*”जिसे “दोहराये” सारा जहां, वो “दास्तान” हो जाओ !*

Posted by

Chaitali Khattar

••••••••••••••••••••••••••••••
“ज़मीं” पर रखो “पैर”, और “आसमान” हो जाओ,
“जिसे “दोहराये” सारा जहां, वो “दास्तान” हो जाओ !

“बेख़बरी” के “आलम” से “मुल्क़” है “लरज़ाया” हुआ,
“हो “ख़बर” जिसकी सबको, वो “इन्सानियत” का “पैग़ाम” हो जाओ !

“अगर “निगाह” में बस “ख़ार”(काँटे) ही नज़र आते हैं,
“खिलाओ “गुल” कोई, और “गुलिस्तान” हो जाओ !

“मिली है “विरासतों” में सबको, ये “जीने” की “सज़ा”,
“आमाल-ए-नेक” से “आज़ादी-ए-इन्सान” हो जाओ !

“गुमनाम” हैं सब, इस “लाशों” के “शहर” में,
“अपनी “शिनाख़्त” करो, और “पहचान” हो जाओ !

“घर” तो कब का तेरा, “तब्दील” हुआ “दुश्वारी” में,
“कम से कम “इतना” ही करो, “ख़ुद” “आसान” हो जाओ !

“सुने” ही जाओगे “कब तलक़”, “इन्क़लाब” के “किस्से”,
“उठो, “बढ़ो”, तुम भी “हमज़बान” हो जाओ !

“ज़ुल्म” “सहते” रहने की, क्या “ज़रूरत” है तुम्हें,
“लड़ो”, कि “तुम भी” यहाँ “परवान” हो जाओ !

“जहाँ “इन्सानियत” और “भाईचारे” का रहे “बोलबाला”,
“ऐसा “मुल्क़” मेरा, “भारत महान” हो जाओ !
~~~~~~~~~~~~~~~
“लेखक – राशिद सैफ़ी “आप”
संस्थापक/अध्यक्ष
*इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी, मुरादाबाद*
www.iwsociety.com

====