जिस हिन्दुस्तानी मुस्लिम को अंग्रेज़ों ने तोप से उड़ा दिया था : 163 साल बाद लंदन मे मिली ‘अलम बेग’ की खोपड़ी!

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Sagar_parvez
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लंदन में मिली थी कानपुर के हिन्दुस्तानी मुस्लिम रणवांकुरे अलम बेग की खोपडी इस बात की पहली जानकारी 2014 में जब किम वैगनर लंदन के माइल्स एंड को तब मिली जब वह लंदन स्थित अपने दफ़्तर में बैठे थे। उस वक़्त उन्हें एक दंपति का ई-मेल मिला. इस दंपति ने वैगनर को लिखा था कि उनके पास एक खोपड़ी है।

डॉक्टर वैगनर लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी में ब्रिटिश साम्राज्य के दौर का इतिहास पढ़ाते हैं। उनसे दो माह मे लगातार 23 बार न्यूज़ पोर्टल स्टार न्यूज से हुई बातचीत के बाद कई चौकाने वाली बारे प्रकाश में आयी है जिसे सोचने पर सहज स्थितियों की भयानकता सजीव हो जाती है।

डा वैगनर के अनुसार अपने ई-मेल में इस दंपति ने लिखा था कि उन्हें अपने घर में इस खोपड़ी से दिक़्क़त हो रही थी, उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वो उसका करें तो क्या करें। इस खोपड़ी का नीचे का जबड़ा ग़ायब था. जो बचे-खुचे दांत थे, वो ढीले पड़ गए थे। खोपड़ी का रंग थोड़ा पीला सा हो चला था, जो उसके पुराने होने की गवाही दे रहा था। इस खोपड़ी की सबसे ख़ास बात जो उस दंपति ने इतिहासकार किम वैगनर को बताई वो ये थी कि उस खोपड़ी की आँख के सॉकेट में हाथ से लिखा एक नोट लगा था।इस नोट में उस खोपड़ी के बारे में लिखा था कि। यह बंगाल नेटिव की 46वीं रेजिमेंट के हवलदार अलम बेग की खोपड़ी है जिसे तोप के मुंह से बांध कर उड़ा दिया गया था।

जैसा अलम बेग की रेजीमेंट के बाक़ी साथियों के साथ किया गया था. वो 1857 की गुंडागर्दी वाली बग़ावत का प्रमुख नेता था। अलम बेग ने उस किले की तरफ़ जाने वाली सड़क पर क़ब्ज़ा कर लिया था, जिसमें बग़ावत के दौरान ख़ुद को महफ़ूज़ रखने के लिए सारे यूरोपीय जा रहे थे।अलम बेग और उसके साथियों ने अचानक हमला करके डॉक्टर ग्राहम को उनकी बग्घी में उनकी बेटी के सामने ही गोली मार दी थी।उसका अगला शिकार एक मिशनरी रेवरेंड मिस्टर हंटर बने थे,रेवरेंड हंटर भी अपनी पत्नी के साथ उसी तरफ़ जा रहे थे. अलम बेग ने मिस्टर हंटर और उनकी पत्नी को मार डाला था. इसके बाद उसने उनकी बेटियों पर पहले बेइंतिहा ज़ुल्म ढाए और फिर उन्हें भी सड़क के किनारे क़त्ल कर डाला था।

अलम बेग की उम्र क़रीब 32 बरस थी. उसकी लंबाई पांच फुट साढ़े सात इंच के क़रीब थी।उसकी सेहत अच्छी ख़ासी थी। ये खोपड़ी 7वीं ड्रैग गार्ड्स के कैप्टन ए आर कोस्टेलो स्वदेश लाए थे। जब अलम बेग को तोप से उड़ाया गया, तो कोस्टेलो वहां मौजूद थे।हाथ से लिखा हुआ ये नोट इस खोपड़ी की आँख के सॉकेट के भीतर रखा हुआ था।इस नोट से साफ़ था कि ये खोपड़ी 1857 के बागी भारतीय सैनिक अलम बेग की थी।

