#जनता गुस्से में है….जब रेल में आ गया बीजेपी नेता, सवारियां बोलीं ‘इसे बाहर निकालो यहाँ महिला और बच्चियां हैं’ : देखें वीडियो

Posted by

देश देश की जनता में इस समय उबाल आया हुआ है, लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, धीरे धीरे अब पानी सर के ऊपर आ गया है, जनता के सब्र का बाँध टूटने लगा है, प्रधानसेवक ने जनता की ऐसी सेवा की है कि आज यहाँ कोई सुरक्षित नहीं है, जहाँ भी संघ की सरकारें हैं वहां कानून नाम की कोई चीज़ बाकी नहीं बची है, यहाँ देखें कि जब बीजेपी का एक नेता रेल में चढ़ आया तो जनता चीख पड़ी, हंगामा कर दिया ”निकालो निकालो’ की आवाज़ गूंज उठी,,,’निकालो यहाँ से यहाँ बच्चियां सफर कर रही हैं’,,यह जनता का गुस्सा है जो अब अपना हिसाब खुद बराबर करने को तैयार है

बलात्कार करो दंगा करो किसी को जान से मार दो और फिर कुछ दरिंदे किस्म के लोग जय श्री राम का नाम लेकर भारत माता की जय बोल कर उनके समर्थन में खड़े हो जाते हैं और यह सरकार कुछ नहीं उखाड़ पता उनका …लेकिन याद रखो दरिंदे ………भगवान श्रीराम तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा यह धरती मां तुझे कभी माफ नहीं करेगी अपनी मिट्टी में भी तुझे कभी मरने के बाद नहीं जगह देगी

Nabi Raniya
============
खिलौने खेलने की ही तो उम्र थी तुम्हारी। ना गुड़िया के बियाह के लिए गुड्डे की खोज खत्म हुई थी और ना ही उसकी गुड़िया के हाथ पीले हुए थे। गुड़िया को विदा करने की उम्र में एक फूल सी गुड़िया इस दुनिया से दरिंदगी का शिकार होकर विदा हो गई।

जितना फ़ोटो में नज़र आ रहा है आसिफा बेहद होशियार हुनरमंद और चंचल थी। मंजरी भूरी आंखों वाली, गोरी चिट्टी, और खूब बातूनी भी लगती है। इंसान ही क्या वो तो जानवरों का भी दिल जीत लिया करती थी। यही प्यार और लगाव उसे चरवाही में निपुण बनाता था। उस दिन जंगल से घोड़ों को लेने ही तो गई थी आसिफा लेकिन वापस नहीं लौटी। घर वालो ने खूब ढूंढा वो कहीं नही मिली मिलती भी कैसे दरिंदो ने ऊपरवाले का घर जो ढूंढा था उसे अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए जहां कोई ऐसा सोच भी नही सकता। तभी तो सभी जगह पर उसे ढूढा गया सिवाए मंदिर के।

हा मंदिर में ही तो रखा गया था उसे, जहां नशे की गोलियां खिलाई गई, मारा गया, मारने से पहले रेप किया गया और फिर अपनी जांघों पर उसकी गर्दन रख कर गला दबा दिया गया पर वो ज़िंदा थी फिर उसकी पीठ पर पैर रखे गए और पुरज़ोर तरीके से गला दबाया गया नन्ही सी जान कितना दम भरती वो भी नशे में आंखें बंद कर दी गईं अल्फाज़ो को खत्म कर दिया गया और चंचलता हमेशा के लिए खो गई।

पता है अब आसिफा की मौत को भी राजनीतिक मुद्दा बनाया जाएगा सोशल साइट्स पर कुछ दिन का हंगामा मचेगा। तमाम कैंडल जलेगी तमाम प्रोटेस्ट होंगे लेकिन कुछ वक्त के लिए और फिर सबकुछ आसिफा की तरह खामोश हो जाएग…

देखें वीडियो

============