#चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ़ रावण ने बोला बीजेपी पर हमला, 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराना है

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रिहाई के बाद भीम आर्मी प्रमुख ‘रावण’ ने दी बीजेपी को चुनौती

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण को सहारनपुर जेल से रिहा कर दिया गया है. उन्हें तय समय से पहले ये रिहाई दी गई है.

जेल से निकलने के बाद चंद्रेशखर ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला.

उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराना ही उनका मकसद है.

उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता ही नहीं, विपक्ष में भी नहीं रह पाएगी.

चंद्रशेखर आजाद को साल 2017 में सहारनपुर में जातीय दंगा फैलाने के आरोप में ​गिरफ्तार किया गया था.

उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत आरोप लगाये गए थे. उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को चंद्रशेखर को जेल से रिहा करने का आदेश दिया था.

राज्य सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि उनकी माँ के आवेदन पर विचार करते हुए उनकी जल्द रिहाई का फ़ैसला लिया गया है.

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योगी सरकार ने क्यों कराई ‘रावण’ की रिहाई, जानिए इसके पीछे का गणित
एम. रियाज़ हाशमी, मेरठ
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सहारनपुर में मई 2017 की जातीय हिंसा के आरोपी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ‘रावण’ की राज्य सरकार की ओर से जेल से रिहाई का फैसला अकारण नहीं है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना और दूसरा लोकसभा चुनाव से पहले दलितों के प्रति हमदर्दी का संदेश देना।

दरअसल, रावण की सभी मामलों में पहले ही जमानत हो चुकी थी और केवल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत ही उसकी महज 26 दिन की कारावास अवधि शेष थी। ऐसे में इस फैसले को ही नहीं, बल्कि भाजपा को भी सियासी नफा-नुकसान की तराजू में तौला जाएगा।

बड़ा सवाल है कि सवर्णों का विरोध झेल रही भाजपा क्या इस दांव से दलितों के दिल जीत पाएगी? और रावण की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को क्या बसपा के खिलाफ भाजपा इस्तेमाल कर पाएगी?

2 अप्रैल को दलितों के भारत बंद के दौरान हिंसा और फिर 6 अगस्त को एससी-एसटी एक्ट के मूल स्वरूप को बहाल करने के फैसले से केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी देश भर में सवर्ण जातियों के निशाने पर है।

उधर 2019 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी को दलित विरोधी दाग छुड़ाने में हर संभव प्रयास लगातार करने पड़ रहे हैं।
सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर कांड को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के दलित विरोध का प्रतीक बनाकर पेश किया गया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो 18 जुलाई 2017 को इसी के विरोध में राज्यसभा से अपना इस्तीफा देकर भाजपा पर बाकायदा ऐसे आरोप भी लगाए।

हालांकि मायावती ने शब्बीरपुर हिंसा का विरोध किया, लेकिन भीम आर्मी का समर्थन नहीं किया और बिना नाम लिए इसे ‘छोटा मोटा संगठन’ बताया था।

8 जून 2017 को हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए चंद्रशेखर ‘रावण’ के समर्थन में यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक इमरान मसूद पहले ही दिन से खड़े थे।

मायावती के बाद राहुल गांधी ने भी सहारनपुर पहुंचकर खुद को दलित हितैषी के रूप में पेश किया था। तमाम दलित संगठन भी इस मसले पर सहारनपुर से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक जुटे।

ऐसे में संघ और भाजपा अपने ऊपर लगे दलित विरोध के धब्बे साफ करने में लगातार जुटी रही है। इसी साल मार्च में संघ ने पहले बनारस, फिर आगरा और मेरठ अपने समागमों के जरिए दलित प्रेम की ब्रांडिंग की।

आगरा में नीला मंच और दलित महापुरुषों की तस्वीरें मंच पर लगाने और मेरठ में दलितों के घरों से मंगाया गया खाना स्वयं सेवकों को परोसने से संघ दलितों को लेकर चर्चाओं में आया।

भाजपा ने भी मेरठ में 11 और 12 अगस्त को जिस स्थान पर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की, उसे ‘शहीद मातादीन बाल्मीकि नगर’ नाम दिया गया और परिसर में तमाम दलित क्रांतिकारियों व महापुरुषों के नामों को प्रदर्शित किया था।

लेकिन इस सबके बावजूद भी दलितों में अपेक्षित उम्मीद नहीं जग पा रही थी। रही सही कसर इसी हफ्ते शब्बीरपुर हिंसा के आरोपी ठाकुर पक्ष के रासुका में बंद तीनों युवकों की रिहाई ने पूरी कर दी थी।
चंद्रशेखर रावण के खिलाफ नवंबर से अब तक तीन-तीन महीने के लिए चार बार रासुका की अवधि बढ़ाई जा चुकी थी जो एक नवंबर को समाप्त हो रही थी। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद रावण की ओर से सुप्रीम कोर्ट में डेढ़ माह पहले एसएलपी दाखिल की गई थी।

अधिवक्ता हरपाल सिंह जीवन के मुताबिक इस पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए गए थे और शुक्रवार को इन्हें जवाब दाखिल करने हैं। अब दोनों सरकारें जवाब दे सकती हैं कि रावण की रिहाई हो चुकी है और इसके बाद जिरह के लिए कुछ नहीं बचता है।

देखना अब यह है कि भाजपा रिहाई के बदले रावण की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को बसपा के खिलाफ कितना इस्तेमाल कर पाएगी?

पुरानी अर्जी को बनाया आधार
भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की मां की जिस अर्जी को यूपी शासन ने रिहाई का आधार बनाया है, वह बहुत पुरानी है। रावण के अधिवक्ता हरपाल सिंह जीवन कहते हैं, ‘‘छह महीने से हमने इस संबंध में कोई आवेदन शासन से नहीं किया था।

वैसे भी शासन एक साल तक ही रासुका बढ़ा सकता है और यह अवधि 1 नवंबर को पूरी हो रही थी।’’ वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक इमरान मसूद ने सरकार के इस फैसले पर कहा कि देर से ही सही, लेकिन इससे दोनों पक्षों में सौहार्द बहाल होगा।
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भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ‘रावण’ की आधी रात को हुई रिहाई


सहारनपुर में 2017 में हुई जातीय हिंसा के मुख्य आरोपी और भीम सेना के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ रावण को सरकार ने रिहा कर दिया है। रावण को एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत जेल भेजा गया था। वह लगभग 16 महीने से जेल में बंद था। रावण को गुरुवार रात करीब 2:24 बजे जेल से रिहा किया गया। रावण की रिहाई के दौरान काफी समर्थक जेल के बाहर जमा रहे। जेल के चारों तरफ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

Saharanpur: Bhim Army Chief Chandrashekhar alias Ravan comes out of jail after Uttar Pradesh government ordered his early release. He was jailed under NSA charges in connection with the 2017 Saharanpur caste violence case pic.twitter.com/kqE0fz53Yj

— ANI UP (@ANINewsUP) September 13, 2018

रावण ने बीजेपी पर बोला हमला
सहारनपुर की जेल रिहाई के तुरंत बाद चंद्रशेखर ‘रावण’ ने एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फटकार लगाई जा रही थी जिससे सरकार डरी हुई थी, इसलिए उन्होंने खुद को बचाने के लिए जल्दी रिलीज का आदेश दिया। मैं आश्वस्त हूं कि वह10 दिनों के भीतर मेरे खिलाफ कुछ न कुछ आरोप लगाएंगे। मैं 201 9 में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए अपने लोगों से बात करूंगा।

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि, चंद्रशेखर उर्फ रावण को रिहा करने का आदेश सहारनपुर के जिलाधिकारी को गुरुवार को ही भेज दिया गया था। रिहाई का फैसला उनकी मां के प्रार्थना पत्र पर लिया गया है। चंद्रशेखर के जेल में बंद रहने की अवधि 1 नवंबर 2018 तक थी। चंद्रशेखर के साथ बंद दो अन्य आरोपियों सोनू पुत्र नथीराम और शिवकुमार पुत्र रामदास निवासी शब्बीरपुर को भी रिहा करने का निर्णय किया गया है। प्रदेश सरकार का यह फैसला दलित हितैषी छवि का संदेश देने का हिस्सा माना जा रहा है।

चंद्रशेखर उर्फ रावण को मई 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर में जातीय हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। चंद्रशेखर भीम सेना बनाकर सुर्खियों में आए थे। उन्हें 8 जून 2017 को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया था।

रावण की गिरफ्तार को लेकर दलित समाज में काफी विरोध हुआ था। गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन को सहारनपुर में दो दिनों तक इंटरनेट सेवा बंद रखनी पड़ी थी। इसे लेकर राजनीति भी खूब हुई।

मायावती शब्बीरपुर पहुंची थीं, जिसके बाद हिंसा और भड़क गई थी। वहां के तत्कालीन जिलाधिकारी और एसएसपी को हटा दिया गया था। बाद में एसएसपी को निलंबित कर दिया गया था।

कांग्रेस व आम आदमी पार्टी सीधे तौर पर चंद्रशेखर के पक्ष में खड़ी थी। बीते दिनों आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेल में बंद चंद्रशेखर से मिलने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी।