जो भी मज़लूमों के लिए लड़ेगा, उनके लिए आवाज़ उठाएगा उनके पीछे सीबीआई छोड़ देते हैं?

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Sikander Kaymkhani
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नदीम खान जी के पीछे भी छोड़ दिया है, पर वे इन्हें करारा जवाब दे रहे हैं. हम उनके साथ हैं,ये कारवां रुकना नहीं चाहिए.

पढिये उनका पोस्ट

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आज सुबह 10 बजे सीबीआई आफिस पहुंचे पहला सवाल यही था कि आप न तो jnu के स्टूडेंट हैं अब न नजीब के रिश्तेदार आप का इस मामले से रिश्ता है जो आप इसपे लगे हुए है. मेरा जवाब यही था जो इन्होंने नोट भी किये और शायद कोर्ट में दे कि मुल्क में 2 से 3 % को छोड़ दे तो ये पहली जेनरेशन है जो अच्छे कालेज और यूनिवर्सिटी में आई है नजीब एक छोटे शहर के मध्यवर्गीय परिवार का लड़का था अगर वो jnu के सबसे अच्छे कोर्स में पड़ कर जाता तो पूरे शहर के लिए मिसाल बनता और तमाम मुस्लिम लड़के उस से प्रेरणा लेते. उत्तर भारत मे मुस्लिम लड़के उच्च शिक्षा में मात्र 3% से 4% है नजीब अहमद को गायब करके हमको उनसे भी वंचित किया जा रहा है, अब बदायूं का कौन परिवार अपने लड़को को jnu भेजेगा JNU तो क्या बदायूं के बाहर भी नही भेजेगा. इसलिए नजीब उच्च शिक्षा से मुसलमानो को वंचित करने और शिक्षा में मुसलमानो के साथ हो रहे भेदभाव का प्रतीक है. और मुझे लगता है कि इस देश मे मुसलमानों की अधिकतर समस्याए शिक्षा से दूर होंगी इसके अलावा मैं एक्टिविस्ट हु न इंसाफी के खिलाफ आवाज़ उठाता हूं इंसाफ के पक्ष में खड़ा होता हु इसके लिए लड़ता हूं इन्ही सब कारणों की वजह से नजीब के आंदोलन का हिस्सा हूं. आपको क्या लगता है -ये तो आपको पता होना चाहिए बाकी आप खुद देखे की उन लड़कों से पूछताछ क्यो नही हुई 9 लाख रुपये लेने वाला वकील सामान्य छात्र कैसे कर सकते है. आखरी बात जो मैंने कही की आपका का काम जांच करना है मेरे पास लोकतंत्र में विरोध और प्रदर्शन का अधिकार है इस से पहले भी किये है अगर नजीब की जांच में संतुष्ट करनेवाले जवाब नही मिले तो सीबीआई आफिस या कही और प्रोटेस्ट करेंगे 2 साल होने का आ रहा है उस मॉ को भी कोई जवाब चाहिए जो शुगर की मरीज़ होकर भी 7 घण्टे बस का सफर करके हर 10 दिन में दिल्ली आती है और लाखों रुपये सिर्फ किराये में ही चले गए है बाकी नजीब के वापस आने तक हम लोग चुप नही रहेंगे। विक्रम सिंह चौहान।