अलम बेग बंगाल रेजिमेंट के सिपाही थे. उन्हें 1858 में पंजाब के स्यालकोट में तोप के मुँह से बांधकर उड़ा दिया गया था।स्यालकोट आज पाकिस्तान के पंजाब सूबे में पड़ता है. नोट से ये भी साफ़ है कि अलम बेग को उड़ाने के गवाह रहे यूरोपीय सैनिक कैप्टन कोस्टेलो ही उसकी खोपड़ी को इंग्लैंड लेकर आए थे।

क्या ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ अलम बेगम ने की थी बग़ावत ??
नोट में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं है कि आख़िर अलम बेग़ ने यूरोपीय लोगों की हत्या क्यों की थी।1857 में भारतीय मुस्लिम और हिंदू सिपाहियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी थी।उन्हें ख़बर मिली थी कि जो कारतूस उन्हें दिए गए थे, उनमें जानवरों की चर्बी लगी थी, जिसे चलाने के लिए उसे मुँह में लगाना पड़ता था।1857 के ग़दर के दौरान झांसी में तैनात मेजर स्कीन ने अपनी पत्नी की मौत के बाद ख़ुद को गोली से उड़ा लिया था।इससे सिपाहियों को अपना धर्म भ्रष्ट होने का अंदेशा था. अंग्रेजों ने भारत पर क़रीब 200 साल राज किया। भारत को 1947 में ब्रिटिश हुकूमत से आज़ादी मिली थी।

जिस दंपति के पास ये खोपड़ी थी, वो ब्रिटेन के एसेक्स इलाक़े में रहते हैं. पति-पत्नी ने इंटरनेट पर बहुत तलाशा, मगर उन्हें अलम बेग के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।जब इस दंपति को इतिहासकार किम वैगनर के बारे में पता चला कि उन्होंने 1857 भारत मे हुए कानपुर के ग़दर के बारे में क़िताब लिखी है, तो उन्होंने किम से संपर्क साधने का फ़ैसला किया।

किम वैगनर इस दंपति से में मिले. उस दिन तेज़ बारिश हो रही थी. संयोग से उस दिन किम का जन्मदिन भी था।उस दंपति ने किम को बताया कि उन्हें ये खोपड़ी एक रिश्तेदार की विरासत के तौर पर मिली थी, उस दंपति के रिश्तेदार ने ब्रिटेन के केंट शहर में द लॉर्ड क्लाइड नाम का पब 1963 में ख़रीदा था।ये खोपड़ी उसी पब की इमारत के पीछे स्थित एक कमरे में बंद अलमारी में मिली थी।”गदर जुलाई 1857. जगहकानपुर।” के बारे मे डॉक्टर किम वैगनर कहते हैं कि ये खोपड़ी उस इतिहास का हिस्सा है जिसे किम वैगनर रोज़ अपने शागिर्दों को पढ़ाते हैं। जिसके बारे में उन्होंने किताब लिखी है। वैगनर ने कहा कि ये खोपड़ी वाक़ई में एक ट्रॉफ़ी जैसी ही है. इसका बेहद हिंसक इतिहास से ताल्लुक़ रहा है।

लेकिन, पहले किम वैगनर को ये तस्दीक़ करनी थी कि क्या वाक़ई ये खोपड़ी उसी दौर की है, जिसका ज़िक्र इसकी आंख के सॉकेट में रखे नोट में किया गया था. ये नोट भी एक अनजान शख़्स ने ही लिखा था ।लेकिन लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में एक शख़्स ने खोपड़ी का मुआयना करने के बाद कहा कि ये उन्नीसवीं सदी के मध्य से ताल्लुक़ रखने वाले शख़्स की है। ये एशियाई मूल के किसी मर्द की ही खोपड़ी है, जिसकी शायद तीस के दशक में मौत हो गई होगी। इस एक्सपर्ट ने बताया कि किसी को तोप से उड़ाया जाता था, तो गोले का असर आम तौर पर उस आदमी के पेट पर पड़ता था।
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