क्या फ़ितरा, ज़क़ात, इमदाद, ख़ैरात हर किसी मुसलमान को दी जाए ?

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Mohd Rafiq Chauhan
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क्या फितरा, जकात, इमदाद, खैरात हर किसी मुसलमान को दी जाए? जो तथा कथित मदरसों और मस्जिदों के शफिर बनकर मुसलमानों के पास आते हैं और लाखों रुपये बतौर चन्दा इक्कठा करने के बाद कभी उन लोगों को हिसाब किताब नहीं देते, जो अपनी खुन पसीने की कमाई में से कुछ रुपया अपना फर्ज समझकर फितरा, जकात, इमदाद, खैरात के रुप में इस उम्मीद के साथ देते हैं। कि उनकी नेक कमाई जरुरतमंद लोगों के पास जा रही है।

दोस्तों, थोड़ा अनुमान लगाईये। सरकार के अनुसार मुसलमान देश में 25 करोड़ हैं और गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 30 करोड़ से भी ज्यादा। यदि मान लिया जाए कि एक मुस्लमान एक साल में 100 रुपये फितरा, जकात, इमदाद, खैरात के रुप में ऐसे लोगों को देता है। तो ये लोग देश के मुसलमानों से 2500-3000 करोड़ रुपये हर साल चंदे के रुप में उगाही करते है और विदेशों से चंदे की उगाही रही अलग।

फिर आप खुद ही अन्दाजा लगा सकते हैं कि इतनी भारी रकम को यदि एक सिस्टम के तहत इक्ठा किया जाए और उससे जरुरतमंद लोगों के लिए, स्कूल, अस्पताल और कॉलेज इत्यादि की स्थापना की जाए, तो उससे कौम और देश को कितना फायदा हो सकता है। मगर मुसलमान है कि बिना सोचे समझे जो भी मुसलमान चंदे की गरज से कापी लेकर उनके दर पर आ जाता है, उससे सवाब समझकर अपनी नेक कमाई का हिस्सा, ये जाने बिना थमा देता है कि उसका सही इस्तमाल हो भी रहा है या नहीं।

Mohd. Rafiq Chauhan
Advocate
Karnal, Haryana
9416097234, 7988213608