दलितों को मंदिर नहीं संविधान चाहिये : दलित सांसद सावित्री बाई फुले ने छोड़ी बीजेपी

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उत्तर प्रदेश के बहराइच से बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा को एक बड़ा झटका देते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सावित्री बाई फुले अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बनी रहती हैं। हाल ही में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिन्दुत्वादी नीतियों पर जमकर निशाना साधा था। फुले ने बीजेपी से त्यागपत्र देने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी समाज में बंटवारे की साज़िश कर रही है।

इससे पहले मंगलवार को सावित्री बाई फुले ने कहा था कि हनुमानजी दलित और मनुवादियों के ग़ुलाम थे। उन्होंने कहा कि अगर लोग कहते है कि राम भगवान है और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमानजी ने किया था, उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? फुले का यह बयान योगी आदित्यनाथ द्धारा हनुमान जी को दलित बताने के बाद आया था। याद रहे कि हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए हनुमान को दलित और वनवासी बताया था, जिसके बाद से इस विवाद ने तूल पकड़ लिया था।

सावित्री बाई के किन बयानों ने सियासी हलचल मचाई और पार्टी को असहज स्थितियों में डाला।
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4 दिसंबर 2018
हाल ही में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के राजस्थान में हनुमान को दलित-वनवासी बताए जाने वाले बयान पर सावित्री ने तीखा बयान दिया था। हनुमान जी को दलित बताए जाने पर उन्होंने कहा कि हनुमान जी दलित थे लेकिन मनुवादियों के खिलाफ थे। तभी राम ने उन्हें बंदर बना दिया।

10 नवंबर 2018
सावित्री बाई फुले ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। उन्होंने ने कहा कि अयोध्या बुद्ध की कर्मस्थली है, इसलिए वहां बुद्ध की प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। सावित्री बाई फुले ने विवादित स्थल में हुई खुदाई के दौरान निकले अवशेषों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अवशेष बुद्ध से जुड़े हुए थे।

19 अगस्त 2018
एक कार्यक्रम में सावित्री बाई फुले ने अपनी ही पार्टी की सरकारों को कोसा। उन्होंने कहा कि दलितों की बात करें तो केंद्र की मोदी सरकार व योगी सरकार दलितों के हितों की अनदेखी करती आ रही है। सरकार 10 में एक भी अंक पाने की हकदार नहीं है।

14 मई 2018
सावित्री बाई फुले ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। सांसद ने कहा कि यह मैं नहीं कह रही बल्कि, देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को प्रताड़ित किया जा रहा है। आरक्षण खत्म कर संविधान में संशोधन की बात कही जा रही है।

11 मई 2018
मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर विवाद लेकर उन्होंने मो. अली जिन्ना को महापुरुष करार दिया था। उन्होंने कहा था कि आजादी की लड़ाई में जिन्ना का योगदान था। इसलिए जिन्ना की तस्वीर को जहां भी लगाए जाने की जरूरत है उस जगह पर लगाई जानी चाहिए।

7 मई 2018
सांसद सावित्री बाई फुले के बोल से भाजपा सरकार की योजनाओं की पोल खुल रही है। सांसद का कहना है कि सरकार की योजनाएं गरीबों तक नहीं पहुंचती, सिर्फ उन्हें झुनझुना पकड़ाया जा रहा है। थोड़ा सा लालच देकर विकास की बात की जाती है, जबकि दलित और गरीब आज भी जैसे-तैसे जिंदगी काट रहा है।

4 मई 2018
सावित्री बाई फुले ने नेताओं के दलितों के घर भोजन करने को लेकर सवाल उठाए और उनके (नेताओं) इस कृत्य को दलितों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि ये जो परंपरा चल रही है उसमें दलित वर्ग का सिर्फ अपमान हो रहा है। नेता दलित के घर खाना खाने जाते हैं लेकिन खाना बनाने वाला कोई और होता है, परोसने वाला कोई और। बर्तन टेंट हाउस के होते हैं।

सावित्री बाई को कई मौकों पर भाजपा से चेतावनी भी मिली, लेकिन उनके बगावती तेवर कमजोर नहीं पड़े। अंत में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर हमेशा के लिए भाजपा से नाता ही तोड़ लिया। लेकिन उनके इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।