दिल्ली यूनिवसिर्टी छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी में एक नया ख़ुलासा

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दिल्ली यूनिवसिर्टी छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की इन ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में भी होता रहा है। वहीं बार एसोसिएशन के एक चुनाव को इन मशीनों के चलते निरस्त भी किया गया था। हाल ही में पटियाला हाउस की नई दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में इन मशीनों का इस्तेमाल हुआ था।

डीयू से किराए पर ली जाती हैं ईवीएम
दिल्ली बार काउंसिल में पूर्व सचिव रह चुके राजेश मिश्रा के मुताबिक दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में इन मशीनों का लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। उन्होंने बताया कि तकरीबन 8-9 साल पहले उन्होंने ही पहली बार दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल की प्रथा शुरू की थी। मिश्रा के मुताबिक आमतौर पर बार एसोसिएशन के चुनावों में दिल्ली यूनिवसिर्टी से ही ईवीएम किराए पर ली जाती थीं। बार एसोसिएशन में तकरीबन 20 ईवीएम इस्तेमाल होती हैं। मिश्रा ने बताया कि हाल ही में 31 अगस्त को पटियाला हाउस की नई दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में इन्हीं ईवीएम का इस्तेमाल हुआ था। वहीं दिल्ली बार काउंसिल के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाते हैं।

तीस हजारी बार एसोसिएशन का चुनाव हो चुका है निरस्त
वहीं हाल में नई दिल्ली बार एसोसिएशन के चुनावों में वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ चुके हरीश शर्मा के मुताबिक इस बार ईवीएम के 21 मशीनें इस्तेमाल हुई थीं। इन ईवीएम को डीयू से मंगवाया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि डीयू को ढाई लाख रुपए किराया दिया गया था। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि पांच-छह साल पहले तीस हजारी बार एसोसिएशन के चुनावों में इन ईवीएम का प्रयोग हुआ था और जिस पर काफी बवाल हुआ था। उन्होंने बताया कि तीस हजारी रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी के यहां चली इंक्वॉयरी में मशीन ऑपरेटर ने बयान दिया था कि इन मशीनों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। हालांकि दो साल की सुनवाई के बाद इन चुनावों को अमान्य करार दे दिया गया था।

डीयू चुनावों में लगी थीं 725 बैलेट यूनिट
वहीं दिल्ली यूनविसिर्टी ने 10 सितंबर को जारी एक सर्कुलर में बताया था कि इन ईवीएम मशीनों को इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से खरीदा गया है। साथ ही इनके मास्टर ट्रेनर इनके इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी देते हैं। डीयू सूत्रों के मुताबिक इन मशीनों को तकरीबन 10 साल पहले खरीदा गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में 725 बैलेट यूनिट लगाई गई थी, इसके साथ 285 कंट्रोल यूनिट लगी थी। 25 बैलेट यूनिट अतिरिक्त थीं, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे खराब वाली से बदला जा सके।

ईवीएम की उम्र 15 साल
डीयू सूत्रों ने बताया कि 2007 में डीयू चुनावों के लिए मुख्य चुनाव आयोग से मशीनें मांगी गई थीं, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से मशीनें खरीदी गई थीं। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक इन ईवीएम मशीनों की उम्र 15 साल होती है, लेकिन रखरखाव ठीक न होने से इनके कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है।

चुनाव आयोग ने किया था इंकार
इससे पहले गुरुवार को मुख्य चुनाव आयोग ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि छात्र संघ चुनावों के लिए चुनाव आयोग ने दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन को कोई मशीनें नहीं दी हैं। आयोग का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को कोई मशीनें उपलब्ध नहीं कराई हैं। आयोग के सूत्रों ने बताया था कि जहां भी चुनाव आयोग की मशीनें इस्तेमाल होती हैं, उससे पहले इनके प्रयोग की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है, साथ ही इनके रखरखाव को लेकर जरूरी प्रोटोकॉल को भी फॉलो किया जाता है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक देश में केवल दो ही कंपनियां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ही ईवीएम मशीनों का निर्माण करती हैं।

एनएसयूआई ने उठाया था मामला
गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को चुनाव हुए थे। चुनाव के नतीजे अगले दिन जारी किए गए थे। मतगणना के दौरान छात्र संगठन एनएसयूआई ने ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी का आरोप लगा कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी। एनएसयूआई का आरोप था कि एक ईवीएम में 10वें नंबर के बटन पर चालीस वोट पड़े हैं। जबकि नोटा को मिलाकर कुल 9 ही उम्मीदवार थे। ऐसे में 10वें नंबर का बटन काम नहीं करना चाहिए था।

इन्होंने हासिल की जीत
डीयू चुनावों में अध्यक्ष समेत तीन पदों पर एबीवीपी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। अध्यक्ष पद पर अंकिव बसोया, उपाध्यक्ष पद पर शक्ति सिंह और संयुक्त सचिव पद पर ज्योति चौधरी ने जीत हासिल की। जबकि सचिव का पद एनएसयूआई के खाते में गया. इसपर आकाश चौधरी ने जीत हासिल की।