो एक निश्चित समय के बाद आत्मा का पुनर्जन्म हो जाता है। इस समय को “संचित काल ” कहते हैं और कुरान में इसी को “बरजख ” कहा गया है।

जीवन की पुनरावृत्ति – “जब तुम निर्जीव थे तो उसने तुम्हें जीवित किया। फिर वाही तुम्हें मारता है। फिर वही तुम्हें फिर से जीवित करता है और फिर उसी की तरफ लौटाए जाओगे ” सूरा -बकरा 2 :28.

“अल्लाह का वादा सच्चा है वही पहली बार पैदा करता और वही दोबारा पैदा करेगा “सूरा-यूनुस 10 :4

(नोट -इस आयत में भी ” सुम्म उयीदहू ثُمّ يُعيدهُ”शब्द है। जिसका अर्थ दुबारा जन्म देना है give rebirth ).

“क्या इन लोगों ने नहीं देखा कि अल्लाह पहली बार जन्म कैसे देता है और फिर उसकी पुनरावृत्ति कैसे करता है। निश्चय ही ऐसी पुनरावृत्ति अल्लाह के लिए आसान है “सूरा -अनकबूत 29 :19″

(नोट -इस आयत में भी ” सुम्म उयीदहूثُمّ يُعيدهُ “शब्द है। जिसका अर्थ दुबारा जन्म देना है )

“निश्चय ही वह अल्लाह उसकी जान लौटने की शक्ति रखता है “सूरा -अत तारिक 86 :8”

“जिस तरह उसने पहली बार पैदा किया था। उसी तरह तुम फिर से पैदा होगे “सूरा -अल आराफ 7 :29”

(नोट -यहाँ अरबी शब्द “तूऊ दूनتعودون ” आया है जिसका अर्थ भी Reborn या पुनर्जन्म होता है)

भारतीय धर्मों में माना जाता है कि बुरे और पाप कर्मों के फल भोगने के लिए आत्मा को मनुष्य के आलावा दूसरी ऐसी योनियों में भी जन्म मिल सकता है। जिसका रूप और आकार सबसे अलग और अजीब हो या शरीर में कोई खोट हो जैसा कि इन आयतों में कहा है —

“हमने तुम्हारे बीच में मृत्यु का नियम बना दिया है और तुम्हारे लिए यह असंभव नहीं कि हम तुम्हारे शरीर आकार बदल दें और ऐसे रूप में उठाकर खड़ा कर दें। जिसे तुम जानते भी नहीं हो “सूरा -अल वाकिया :56 :60 और 61”.

“हमीं ने इनको पैदा किया ,और इनके जोड़ बंद (अवयव) मजबूत किये और हम जब चाहें यह जैसे हैं उसे बिलकुल बदल दें- “सूरा – अद दहर 76 :28”.

जन्म मृत्यु का चक्र —आत्मा को सभी धर्मों ने अमर माना गया है और आत्मा को अपने कर्मों का फल भोगने के लिए बार बार जन्म लेना पड़ता है। यही कुरान का आशय भी है। जैसा इस आयात से स्पष्ट होता है कि

“जिस तरह उसने पहली बार पैदा किया था। उसी तरह तुम फिर से पैदा होगे “सूरा -अल आराफ 7 :29.

(नोट -यहाँ अरबी शब्द “तूऊ दूनتعودون ” आया है जिसका अर्थ भी Reborn या पुनर्जन्म होता है ).

रसूल्लाह पुनर्जन्म मानते थे —

जिस तरह भगवान कृष्ण ने अर्जुन को आत्मा की अमरता और युद्ध में शहीद हो जाने पर नया जन्म मिल जाने का विश्वास दिलाया था। उसी तरह रसूल्लाह ने भी कहा था कि यदि में शहीद हो गया तो अल्लाह मुझे भी फिर से जन्म देगा और जितनी बार भी मैं मरूँगा हर बार पैदा हो जाऊंगा। यही बात इस हदीस से सिद्ध होती है।

“अनस बिन मालिक ने कहा कि रसूल्लाह ने कहा कि कोई व्यक्ति मरने बाद इस दुनियां में तब तक वापिस नहीं आ सकता है। जब तक वह अल्लाह की राह में मरने वाले शहीदों में वरिष्ठता प्राप्त नहीं करता ” बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 53.

” रसूल्लाह ने कहा कि इमांन वालों का मेरा साथ छोड़ना ठीक नहीं होगा क्योंकि मैं अपनी सेना के साथ अल्लाह कि राह में शहीद होना चाहता हूँ और अगर में शहीद हो गया तो अल्लाह मुझे दोबारा जीवन दे देगा और अगर फिर शहीद हो गया तो अल्लाह मुझे फिर जीवन प्रदान कर देगा .”बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 54।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि इस्लाम भी पुनर्जन्म की के मान्यता से अछुता नहीं है । जिसका कुरआन और हदीस में स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं ।

मो. रफीक चौहान एडवोकेट करनाल हरियाणा।