क्या आपको पता है, भारत में डेढ़ करोड़ से ज़यादा “वैश्या” है

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Meraj Hasan
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क्या आपको पता है हमारे देश भारत में डेढ़ करोड़ से ज्यादा “वैश्या” है।

और ये संख्या कई देश की जनसँख्या से भी ज्यादा है।
सच्चाई यही है के हम लोग देश की असल समस्या पे बात भी नही करना चाहते क्योंकि टीवी न्यूज़ चँनेल और सियासत ने हमे इस लायक छोड़ा ही नही है ।

सरकार किसी भी पार्टी की रही हो लेकिन अंग्रेज़ो से आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमारी सरकारें अब तक गंभीर नही हो सकी के वो अपने डेढ़ करोड़ बेटियों की ज़िंदगी को बदल सके , उन्हें सम्मानजनक ज़िन्दगी दे सके और उन्हें अपनी बेटी मान सके।

हमारे देश में तो श्रद्धापूर्वक नदी को भी माता माना जाता है, गाय भी माता है,धरती भी माता है मगर डेढ़ करोड़ से ज्यादा देश की बेटियां वैश्या है जो किसी भी महान देश के लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है।

ऐसा नही है किसी को इनकी फिक्र नही है सैंकड़ो गैर सरकारी संगठन बड़े पैमाने पे वैश्यालय में रहने वाली महिलाओं की रोजमर्रा की चीजो से मदद भी करती है।

लेकिन एक काला सच ये भी है के बड़े बड़े Ngo’s इन्ही वैश्यालयों की तस्वीरें दिखा कर दुनिया भर से लाखों डॉलर की कमाई भी करती है।
मतलब आप समझ जाइये जब तक वैश्याविर्ति भारत में जारी रहेगा तब तक यूरोप में बैठा गोरा करोड़ो अरबो कमाता रहेगा।

कुछ साल पहले हमारे शहर #फारबिसगंज से एक महिला जो वैश्याविर्ति से जुडी हुई थी किसी ngo की मदद से अभिनेत्री #रानी_मुखर्जी के साथ #अमिताभ_बच्चन के शॉ #कौन_बनेगा_करोड़पति में भी पहुँची थी।

ये उस महिला के लिए बहुत बड़ी बात हो सकती है लेकिन देश भर में इस दलदल में फंसी महिलाओं को निकल कर उनको पुर्नजन्म देने के लिए भारत सरकार को मजबूत इरादे के साथ काम करना होगा।

हमारा देश इतना कमज़ोर भी नहीं है और सरकार चाहे तो क्या नही कर सकती है ,आप आधार कार्ड को ही ले लीजिए कैसे आधार को हर चीज से जोड़ा गया ।

A devdasi during Goddess Yellama festival in red light area Kamatipura; Mumbai; Maharashtra; India

फिर देश अपनी डेढ़ करोड़ बेटियों के बारे में कब सोचेगा ?
क्या देश के मीडिया के पास हिन्दू-मुस्लिम में नफरत फैलाने के अलावा भी कोई ज़िम्मेदारी है के नही?
क्या देश की राष्ट्रीय पार्टियों के मुद्दे हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, के अलावा भी कोई मुद्दे बचे है के नही ?

आज ज़रूरत इस बात की है के भारत माता है या पिता है के बहस के बीच ये सवाल बहुत जोर से उठ जाना चाहिए के भारत माता हो चाहे पिता हो लेकिन उसकी डेढ़ करोड़ संतान “वैश्या ” नही होनी चाहिए ।

जय हिंद