जब हज़रत मूसा अलै. ने उसकी दुआ सुनी तो फ़रमाया ”इस चींटी की दुआ से अब अब बारिश हो जायेगी”

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Anees Husain Ansari
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• ​चींटी •

​चींटी​ में नर की कुन्नियत अबु मशग़ूल और मादा की कुन्नियत उम्मे तूबा है, इनमे जोड़े नहीं होते और ना तो सोहबत करने का तरीक़ा बल्कि उनके बदन से एक मामूली चीज़ निकलती है और बढ़ते बढ़ते वो अंडे की शक्ल इख्तियार कर लेती है जिससे कि उनकी नस्ल चलती रहती है, चींटी रिज़्क़ के मामले में बहुत हरीस होती है कई कई सालों का रिज़्क़ इकठ्ठा करके रखती है हालांकि उसकी खुद की उम्र 1 साल से ज़्यादा नहीं होती, रिज़्क़ को जमा करने का काम सिर्फ 3 लोग करते हैं पहला चूहा दूसरा चींटी और तीसरा इंसान, इसके अलावा कोई भी अपना रिज़्क़ जमा करके नहीं रखता, और चींटी तो बहुत ही तदबीर से काम लेती है कि हर दाने को तोड़कर रखती है कि कहीं उग ना आये और धनिया वगैरह के 4 टुकड़े कर देती है क्योंकि धनिया 2 टुकड़ों पर भी उग सकती है, जब दाने में बदबू या खराब होने का अंदेशा हो जाता है तो उसे ज़मीन पर डालकर सुखा लेती है और फिर वहीं रख आती है, जब कहीं रिज़्क़ मिल जाये तो फौरन सबको इकठ्ठा कर लेती है ताकि सब मिल बांटकर खाये, ज़मीन के नीचे इनका पूरा गांव बसा होता है जहां अलग अलग मंज़िलो में अलग अलग कमरे होते हैं और इन कमरों में सर्दियों का ज़खीरा गर्मियों में ही जमा कर लिया जाता है

📕 हयातुल हैवान,जिल्द 2,सफह 670

​हदीस​ – हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने चींटी, शहद की मक्खी, मेंढक, लटूरा, हुदहुद वगैरह इन जानवरों को मारने से मना फरमाया है

📕 अबु दाऊद,जिल्द 2,सफह 358

​हदीस​ – और कुछ जानवरों को मारने की ताक़ीद भी फरमाई है जैसे कटखना कुत्ता, चूहा, बिच्छू, चील, कव्वा, सांप और हर मूज़ी जानवर जो नुक्सान पहुंचाता हो

📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 10,सफह 100

​चींटी​ का ज़िक्र हो रहा है तो ये रिवायत ज़हन में आ गई की हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम रात के अंधेरे में 10 फर्सख के फासले से चींटी को देख लिया करते थे,1 फर्सख 3 मील का होता है और 1 मील 1.60934 किलोमीटर बनता है मतलब तकरीबन 48 किलोमीटर दूर से आप चींटी को देख लिया करते थे

📕 शिफा शरीफ,सफह 33

​हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम​ ने एक मर्तबा रब से पूछा कि ऐ मौला जब तू किसी बस्ती पर अज़ाब नाज़िल करता है तो उसमे तो ऐसे भी लोग मारे जाते हैं जो नेक होते हैं तू ऐसा क्यों करता है तो मौला ने उनको इस तरह जवाब दिया कि आपको नींद आ गयी और एक पेड़ के नीचे आप सो गए, वहां चींटियां बहुत थी एक चींटी ने आपके पैर में काट लिया तो आपकी आंख खुल गयी, मारे जलाल के आपने बहुत सारी चींटियों को पैर से मसल डाला, तब मौला इरशाद फरमाता है ऐ मूसा तुम्हें काटा तो एक ही चींटी ने था तो चाहिये था कि उसी को मारते मगर तुमने बहुतों को मार डाला ऐसा क्यों, फिर मौला इरशाद फरमाता है कि बेशक मेरा अज़ाब नेक और बद दोनों पर तारी होता है मगर बद के लिए वो सज़ा होता है और नेक के लिए तहारत और रहमत बन जाता है, इसी तरह एक मर्तबा सख्त अकाल पड़ गया और लोगों ने आपसे बारिश के लिए दुआ करने को कहा तो आप दुआ करने के लिए निकले तो रास्ते में देखा कि एक चींटी उलटी लेटी है पैरों को ऊपर करके और यूं दुआ कर रही है कि ​ऐ खुदा मैं तेरी मख्लूक़ में से एक मख्लूक़ हूं हम तेरे फज़्लो करम के मोहताज हैं, ऐ अल्लाह अपने गुनहगार बन्दों की शामत पर हमें ना पकड़ तु हमें ऐसी बारिश से सैराब कर जिससे कि दरख्त उगे और तू हमें फल खिलाये​ जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उसकी दुआ सुनी तो वापस हो लिए और फरमाया कि इस चींटी की दुआ से अब अब बारिश हो जायेगी

📕 अजायबुल हैवानात,सफह 56

​और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम और चींटी का किस्सा किसे नहीं पता होगा कि क़ुर्आन में एक सूरह का नाम ही चींटी के नाम पर है यानि सूरह नमल​ ।

इंन्शाअल्लाह जारी रहेगा

( तालिबे दुया अनीस हुसैन अन्सारी फ़ैज़ान अहमद अन्सारी समीर अन्सारी इर्साद अंसारी अश्फ़ाक़ अन्सारी आशिक़ निशार अन्सारी