क्या आप जानते हैं अल्लाह ने शैतान को क्यों पैदा किया?

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इंसान को गुमराह करने और बहकाने में शैतान का रोल और भूमिका केवल यह है कि वह इंसानों को गुनाह की तरफ़ उकसाता और बहकाता है, वरना शैतान किसी को गुनाह करने पर ना ही मजबूर कर सकता है और ना ही इंसान के इरादों पर क़ब्ज़ा कर सकता है।

सबसे पहले यह कि अल्लाह ने शैतान को पाक फ़ितरत पैदा किया, लेकिन बाद में शैतान के अपने इरादे से गुमराही और शैतानी उस तक पहुँची। दूसरे यह कि ऐसे दुश्मन का होना इंसान के आगे बढ़ने और तरक़्क़ी करने में सहायता करेगा, अल्लाह के बंदे शैतान से मुक़ाबला कर के अपने आपको मज़बूत करते हैं, और मशहूर भी है कि कुश्ती के अखाड़े का असली पहलवान वही है जिसका प्रतिद्वंदी ताक़तवर हो। (तफ़सीरे नमूना, जिल्द 19, पेज 345-346) क्यों अल्लाह ने शैतान को धोखा देने और गुमराह करने में छूट दे दी? शैतान की आज़ादी, छल कपट करने, और धोखा देने में छूट का यह कारण है कि मोमिन बंदों को बेईमानों से अलग किया जा सके। (तफ़सीरे नमूना, जिल्द 18, पेज 74)

क्योंकि……
1. शैतान ने कई सदियों तक (6000 साल) अल्लाह की इबादत की, (दास्ताने शिगिफ़्त अंगेज़ी अज़ शैतान, हैदर क़ंबरी, पेज 19) और अल्लाह ने अपनी इबादत करने वालों को ईनाम देने का वादा किया है, जिस के कारण शैतान भी ईनाम का हक़दार हुआ, और उसने अपना ईनाम इंसान से दुश्मनी, घमंड, अकड़, और छल कपट करना धोखा देना चुन लिया है।

2. इंसान को गुमराह करने और बहकाने में शैतान का रोल और भूमिका केवल यह है कि वह इंसानों को गुनाह की तरफ़ उकसाता और बहकाता है, वरना शैतान किसी को गुनाह करने पर ना ही मजबूर कर सकता है और ना ही इंसान के इरादों पर क़ब्ज़ा कर सकता है।

3. इंसान ऐसे दुश्मन के सामने अक़्ल (बुध्दि), नबी और इमामों के मार्गदर्शन से लैस है।

4. इस तरह इंसान और शैतान के आमने सामने होने से इंसान और शैतान के बीच मुक़ाबले की शुरूआत हो जाती है।

5. इंसान का जन्म ना ही फ़रिश्तों के जैसा है और ना ही जानवरों के जैसा, बल्कि उसको आज़माने के लिए दोनों रास्ते उसको दिखा दिए गये हैं।