खुलेआम चौक चौराहों सड़कों पर धार्मिक कार्यक्रम जो राहगीरों की ले लेते हैं जान!

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Mohammed Tarique‎
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खुले आम चौक चौराहों सड़कों पर धार्मिक कार्यक्रम जो दूसरे राहगीरों की ले लेते जान ! अपने शहर के लिए थोड़ा समय तो निकालो यार, सकरी से सकरी बाधित सड़क पर यातायात पुलिस पाश एरिया में करती कार्य : मो तारिक़*

भोपाल ! कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता एक पत्थर तो उछालो यारो ! लेकिन यह सब कहने सुन्ने में लगता हैं अच्छा ! जी हां यह सत्य है और यह दिखाई नही देता यातायात पुलिस को उसको बार बार उनके कार्य उत्तरदायित्व की याद दिलाने के बावाजूद उच्चय अधिकारी अपनी और नेताओं की चम्चागिरी से ही फुरस्त नही कार्य करेगा कौन यह सब ऐसा ही चलता रहेगा यह तो राष्ट्रवादी चिंतकों को सुध लेना ही होगी बिगड़ेल यातायात व्यवस्था में सबसे अधिक मुख्य तथा परिवर्तित सड़कों से मोहल्लों में अवैध पार्किंग, गैस चलित वाहन खड़े भीड़ भाड़ वाले छेत्रों में कन्या विद्यालय हों या महाविधालय बाहर आवारा मनचलों द्वारा अवैध पार्किंग ! शास्किया चिकित्सालय हो या नर्सिंगहोम वाहनों की लम्बी कतारों से होता रहता चक्काजाम !
शहरों में यातायात व्यवस्था हेतू अतिरिक्त पुलिस बल अतिरिक्त पुलिस वाहन नगरिया संस्थाओं द्वारा जनहित बजट मद से क्रेन क्रय किया जाकर यातायात पुलिस को यातायात व्यवस्था कार्य को संपादित करने के लिए अहम भूमिका निभाने अपने उत्तरदायित्वों व कर्तव्य निर्वहन करना चाहिये परंतु कभी ऐसा होता नही ! ज्ञातत्व रहे शहर के भीतर चक्काजाम जैसी स्थिति से निपटने हेतु पूर्व में निगम भोपाल एवं जिला यातायात पुलिस की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाता रहा कि निगम जिला यातायात पुलिस को छोटे क्रेन वाहन उपलब्ध कराए तो शहर के बीचो-बीच बनी सकरी से सकरी सड़कों पर भी सुचारु रुप से यातायात संचालित रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी ! जनता जनार्दन के द्वारा भुकतान राशी से नगरिया संस्था वाहन क्रय तो करती मगर यातायात पुलिस उसका सदउपयोग छोड़ कहां होगी अच्छा जुर्माना बस इसी में लगी रहती !
नगरिया संस्था द्वारा यातायात पुलिस को छोटे क्रेन वाहन उपलब्ध होते ही अवैध पार्किंग के खिलाफ अभियान जो निरंतर जारी रखना चाहिये था बस थोड़ा दिखावा कर यातायात पुलिस द्वारा जुर्माना राशि प्राप्त करने की कार्यवाही धीमी अथवा बंद हों जाती राजनेतिक दबाव कहें या हफ़ता वसूली !
नागरिकों से अपील, विनम्र निवेदन कर आग्रह किया जाता है कि “गाड़ियां अगर आपके इस्तेमाल की है तो दूसरे को तकलीफ क्यों देते हैं” ? शहर में तंग बस्तिय, आबादी बढ़ती जा रही है ! आबादी के साथ-साथ उनकी जीवन के साधन दो पहिया वाहन चार पहिया वाहन भी बढ़ते जा रहे हैं ! भवनों के निर्माण में नगरिया संस्थाओं का उदासीन रवैया अब लोगों के पास वाहन तो है लेकिन पार्किंग के लिए स्थान नहीं ! शहर के भीतर सकरी सड़कों पर अवैध पार्किंग होती है और कभी उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती थी ! जिससे वृद्ध, महिलाएं एवं छोटे बच्चे अक्सर दुर्घटना का शिकार होते व राहगीरों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता ! महीनों महीनों भर गैस किट लगी गाड़ियां खड़ी रहती हैं अगर एक गाड़ी के अंदर आग लग जाए तो आप खुद अंदाजा लगाइए क्या भयावह तस्वीर होगी शहर की !

“अब तो वैचारिक द्वंद है” !
मो. तारिक
(स्वतंत्र लेखक)