क्या मिमयाने वाली बक़री शेर की मौजूदगी में चारा खा सकती है?

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Sagar PaRvez
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सब जानते हैं कि राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद गत दो माह से खाली पड़ा है। इस पद को भरने के लिए 13 जून को दिल्ली में शेर और बकरी की कहानी के अनुरूप काम हुआ। कहानी है कि एक बकरी के सामने हरा चारा डाल कर एक शेर को बैठा दिया और उम्मीद जताई कि बकरी बड़े चाव से हरा चारा खा लेगी। लेकिन क्या मिमयाने वाली बकरी शेर की मौजूदगी में चारा खा सकती है?

इस कहानी का सार सबको पता है। 13 जून को दिल्ली में राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष के मामले में कुछ ऐसा ही हुआ। राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे का दिल्ली में सिंधिया विला निजी आवास है। पहले तो इस राजमहल में बैठक हुई और फिर बीकानेर हाउस में। दोनों बैठकों में सीएम राजे स्वयं उपस्थित रहीं।

हालांकि बीकानेर वाली बैठक में राज्य के अनेक वरिष्ठ मंत्रियों के साथ-साथ राजस्थान धरोहर संरक्षण प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष आंैकार सिंह लखावत, राज्यसभा के सांसद मदनलाल सैनी, केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत आदि भी उपस्थित थे। लेकिन जो मंत्री और नेता मुख्यमंत्री के सामने मिमयाने वाली स्थिति में होते हैं क्या वे बैठक में कोई प्रतिकूल टिप्पणी कर सकते थे। इन बैठकों में वो ही हुआ जो सीएम राजे चाहती थी।

राजेन्द्र सिंह राठौड़ और श्रीचंद कृपलानी जैसे मंत्रियों का कहना था कि हुकम (सीएम) आप जैसा चाहेंगी हम तो वैसा ही करेंगे। बीकानेर हाउस की बैठक के बाद भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय पर भी बैठक हुई। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह भी उपस्थित रहे। वहीं किरोड़ीलाल मीणा, रामनारायण डूडी, गुलाबचंद कटारिया, अर्जुन मेघवाल, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी जैसे नेता मौजूद थे।

सीएम का दबदबा
अमितशाह की उपस्थिति में हुई बैठक में भी सीएम राजे का दबदबा नजर आया। हालांकि इस बैठक में राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से दावेदार माने जा रहे गजेन्द्र सिंह शेखावत भी उपस्थित लेकिन वसंुधरा राजे के कई मंत्रियों ने दो टूक कहा कि शेखावत को अध्यक्ष बनाए जाने से विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रति नाराजगी बढ़ेगी।

मंत्रियों ने इस बात के भी संकेत दिए कि नवम्बर में होने वाली विधानसभा के चुनाव तक राजे के कहे अनुसार अध्यक्ष बना दिया जाए। अमित शाह को यह समझाया गया कि राजे की रणनीति से ही चुनाव जीता जा सकता है। यह बात अलग है कि राष्ट्रीय नेतृत्व को जो रिपोर्टे प्राप्त हो रही है उसमें सीएम राजे के प्रति प्रदेश में भारी नाराजगी बताई जा रही है। अब देखना है कि प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कब होती है।