तुर्की सहित कई देशों ने इस्राईल से अपने राजदूत वापस बुलाये, अरब देश चुप्प हैं!

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14 मई को इस्राईली सैनिकों ने फ़िलिस्तीनियों के ख़ून की होली खेलते हुए 59 फ़िलिस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया और 2000 से अधिक लोगों को घायल कर दिया है जिसके बाद पूरी दुनिया में ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा फूट पड़ा है।

जहां एक ओर अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए बैतुल मुक़द्दस में अपने दूतावास को स्थानांतरित कर लिया है वहीं दूसरी ओर इस्राईली सेना ने फ़िलिस्तीनियों का जनसंहार करते हुए 59 फिलिस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया है। तुर्की ने फ़िलिस्तीनियों के इस नरसंहार पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इस्राईल और अमेरिका से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है।

तुर्की मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ अंकारा स रकार ने फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार के विरोध में इस्राईल और अमेरिका में मौजूद अपने राजदूतों को तुरंत तुर्की वापस बुलाते हुए कहा है कि अमेरिका और इस्राईल मानवता के ख़िलाफ़ खुलकर जघन्य अपराध कर रहे हैं। दूसरी ओर कुवैत ने मंगलवार सुबह सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है।

सुरक्षा परिषद ने भी एक बयान जारी करके कहा है कि हम गज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने भी गज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों की हत्या की निंदा करते हुए कहा है कि इस नरसंहार के ज़िम्मेदारों के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मुक़द्दमा चलाया जाए।

फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार पर ईरान ने सबसे पहले कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए अंतर्राष्ट्रीय मनावाधिकार संगठनों और दुनिया भर के देशों से ज़ायोनी शासन के इस जघन्य अपराध के ख़िलाफ़ उठ ख़ड़े होने की अपील की थी उसके बाद से तुर्की, आयरलैंड और साऊथ अफ़्रीक़ा ने अपने-अपने राजदूतों को इस्राईल से वापस बुला लिया है। जबकि तुर्की ने अमेरिका से भी अपने राजदूतों को वापस बुलाया है।

उल्लेखनीय है कि नकबा दिवस के अवसर पर फ़िलीस्तीनी जनता द्वारा ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था। इस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए इस्राईली सैनिकों ने गज़्ज़ा वासियों पर पर अंधाधुंध फ़ायरिंग कर दी जिसके कारण अबतक 59 फ़िलिस्तीनी शहीद और 2410 से अधिक फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं, घायलों में 86 की हालत गंभीर बनी हुई है फ़िलिस्तीनी मीडिया का कहना है कि शहीद होने वालों में 16 वर्ष से कम आयु के आठ बच्चे शामिल हैं जबकि घायलों की स्थिति देखते हुए यह कहा जा सकता है कि शहीद होने वालों के संख्या में अभी और वृद्धि हो सकती है।