गगनदीप सिंह को सलाम !!VIDEO!!

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Harpal Singh Bhatia
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नाम: सरदार गगनदीप सिंह
पद: सब इंस्पेक्टर
संदर्भ: दो दिन पहले एक युवक को मॉब लिंचिंग का शिकार होने से बचाया

दो दिन पहले नैनीताल के गिरजा देवी मंदिर में यह युवक अपनी महिला साथी के साथ गया हुआ था! जैसे ही कुछ लोगों को पता चला कि युवक मुस्लिम है और युवती हिन्दू, लव जिहाद का रंग देकर भीड़ उस युवक को मारने के लिए हिंसक हो गयी. कुछ तो नफ़रत में युवती को भी मार डालना चाहते थे!

उस वक्त मंदिर में तैनात सब-इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह बिना डरे, बिना अपनी जान की परवाह किये, युवक को उन्मादी भीड़ से बचाया. भीड़ के उस गुस्से में गगनदीप भी लपेटे में आ सकता था! भीड़ में से एक उन्मादी ने युवक के ऊपर शक करते हुए कई बार बोला कि “ID दिखाओ, ID”! समझिये कि ID किस सोच के तहत माँग रहा होगा वो व्यक्ति! भीड़ से एक और आवाज़ (गगनदीप के लिए) आयी कि “किस बात का प्यार दिखा रहे हो आप इसपे?” भीड़ में से कई उसे अंदर ही बिठाने की बात कर रहे थे! गगनदीप ने युवक को अपने सीने से चिपकाए रखा और युवक भी गगनदीप के सीने पे दुबका रहा फिर भी भीड़ ने कई थप्पड़ लगा दिया!

मुसलमानों के विरुद्ध ये ये उन्माद कहाँ से बढ़ा है ज़रा सोचियेगा! गगनदीप सिंह को सलाम पहुँचे कि वो इस सांप्रदायिक माहौल में लाखों लोगों के लिए एक जज़्बा
बनकर उभरे हैं! हजारों सांप्रदायिक सनकियों पर अकेला गगनदीप भारी पड़ा!
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Ajay Tiwari
आजकल कर्मेंदु शिशिर की पुस्तक ‘भारतीय मुसलमान: इतिहास का संदर्भ’ (दो खंड) पढ़ रहा हूँ। शुरु में तथ्यों के अंबार से गुज़रते हुए आगे बढ़ना बहुत कँटिन था। गति बहुत धीमी थी। पर धीरे-धीरे रस आने लगा। अब कोई और काम करने का मन ही नहीं होता। खुद कर्मेंदु जी बात भी नहीं होती कि क्यों घंटा-डेढ़ घंटा किताब से दूर रहूँ! सच तो यह है कि उस पूरे दौर की पूर्वाग्रह-रहित समझ के लिए यह पुस्तक हर पाठक को पढ़नी चाहिए। यों भी, कर्मेंदु जी का बतियाता हुआ गद्य अलग ही रचनात्मक सुख देता है।

इस पुस्तक में अनेक बड़ी दिलचस्प और विचारोत्तेजक बातें हैं। उनपर लिखना होगा। लीलाधर मंडलोई का हुकुम है तो पालन करना ही है। इसलिए अपनी स्थापनाएँ पहले नहीं लिख रहा हूँ। लेकिन बाबर के वसीयतनामे का जो अंश मेरे आत्मीय मित्र कर्मेंदु शिशिर ने प्रस्तुत किया है, उससे आपको परिचित करने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ।

“हिंदुस्तान का मुल्क भिन्न-भिन्न धर्मों का गहवारा है।…यह मुनासिब है कि तू अपने दिल में सभी धर्मों की तरफ अगर कोई बदगुमानी है तो उसे निकाल दे और हर मिल्लत अथवा संप्रदाय के साथ उनके अपने तरीक़े से उनका न्याय कर और विशेष रूप से गाय की क़ुरबानी से बिलकुल परहेज़ कर, क्योंकि इससे तू हिंदुस्तान के दिल को जीत लेगा और इस मुल्क की रायता का दिल इस अहसान से दबकर तेरी बादशाही के संख रहेगा।तेरे साम्राज्य में हर धर्म के जितने मंदिर और पूजाघर हैं, उनको नुक़सान न हो।…इस्लाम की तरक़्क़ी ज़ुल्म की तेग़ के मुक़ाबले अहसान की तेग़ से ज़्यादा अच्छी हो सकती है।…प्रकृति के पाँचो तत्वों की तरह विविध धर्मों के पैरोकारों के प्रति व्यवहार करना ताकि सल्तनत का जिस्म विविध व्याधियों से पाक और साफ रहे।”
(भारतीय मुसलमान: इतिहास का संदर्भ’ (दो खंड), खंड-१, पृष्ठ-१८२)

