तालिबान को आतंकवादी कहता था भारत, अब शांति वार्ता करेगा : रिपोर्ट

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अफ़ग़ानिस्तान की जंग में फंसा अमेरिका अब जल्दी से जल्दी वहां समझौता कर निकलने की फ़िराक़ में है, तालिबान से चोरी छिपे अब तक कई राउंड की बात हो चुकी है, तालिबान अमेरका की पूर्ण विदाई चाहते हैं जबकि अमेरिका चाहता है कि अफ़ग़ान सरकार और तालिबान समझौता कर लें और उसे कुछ सैनिक रखने की इजाज़त मिल जाये, अमेरिका अफ़ग़निस्तान के युद्ध से निकलना चाहता है मगर अफगानिस्तान को छोड़ना नहीं चाहता है, इस वार्ता में चीन, ईरान और रस के शामिल होने से उसकी परेशानी और बढ़ गयी है, वहीँ अफ़ग़ान और तालिबान भारत के वार्ता में शामिल होने को अच्छा मानते हैं, दूसरी तरफ पाकिस्तान भी जल्द से जल्द अफ़ग़ान शांति की कोशिशों में लगा हुआ है, एक समय था जब अमेरिका, भारत तालिबान को आतंकवादी कह कर सम्बोधित करते थे, अब मज़बूरी ऐसी बन गयी है कि अमेरिका को उसी तालिबान पटाने में पसीने छूट रहे हैं|

रूस के मॉस्को में आयोजित बहुपक्षीय बैठक में भारत पहली बार तालिबान से बातचीत करेगा। हालांकि इस बैठक में भारत की मौजूदगी आधिकारिक तौर पर नहीं होगी। यह बैठक शुक्रवार को आयोजित की जाएगी।

अफगानिस्तान में शांति के लिए इस बातचीत की मेजबानी रूस कर रहा है। इस बैठक में शामिल होने के लिए भारत, अमेरिका, पाकिस्तान और चीन समेत कई देशों को न्योता भेजा गया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविश कुमार ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हमें पता है कि रूसी संघ 9 नवंबर को अफगानिस्तान में शांति के लिए मॉस्को में एक बैठक की मेजबानी कर रहा है। भारत गैर-आधिकारिक स्तर पर इस वार्ता का हिस्सा होगा और इसका प्रतिनिधित्व अमर सिन्हा और सेवानिवृत्त राजनयिक टीसीए राघवन द्वारा किया जाएगा।

बता दें कि अमर सिन्हा अफगानिस्तान में भारत के राजदूत रह चुके हैं, जबकि राघवन पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं।

भारत की उठाया गया कदम बहुत अहम है, क्योंकि पिछले महीने ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत का दौरा किया था और द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी।

रविश कुमार ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में शांति और सुलह के सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो एकता और बहुलता को बनाए रखेगा और जिससे देश की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि कायम रहे।

रूस की एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस बातचीत में शामिल होने के लिए ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान को भी न्योता भेजा गया है।