दुनिया की मुश्किलें तो चन्द दिनों की हैं पर आख़िरत का इनाम हमेशा के लिये हैं : ‎अंजली कुमारी का लेख

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‎अंजली कुमारी‎
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💖अल्लाह का दीन हमारी जिन्दगी में बगैर मेहनत के नहीं आना, कि हम अपनी दुकानों में, अपने घर में, अपनी आफिसों में बैठे रहें और हमें हुजूर अकरम सल्ल० वाला गम व दर्द मिल जाए और हमें हुजूर सल्ल० वाली जिन्दगी मिल जाए। कीमती चीज मेहनत से मिलती है और बेकार चीज़ मुफ्त मिल जाती है।
आप सल्ल० ने फरमाया : सुन लो ! दुनिया गिरी पड़ी हुई चीज़ है, चाहे काफिर खाए, चाहे मुसलमान खाए, अल्लाह को कोई परवाह नहीं और आखिरत एक हक और सच्चा वादा है, जिस दिन वह रब क़दीर तुम्हारे दरमियान फैसला फरमाएगा।

आप सल्ल० की बेटी बीमार हैं, आप सल्ल० घर में तशरीफ लाए, एक सहाबी साथ हैं, हजरत इमरान बिन हुसैन रजि० बअ़ज रिवायत के मुताबिक हजरत सलमान फारसी रजि०। आपने फरमाया : बेटी ! मैं तेरी अ़यादत के लिए आया हूँ, मेरे साथ इमरान रजि० हैं। बेटी ने कहा कि मेरे घर में इतना कपड़ा नहीं कि मैं अपने को छुपा कर परदा कर सकूँ। आप सल्ल० ने अपने कन्धे से चादर उतारकर अन्दर दे दी कि बेटी यह चादर लेकर अपने ऊपर ले लो। परदा किया। आप सल्ल० अन्दर तशरीफ लाए और फरमाया : बेटी ! क्या हुआ? क्या तकलीफ है? हजरत फातिमा रजि० के आँसू निकल पड़े, कहने लगीं : या रसूलुल्लाह ! बीमारियाँ हैं, भूख हैं, परेशानियाँ हैं। रोने लगीं। बाप की मुहब्बत में आप सल्ल० की आँखें भी आँसुओं से तर हो गयीं। फरमाने लगे : बेटी ! मत रो तू क्यों घबराती है, तेरा बाप भी तीन दिन दिन से भूखा है।

अगर भूख बड़ी चीज़ होती तो हुजूर सल्ल० पर फाके न आते और आपने फिर यूँ नहीं कहा कि ऐ अल्लाह ! मेरी फातिमा रजि० के लिए दरवाजे खोल दे बल्कि यूँ कहा कि ऐ फातिमा ! खुश हो जा। अल्लाह तआ़ला ने तुझे जन्नत की औरतों का सरदार बनाया है।

और एक रिवायत में आता है कि जन्नत में एक चमक उठेगी, जैसे सूरज चमकता है तो जन्नत वाले कहेंगे, ऐ रिजवान ! (रिजवान जन्नत के दरोगा का नाम है) हमने सुना था कि जन्नत में कोई सूरज नहीं होगा, यह सूरज की चमक कहाँ से उठ रही है? तो रिजवान कहेगा कि ऐ जन्नत वालों ! यह सूरज की चमक नहीं है, यह अली रजि० और फातिमा रजियल्लाहु अन्हा हँस रहे हैं, उनके दाँतों के नूर की चमक है जिससे सारी जन्नत रोशन हो रही है।

दुनिया की मुश्किलें तो चन्द दिनों की हैं पर आखिरत का इनाम हमेशा के लिये हैं!