अकेले एक उदाहरण काफ़ी है यह बताने के लिए कि बिना पूर्वाग्रह के इतिहास को देखें तो आज के अनगिनत भ्रम दूर हो सकते हैं। अज्ञान के भूत को ज्ञान का प्रकाश हि भगा सकता है। कर्मेंदु जी ने यह काम करके उसी परंपरा को नयी दिशा दी है जो रामविलास शर्मा ने क़ायम की है।

अगर बाबर मंदिर तोड़ने और धार्मिक भेदभाव करने का विरोध कर रहा था तो किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद उसने बनायी होगी, यह संदिग्ध है। बेशक, वह शासक था और हुमायूँ को शासन का सूत्र दे रहा था। लेकिन सवाल यह है कि कौन-सा सूत्र दे रहा था? क्या बता रहा था? ऊपर कही गयी बात को कौन गलत कहने का साहस करेगा?

यह तो इस बहुआयामी पुस्तक का एक छोटा-सा, गौण प्रसंग है। लेकिन चावल का एक दाना बताता है कि पतीले में कैसा भात पका है! मित्र कर्मेंदु शिशिर को इस महत यज्ञ के संपन्न होने का साधुवाद!!
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गगनदीप सिंह को सलाम !

22 मई को उन्होंने नैनीताल के गिरजा देवी मंदिर में एक युवक को मोब लिंचिंग का शिकार होने से बचाया. वह युवक मंदिर में अपनी प्रेमिका के साथ आया हुआ था. मंदिर की खूबसूरत लोकेशन की वजह से प्रेमी युगल प्रायः वहां आते रहते हैं.

मंदिर में उस वक्त बखेड़ा खड़ा हो गया जब लोगों को पता चला कि युवक मुस्लिम है और युवती हिन्दू. लोगों की भीड़ ये जानते ही उस युवक को मारने के लिए हिंसक हो गयी. इतना ही नहीं भीड़ में उपस्थित कई लोग युवती को भी मारने पर उतारू थे. इस घटना का जो वीडियो फुटेज सामने आया है उसमें एक व्यक्ति युवती से कहा रहा है कि ‘ मैं तो इसको गाड़ दूंगा, तेरे को भी काट दूंगा. ‘

शुक्र है उस वक्त मंदिर में तैनात सब इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह घटनास्थल पर पहुंच चुके थे.

उन्होंने बिना डरे हिंसक भीड़ से उस युवक को बचाया. भीड़ इतनी गुस्से में थी कि एक बार को लगा कि वह गगनदीप को भी मारना शुरू कर देगी. लेकिन गगनदीप ने अपनी जान की परवाह किये बिना उस युवक को बचा लिया. पूरी घटना के दौरान गगनदीप ने उस युवक को सीने से लगाकर पकड़े रखा ताकि उस पर कहीं से भी हमला न हो सके.

जबकि वहां उपस्थित अन्य पुलिस वाले गगनदीप जैसे नहीं थे. उनका इस घटना के बाद वही रवैया सामने आया जो वहां उपस्थित हिंसक भीड़ का था. उनमें सिर्फ गगनदीप ही ऐसे थे जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर उस युवक को बचाया.

गगनदीप की बहादुरी पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. किसी के लिए वह नायक हैं तो किसी के खलनायक. लेकिन ईमानदारी से देखा जाये तो इस वक्त गगनदीप साम्प्रदायिक बदहाली से जूझ रहे भारत में बेहतरी की एक उम्मीद के रूप में उभरे हैं. आज जहां भारत साम्प्रदायिकता की गर्त में डूबता जा रहा है वहां गगनदीप जैसे लोग उम्मीद जगाते हैं कि धर्म के नाम पर देश को तोड़ना संभव नहीं है. लोग किसी धर्म विशेष का होने से पहले इंसान हैं. उनमें आज भी मानवता बची हुई है. वो बगैर धर्म और जाति देखे , हर उस इंसान के पक्ष में खड़े होते हैं जिनके साथ गलत हो रहा होता है.

चंद धर्मांध और साम्प्रदायिक लोग अपनी लाख कोशिशों के बावजूद भी न तो देश को तोड़ सकते हैं न ही मानवता की हत्या कर सकते. जब भी ऐसी कोशिशें होंगी कोई न कोई गगनदीप आगे आता रहेगा.

साभार – Pradyumna Yadav

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