चरमपंथ और आतंकवाद किसी के भी हित में नहीं : अफ़ग़ान अधिकारी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह

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अफ़ग़ानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने कहा है कि इस इलाक़े में पाकिस्तान सहित किसी भी सरकार के लिए यह सबक़ है कि चरमपंथ और आतंकवाद दीर्घकाल में किसी भी देश के हित में मददगार साबित नहीं हो सकता।

एक साक्षात्कार में डाक्टर अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने कहा कि इस प्रकार के तत्व अपनी सरकार चाहते हैं और वह आख़िरकार किसी भी देश के विरुद्ध उठ खड़े होते हैं।

अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने कहा कि इमरान ख़ान ने पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद कहा कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहते हैं और हम इसका स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में चुनौतियां हैं लेकिन हमें आशा है कि हम मिल जुल कर काम करके इन चुनौतियों का मुक़ाबला कर सकते हैं और यह द नों पक्षों के निष्ठापूर्ण सहयोग से ही संभव है।

डाक्टर अब्दुल्लाह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करके बड़ी मदद की है और किसी हद तक रक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग हुआ है मगर अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर भारतीय सैनिकों की तैनाती के बारे में कभी बातचीत नहीं हुई है।

डाक्टर अब्दुल्लाह ने यह बात स्वीकार की कि अमरीका और तालेबान के बीच संपर्क हुआ है मगर उनका कहना था कि यह संपर्क इसलिए हुआ है कि अमरीका तालेबान को काबुल सरकार से वार्ता करने पर तैयार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि तालेबान लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे।