जब तुम देखो की शाम में फ़साद है तो समझना तुम्हारे लिए कोई ख़ैर नहीं….

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Sikander Kaymkhani
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जब जमीन पर फितने फसाद होगें तो शाम में अमन होगा और जब तुम देखो की शाम में फसाद है तो समझना तुम्हारे लिए कोई खैर नहीं….

कुरान में अल्लाह ने शाम (सिरिया) का 5 आयतो में जिक्र किया है। और इसे बरकतों वाली और मुकद्दस जमीन कहा है। इस मुल्के शाम का नाम नूह अलैहिस्सलाम के बेटे शाम के तरफ मंसूब है।

अल्लाह ने जब अपने अम्बिया अलैहिस्सलामों को हिजरत कराई तो शाम में पनाह दिया, हजरत इब्राहिम हजरत लूत और हजरत सारा अलैहिस्सलाम को पनाह शाम में दी। मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी कौम के साथ इसी पाक जमीन पर पनाह ली। नबूवत से पहले हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सबसे पहले शाम का सफ़र किया। हजरत मुसा से लेकर हजरत ईसा तक सारे नबियों का किबला बैतूल मुकद्दश को बनाया और हुजुर भी 13 साल तक उसी तरफ रुख करके नमाज अदा करते रहे। और आने वाले वक़्त में मेहंदी अलैहिस्सलाम भी मक्का से हिजरत करके मुल्के शाम ही जायेंगे और ईसा अलैहिस्सलाम भी शाम में ही आयेंगे। इससे ये बात समझ में आती है की वहा मुसलमानों का मजबूत किला होगा तभी तो ये दोनों अजीम शख्सियत वहा आयेंगे।

अरब में जो लड़ाई जारी है वह मसलक या मज़हब की नहीं है, ये लड़ाई दो तहज़ीबों का टकराव है, इस टकराव में मुसलमानों में मौजूद फिरके भी अब के हिस्सा बन चुके हैं।

अल्लाह ने अपने हबीब की निस्बत से अरब और अजम के दिलों में एक दूसरे के लिए मुहब्बत पैदा कर दी थी जो इस कदर थी कि हर कलमा वाला आपस में भाई-भाई के जैसा था। अल्लाह के रसूल जब तक अल्लाह के हुकुम से इस ज़मीन पर रहे वह मुहब्बत आपस में कायम रही मगर आप के पर्दा कर लेने के बाद वह लोग जो कभी बिलकुल बिगड़े हुए मिजाज़ के थे और ज़रा सी बात पर बरसों खुनी लड़ियाँ लड़ते थे आगे चल के फिर वैसे ही चलन के हो गए।

खुलफाये राश्दा में हज़रत उस्मान गनी की खिलाफत के आखिरी सालों में इस्लामी हुकूमत/निज़ाम में गड़बड़ी शुरू हुई और इस हद तक कि लोगों ने साज़िश कर के मका और मदीना में अफवाहों के बाजार गरम कर दिए, मुस्लमान एक दूसरे की बुराई करने, चुगली करने और इलज़ाम,लगाने को ज़रा भी बुरा नहीं समझ रहे थे इसकी अहम् वजह दिलों से दफ़न हो चुकी मुहब्बत और उसकी जगह पैदा हो चुकी नफरत थी, चुनाचे हज़रत उस्मान गनी का मुहासिरा किया जाता, उन पर एक से बढ़ कर एक तोहमतें लगाई जातीं, अरब के बड़े अमीरों सरदारों, हाकिमों ने हज़रत उस्मान गनी से इजाज़त मांगी कि आप हुकुम दीजिये हम इस फ़ितने को हमेशा के लिए दफ़न कर देंगे पर हज़रत उस्मान ने सिर्फ इसलिए कि आपस में कोई टकराव, खूनखराबा न हो ये इजाज़त न दी, हजरत उस्मान गनी पर जब भी तोहमत लगाई जाती उनका घिराव किया जाता था तो हज़रत अली मुर्तज़ा वहां पहुँच कर हज़रत उस्मान गनी के साथ खड़े होकर उनका बचाव, दिफा करते।

हज़रत अली शेर ए खुदा इस बुरे वक़्त में हर वक़्त हजरत उस्मान गनी की हिमायत में हाज़िर रहे मगर दीन के दुश्मन अपनी मंशा में कामयाब हुऐ और उन्होंने हज़रत उस्मान गनी को शहीद कर दिया, और अब यहाँ फिर शाज़िश के तहत हजरत उस्मान गनी की शहादत के वाकिये के लिए हजरत अली को ज़िमेदार बता कर पूरे अरब में अफवाह फैला दी, गरज़ ये कि दुश्मन-ए-दीन मुस्तक़िल अपने काम में लगे रहे और वह कामयाब भी होते रहे, हजरत अली की शहादत, कर्बला में हज़रत हुसैन और साथियों की शहादतें भी इनको न रोक सकीं ये ज़ालिम तब से अब तक अपनी साज़िशों में कामयाब हो रहे हैं और मुसलमानो का खून पानी की तरह बह रहा है, हर रोज़ खबरें आती हैं कि आतंकी मारे गए, अरब की ज़मीन आज जंग का मैदान बनी हुई है, लोग समंदर में डूब कर मारने के लिए तैयार हैं पर मुक़द्दस अरब में रहना नहीं चाहते। वहां मारने और मारने वाले मुस्लमान हैं।


दुनियां के बाकि मुल्क अरब की जंग में अपने अपने फायदे देख कर लड़ रहे हैं, इनमे से किसी को मुसलमानों से कोई वास्ता नहीं है।

ये लड़ाई दमिश्क और जबहतुल नशरा पर शिकंजे की है। जो लड़ाई चल रही है इसे इशाई अर्मेगाडान कहते है और हदीस इसे मल्हाम्तुल कुबरा कहती है।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया दुनिया में एक जमात क़यामत तक हक पे होगी और उसे कोई शिकस्त नहीं दे पायेगा और वो जमात शाम में होगी।।
आप ﷺ ने तीन बार ये दुआ फरमाया की ऐ अल्लाह तू मेरे शाम और यमन में बरकत अता फरमा।।

आप ﷺ फरमाते हैं मैं लेटा हुआ था, ख्वाब में देखा की मेरे सर के निचे से उमुदुल किताब (ईमान)निकाली जा रही है मैंने समझा अब इसे जमीन से उठा लिया जायेगा मै जब उसकी तरफ देखा तो एक नूर की तरह था जिसे शाम में रख दिया गया ।

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया अल्लाह शाम पर रहमत व बरकत अता करे सहाबा ने पूछा क्यों या रसूलल्लाह ﷺ ? आप ﷺ ने फरमाया मै देख रहा हु बरकत के फ़रिश्ते शाम को अपने बाजुओं में लिए हुए है।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जब दुनिया में फितने फसाद होंगे तो ईमान शाम में होगा।

आपﷺने फरमाया जब जमीन पर फितने फसाद होगें तो शाम में अमन होगा। जब तुम देखो की शाम में फसाद है तो समझना तुम्हारे लिए कौई ख़ैर नहीं ।।।