तस्वीर नही तमाचा है ये

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Rahul Vikas
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उस स्कूली सिस्टम पर जो लोककल्याणकारी राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है ! जर्जर सरकारी विद्यालय को उपयोग लायक बनाने के जद्दोजहद से गुजरते इस दृश्य को आंखों में बसा लीजिये ! सरकारी विद्यालय के छप्पर पर बैठा यह नौजवान कोई छप्पर बनाने वाला मिस्त्री नही बल्कि इस विद्यालय का जांबाज शिक्षक है जिसने अपने दम पर जन सहयोग से विद्यालय को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने का जिद ठाने अपने परिवेश और सिस्टम के साथ जद्दोजहद कर रहा है ! उस दौर में जब सरकारी स्कूली सिस्टम पर चौतरफा नीतिगत हमले बढ रहे हैं , सरकारी विद्यालय व उसके शिक्षकों को भीषण भेदभाव का शिकार बनाया जा रहा है सरकारी शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त करने की साजिश उफान पर है उस दौर में यह दृश्य यह कहने की कोशिश कर रही है कि कितना जरूरी है सरकारी स्कूलों को बचाना सजाना संवारना ! उन सरकारी विद्यालयों को जिसपेे , समाज के अब भी साठ सत्तर फीसदी बच्चों की बुनियादी शिक्षा का दारेमदार है ! जिस सरकारी विद्यालयों की छतों के नीचे समाज के बहुसंख्य मजदूर किसान वंचित गरीबों के बच्चे अब भी न सिर्फ पढते हैं बल्कि उनका सामाजिकीकरण भी होता है ! स्कूली शिक्षा को लेकर ढेर सारी योजनाओं का दावा करनेवाली, आधारभूत संरचनाओं के लंबे चौडे रिकार्ड बखानने वाली, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के राग अलापने वाली सरकारों के आंखों पर चढी मोटी चर्बी को पिघलाने की कोशिश करते इस नौजवान शिक्षक की कोशिशों को सलाम है !

छत पर बैठे शख्स रा0 प्राथमिक विद्यालय, लाटबसेपुरा के शिक्षक अभिषेक कुमार भारतीय हैं और ये हमारे प्रिय मित्रों में से एक हैं यह कहते हुए न केवल गर्व महसूस हो रहा है बल्कि एक उम्मीद भी मजबूत हो रही है कि सरकारी विद्यालयों व पुरी सरकारी शिक्षा प्रणाली को बचाने की जंग में हम अवश्य जीतेंगे !
समस्तीपुर ज़िला स्थित सरायरंजन प्रखण्ड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, लाटबसेपुरा में इनके विद्यालय को शिफ्ट किया गया है और इन्होनें उक्त विद्यालय के जर्जर भवन को बेहतर बनाने का जंग छेड रखा है !
इनकी कोशिशों को आप भी तन मन धन से सहयोग करें !