ख़ूंखार अमरीकी योजनाएं, टारगेट किलिंग और विरोधी सरकारों का तख़्ता उलटने की रणनीति पर काम शुरू

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यह लगता है कि अमरीका का डोनल्ड ट्रम्प प्रशासन जिसमें कई चरमपंथी अधिकारी शामिल हैं, टारगेट किलिंग और विरोधी सरकारों का तख़्ता उलटने की उसी रणनीति पर वापस जाना चाहता है जो शीत युद्ध के दौरान अमरीका ने लैटिन अमेरिकी देशों और मध्यपूर्व में अपना रखी थी।

इस रणनीति पर 1960 और 1970 के दशक में ख़ूब अमल किया गया।

यह सवाल उठाने के तीन कारण हैं जो हालिया दिनों सामने आए हैं।

न्यूयार्क टाइम्ज़ ने रिपोर्ट दी कि अमरीकी सरकार के अधिकारियों ने वेनेज़ोएला के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों से मुलाक़ात करके इस देश के राष्ट्रपति निकोलस मादोरो का तख़्ता उलटने के बारे में विचार किया।
मशहूर पत्रकार बाब वुडवर्ड ने अपने नई किताब में लिखा है कि डोनल्ड ट्रम्प ने अपने युद्ध मंत्री जेम्ज़ मैटिस से कहा था कि वह सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद तथा उनके क़रीबी लोगों की हत्या कर दें।
अगस्त महीने में अमरीका ने वेनेज़ोएला के राष्ट्रपति की हत्या के लिए एक ड्रोन विमान भेजा और उन पर उस समय हमला करवाया जब वह राजधानी काराकास में अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे थे।
इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि राष्ट्रपति ट्रम्प जिनके बारे में वुडवर्ड ने कई घंटों की बातचीत के आधार पर यह लिखा है कि वह मूर्ख, बेवक़ूफ़ और दुस्साहसी व्यक्ति हैं तथा किसी की कुछ नहीं सुनते, उन्होंने इस प्रकार के अपराधों का आदेश दिया हो। ट्रम्प की सरकार इस समय एक तिहाई दुनिया पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रही है उसने अनेक देशों की सरकारों को कमज़ोर करने के लिए उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखा है। इनमें ईरान, वेनेज़ोएला, तुर्की, चीन, रूस और पाकिस्तान सहित अनेक देशों का नाम लिया जा सकता है।

मादोरो की समस्या यह है कि उन्होंने पारदर्शी चुनावों में विजय तो प्राप्त की है लेकिन वह अमरीका के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। वह फ़िलिस्तीन के क्षेत्रों में इस्राईल के अपराधों की खुलकर निंदा करते हैं। ट्रम्प सरकार ने चुनावों में मादोरो को हराने के लिए विपक्ष की भरपूर मदद की मगर सारी कोशिशें नाकाम होने के बाद अब वह मादोरो की टारगेट किलिंग कर देने की कोशिश कर रहे हैं। यह भी संभव है कि वह हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह, ईरान की सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई, उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ऊन की भी हत्या करने की तमन्न रखते हों।

इस प्रकार की ख़ूंखार अमरीकी योजनाएं ही उसकी नाकामी का असली कारण हैं और इन योजनाओं का उलटा नतीजा निकल रहा है और ख़मियाज़ा खुल योजनाकारों को भुगतना पड़ रहा है। कारण यह है कि दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है और यह बदलाव अमरीका या उसके घटकों के हित में कदापि नहीं है। अमरीकी वर्चस्व बहुत तेज़ी से सिमट रहा है, नई क्षेत्रीय ताक़तें उभर रही हैं जो अमरीका के सामने बहुत बड़ी चुनौती के रूप में आज मौजूद हैं।

साभार रायुल यौम