”क्या अब आपको मेरी याद नहीं आती”

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Pratima Jaiswal

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बॉलीवुड फिल्मों में प्यार में धोखा खाए या बेवफाई का दर्द झेलते सीन्स की बात करूं, तो दो फिल्मों के दो ऐसे सीन्स आज तक सबसे अलग लगे हैं। जिसमें शायद थोड़ी हंसी, बचपना दिखाते हुए बहुत गहराई से बात कह दी गई है।
पहली फिल्म है – तनु वेड्स मनु रिटर्न्स
सीन-

शर्मा जी अपनी पत्नी के झगड़ों से परेशान हैं। जिंदगी झंड हो चुकी है। तलाक की कगार पर खड़े हैं। तभी उनकी मुलाकात अपनी पत्नी तनु जैसी दिखने वाली लड़की ‘दत्तो’ से होती है। दोनों में प्यार होता है, साथ निभाने का वादा। थोड़े दिनों में शादी की तैयारियां चल रही हैं। इतने में पत्नी तनु अपनी पलटन के साथ आ धमकती है।

शर्मा जी को मनाने-समझाने का दौर शुरू हो जाता है। जब तनु अंदर ही अंदर अपने किए पर पछताने लगती है और घुटन महसूस करती है, तो शराब का गिलास थामकर हरियाणा की गलियों में रात को निकल जाती है। जहां घुप अंधेरा है। पीछे बैकग्राउंड में 50 के दशक की फिल्म ‘आर-पार’ का गाना चल रहा है। सबसे अच्छी बात ये ओरिजनल ट्रैक गीता दत्त की आवाज में बिना किसी छेड़छाड़ के, गाना है ‘जा जा जा जा बेवफा! कैसा प्यार! कैसी प्रीत रे!’


तनु चली जा रही है सर्द रात में शराब की बोतल हाथ में थामे, इतने में एक शराबी उससे टकराता है, तनु उस पर चीखती है लेकिन फिर अपनी और उसकी हालत एक जैसी समझते हुए आगे बढ़ जाती है।
आगे पहुँचकर पेड़ के ऊपर उसे लिखा दिखता है विज्ञापन ‘मनचाहा प्यार पाएं, प्रेम विवाह बाधा दूर, सौतन से छुटकारा, गृह क्लेश!’
पढ़ी-लिखी और मॉर्डन तनु सोचती है, क्या पता किस्मत का लिखा यहां बदल जाए, कोई तो उपाय मिले, जिससे शर्मा जी लौट आए’।
खुद की बेवकूफी पर हंसते हुए ज्योतिष के सामने हाथ आगे बढ़ाती है। इतने में अंदर से आत्मा धिक्कारती है और बिना कुछ कहे-सुने इस बेवकूफी को बीच में ही छोड़ते हुए आगे बढ़ जाती है।

फिर अचानक मन में ख्याल आता है, कहीं सुंदरता में कोई कमी तो नहीं! आखिर शर्मा जी को दूसरी लड़की कैसे भा गई? आत्ममंथन करते हुए सामने एक ब्यूटी पार्लर दिखता है, जिसका शटर बंद है। गांव और छोटे शहरों में घर में ही ब्यूटी पार्लर खोल लिए जाते हैं, इस बात का अंदाजा लगाते हुए दुकान खोलने के लिए शटर पीटने लगती है।

देर रात शटर पीटने की आवाज सुनकर महिला शटर खोलती है। तनु की हालत और पहनावा देखकर महिला उसे अंदर बुलाती है।
यहां पहुँचने के बाद तक तनु को नहीं पता कि आखिर वहां आई क्यों है? तभी टेबल पर डमी पर पहनाए हुए छोटे बालों का विक उसे दिखता है, उसे याद आता है शायद शर्मा जी को छोटे बाल पसन्द हैं, दत्तो के भी छोटे बाल हैं।

वो बेहताशा नकली बालों को अपने सिर पर फिट करने लगती है। पार्लर चलाने वाली महिला उसकी मदद के लिए आगे आती है और उसके सिर पर विक फिट कर देती है।
तनु खुद को आईने में एक नजर देखती है, लेकिन उसे खुद में कुछ कमी लगती है।

वो आईने में देखकर अपने दांत थोड़े बाहर की तरफ निकालते हुए मुँह बनाती है। वैसे तो कोई लड़की नहीं चाहती कि उसके दांत बाहर निकले हुए हो, लेकिन दत्तो जो अब उसके पति की प्रेमिका बन चुकी है, उसके दांत ऐसे हैं। इसलिए उसे लगता है कि ये बदसूरती नहीं, बल्कि खूबसूरती है, हो सकता है तभी शर्मा जी अपना दिल हार बैठे हो।
जैसे, ठुकराए जाने के बाद लगभग हर प्रेमिका को अपने रंग-रूप या सुंदरता को लेकर आत्मविश्वास खोने लगती है। वो खुद को नई प्रेमिका से तुलना करने लगती है। उस जैसी अनगिनत प्रेमिकाओं को इस बात का भान बहुत बाद में जाकर होता है, कि सुंदरता है, इसलिए प्रेम नहीं, बल्कि प्रेम में सुंदरता है, जिसमें अपना प्रेमी या प्रेमिका दुनिया की सबसे सुंदर कृति लगने लगती है।
वो खुद के विचारों से जूझती है हर दिन, खुद में बेवफाई की वजह ढूंढते हुए।
बहरहाल, तनु को ऐसा करते देखकर पार्लर वाली महिला की 10-12 साल की बच्ची, उसकी इस बेवकूफी पर हंस पड़ती है।
उसे हंसता देखकर तनु को एहसास होता है, कि इस बच्ची तक को पता है कि मैं बेवकूफी कर रही हूँ।
वो एक आखिर कोशिश करते हुए वापस लौट पड़ती है। सामने शर्मा जी खड़े हैं। अब वो आखिरी सवाल करते हुए भरी आंखों और गले से पूछती है “शर्मा जी, क्या अब आपको मेरी याद नहीं आती”
उस ओर से दो टूक जवाब आता है “नहीं आती याद”।
-प्रतिमा
(दूसरा सीन कल)