तो…अब सिर्फ़ मोदी की तारीफ़ के लिए ही नेट का प्रयोग किया जायगा!

Posted by

Sagar_parvez
=================
हमारा आवेदन पहले ही रिजेक्ट कर चुका है अजब तो यह है कि हवाला हमारे फ़ेसबुक पोस्ट का दिया गया हालाँकि किसी भी समाचार को फ़र्ज़ी साबित नहीं कर पाए

हमारे समाचार लेट ज़रूर हो सकते हैं पर बिना पुख़्ता प्रमाण हम पब्लिश नहीं करते पर….. गला घोंट दो हमारा ताकि आवाज़ ना निकले हाथ कलम कर दो ताकि कलम ना उठा सकें पर जबतक सिर कलम नहीं करोगे तानाशाही के खिलाफ सिर उठाते रहेंगे

पहले चेहरा नूरानी स्मृति ईरानी की कोशिश अब राजनाथ नाराज़ आपकी कलम अब सिर्फ़ वही लिखेगी जो सरकार चाहे

फर्जी ख़बरों पर चलेगा गूगल का चाबुक, हजारो पत्रकारों को करेगा तैयार
फ़र्ज़ी खबरों की आड़ में तानाशाही क्या राखना है क्या डीलेट करना है ये गूगल या गूगल के सिर पर हाथ रखने वाला तय करेगा

तकनीकी के इस जमाने में इंटरनेट लोगों की एक अहम आदत बनती जा रही है। लेकिन कई बार इस इंटरनेट का गलत इस्तेमाल भी देखने को मिला है। जिसका समाज पर बुरा असर पड़ता है। कुछ ऐसा ही खामियाजा कलम के सिपाहियों मतलब पत्रकारों को भी उठाना पड़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण हैं वो फर्जी खबरें जिससे प्रभावित होकर पत्रकार समाज को गलत संदेश पहुंचाने लगता है। हालांकि अब फर्जी खबरों के खिलाफ गूगल ने अपनी कमर कस ली है।

फर्जी ख़बरों पर चलेगा गूगल का चाबुक, हजारो पत्रकारों को करेगा तैयार…
मिली जानकारी के अनुसार, फर्जी ख़बरों के खिलाफ गूगल ने एक नई मुहीम छेड़ दी है जिसके तहत गूगल पत्रकारों को इस फर्जी ख़बरों से बचाने की कोशिश करेगा। इस बात की जानकारी देते हुए गूगल इंडिया ने बताया है कि वह भारत में अगले एक साल में 8,000 पत्रकारों को ट्रेनिंग देगा, जिसमें अंग्रेजी समेत 6 भारतीय भाषाओं के पत्रकार शामिल होंगे।

गूगल इंडिया ने बताया है कि गूगल न्यूज इनीशिएटिव इंडिया ट्रेनिंग नेटवर्क देश भर के शहरों से करीब 200 पत्रकारों का चयन करेगा और उन्हें ट्रेनिंग देगा। यह ट्रेनिंग लगभग पांच दिन चलेगी जिसमें पत्रकारों के कौशल को निखारने का काम किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह शिविर अंग्रेजी समेत छह अन्य भारतीय भाषाओं के लिए आयोजित किया जाएगा।

गूगल इंडिया ने एक बयान में कहा कि भारत के शहरों में अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगू, बंगाली, मराठी और कन्नड़ में ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा।

इस ट्रेनिंग के तहत पत्रकारों को फैक्ट के चेक करना और ऑनलाइन वेरिफिकेशन में सक्षम बनाने का काम किया जाएगा। इसके लिए फर्स्ट ड्राफ्ट, स्टोरीफुल, अल्टन्यूज, बूमलाइव, फैक्टचेकर डॉट इन और डेटालीड्स के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम का उपयोग किया जाएगा।

गूगल न्यूज लैब के प्रमुख (एशिया प्रशांत) इरेन जय लियु ने कहा, ‘विश्वसनीय, आधिकारिक मीडिया सोर्स को सपोर्ट करना गूगल के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है। यही कारण है कि हमें भारत में गलतफहमी के खिलाफ लड़ाई में पत्रकारों का समर्थन करने के लिए इंटरन्यूज, डेटालीड्स और बूमलाइव के साथ साझेदारी पर हमें गर्व है।’

सर्टिफाइड ट्रेनर्स के इस नेटवर्क द्वारा पत्रकारों के लिए दो दिवसीय, एक दिवसीय और आधा दिन की वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा।